नई दिल्ली: एक्स (पहले ट्विटर) ने गुरुवार, 8 मई को घोषणा की कि भारत सरकार ने उसे देश में 8,000 से ज़्यादा एकाउंट्स को ब्लॉक करने का आदेश दिया है. कंपनी ने कहा कि वह इन आदेशों से सहमत नहीं है, लेकिन इसके बावजूद उसने पालन करना शुरू कर दिया है.
कंपनी ने यह भी कहा कि अगर वह इन आदेशों का पालन नहीं करती, तो उसे भारी जुर्माने और भारत में मौजूद उसके कर्मचारियों को जेल की सज़ा जैसी सख्त सज़ा का सामना करना पड़ सकता है.
एलन मस्क की यह सोशल मीडिया कंपनी ऐसे समय में यह घोषणा कर रही है जब कई पत्रकारों और मीडिया संस्थानों के एक्स एकाउंट्स सरकार के आदेशों के चलते भारत में ब्लॉक कर दिए गए हैं.
एक्स के ग्लोबल गवर्नमेंट अफेयर्स डिपार्टमेंट ने कहा कि सरकार द्वारा जारी 8,000 से अधिक ब्लॉकिंग आदेशों में से ज़्यादातर में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि किस एकाउंट की कौन सी पोस्ट भारत के स्थानीय कानूनों का उल्लंघन करती है. उन्होंने आगे बताया है, ‘कई एकाउंट्स के मामले में हमें कोई सबूत या स्पष्टीकरण नहीं मिला कि उन्हें ब्लॉक क्यों किया जा रहा है.’
कंपनी ने कहा, ‘हम भारत सरकार की इन मांगों से असहमत हैं.’ हालांकि, उसने यह भी कहा कि वह भारत में आदेशों का पालन करते हुए संबंधित एकाउंट्स को ब्लॉक करेगी.
कंपनी ने आगे कहा, ‘पूरा एकाउंट ब्लॉक करना न केवल अनावश्यक है, बल्कि सेंसरशिप के समान है, और यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मूल अधिकार के खिलाफ है.’ एक्स ने स्वीकार किया कि यह आसान फैसला नहीं था, लेकिन भारत में एक्स को उपलब्ध बनाए रखना ज़रूरी है ताकि लोगों तक जानकारी पहुंचती रहे.
एक्स ने कहा कि वह पारदर्शिता के हित में सरकार के ब्लॉकिंग आदेशों को सार्वजनिक करना चाहता है, लेकिन ‘कानूनी प्रतिबंधों’ के कारण वह मोदी सरकार के इन आदेशों को पब्लिक नहीं कर सकता.
कंपनी ने यह भी बताया कि वह कानूनी रास्ते तलाश रही है. साथ ही, उसने इन ब्लॉकिंग आदेशों से प्रभावित सभी यूज़र्स को सलाह दी कि वे अदालत में उचित राहत की मांग करें. इसके लिए कंपनी ने भारत में कानूनी सहायता देने वाले संगठनों की वेबसाइट्स भी साझा कीं.
इसके बाद एक्स का ग्लोबल गवर्नमेंट अफेयर्स का एकाउंट भी भारत में ब्लॉक कर दिया गया. हालांकि, बाद में यह एकाउंट फिर से दिखने लगा.
ब्लॉक किए गए एकाउंट्स में ‘मकतूब मीडिया’ भी शामिल
मकतूब मीडिया एक ऐसा डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है जो भारत में मानवाधिकार और अल्पसंख्यक मुद्दों की रिपोर्टिंग करता है. इसका एक्स एकाउंट भी भारत में ब्लॉक कर दिया गया है.
भारत से जब इस एकाउंट को एक्सेस करने की कोशिश की जाती है, तो एक संदेश दिखाई देता है: ‘यह एकाउंट कानूनी आदेश के तहत भारत में ब्लॉक किया गया है.’ एक्स ने इस प्रतिबंध का कोई कारण नहीं बताया.
‘प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला’
मकतूब के संपादक अस्लह कइयालकत ने इसे प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला बताया है. उन्होंने एक्स पर लिखा है, ‘हमें सरकार की इस मनमानी कार्रवाई के पीछे की कोई वजह नहीं बताई गई है… मकतूम उस वक्त भी सच्चाई के पक्ष में खड़ा रहेगा जब सच को सबसे ज़्यादा दबाया जा रहा हो.’
द वायर से बातचीत में अस्लह ने बताया कि उन्हें इस प्रतिबंध के पीछे का कारण तो नहीं पता, लेकिन मकतूब की रिपोर्टिंग को लेकर उन्हें अब तक कम-से-कम 50 धमकी भरे कॉल मिल चुके हैं—खासकर मुस्लिमों और कश्मीरी छात्रों पर नफरत भरे भाषणों और हमलों की कवरेज को लेकर.
उन्होंने कहा, ‘हमने 64 से ज़्यादा नफरत भरे भाषणों की रिपोर्टिंग की है. हमने नफरत से प्रेरित हमलों और लिंचिंग की रिपोर्टिंग की, जिसमें मंगलुरु में एक मुस्लिम व्यक्ति की हत्या शामिल है.’ अस्लह ने बताया, ‘उसे पाकिस्तान समर्थक नारे लगाने का झूठा आरोप लगाकर मारा गया था, लेकिन हमने इस झूठी कहानी का पर्दाफाश किया और दिखाया कि वह केवल एक ऊंची जाति के व्यक्ति का पानी पीने के कारण मारा गया.’
अस्लह ने कहा कि मकतूब ने सबसे पहले पाकिस्तान की ओर से की गई गोलाबारी में पुंछ में मारे गए लोगों की सूची प्रकाशित की थी. हम तथ्यों की रिपोर्टिंग करते हैं. हमने लेफ्टिनेंट विनय नरवाल और टट्टू चलाने वाले आदिल शाह की प्रोफाइल लिखी. हमने युद्धोन्माद और अंधराष्ट्रवाद को बढ़ावा नहीं दिया.’
उन्होंने कहा, ‘सोशल मीडिया कंपनियों से कोई स्पष्ट जवाब मिलना मुश्किल है, लेकिन हम इस प्रतिबंध को चुनौती देंगे.’
मकतूब के अलावा इंडियन एक्सप्रेस के डिप्टी एडिटर और वरिष्ठ पत्रकार मुज़म्मिल जलील, कश्मीर की पत्रकार अनुराधा भसीन, समाचार वेबसाइट कश्मीरियत, और सामाजिक मुद्दों पर वीडियो बनाने वाले इन्फ्लुएंसर अर्पित शर्मा के एकाउंट्स भी भारत में ब्लॉक कर दिए गए हैं.
भारत-पाकिस्तान के बीच जारी तनाव के बीच सोशल मीडिया पर भारी मात्रा में गलत सूचना फैल रही है, जिसके चलते भारत सरकार ने पाकिस्तानी एकाउंट्स को विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर ब्लॉक करना शुरू कर दिया है.
सरकार ने कई पाकिस्तानी समाचार संस्थानों और मशहूर हस्तियों के सोशल मीडिया एकाउंट्स को भी भारत में ब्लॉक करवा दिया है.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)
