सीबीएफसी ने धड़क-2 फिल्म को 16 कट्स, जातिगत भेदभाव वाले संवादों में बदलाव के बाद दी मंज़ूरी

वर्ष 2018 की जाति-विरोधी तमिल फिल्म 'परियेरुम पेरुमल' की रीमेक धड़क-2 को सीबीएफसी ने जाति-आधारित भेदभाव जैसे गाली-गलौज और हिंसा वाले दृश्यों को हटाने सहित कई संशोधन करने के बाद रिलीज़ को मंज़ूरी दे दी है. 2018 में आई मूल फिल्म चार कट के बाद रिलीज़ हुई थी.

धड़क 2 का पोस्टर. (फोटो: धर्मा प्रोडक्शंस के आधिकारिक यूट्यूब चैनल से वीडियो स्क्रीग्रैब)

नई दिल्ली: केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) ने जाति-आधारित भेदभाव जैसे गाली-गलौज और हिंसा वाले दृश्यों को हटाने सहित कई संशोधन करने के बाद धड़क-2 की रिलीज़ को मंज़ूरी दे दी है.

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, यह फिल्म पहले नवंबर 2024 में रिलीज होने वाली थी, लेकिन बाद में इसे मार्च तक के लिए टाल दिया गया, लेकिन यह बदली हुई रिलीज तारीख भी रिलीज नहीं हो पाई.

तृप्ति डिमरी और सिद्धांत चतुर्वेदी अभिनीत यह फिल्म 2018 की तमिल जाति-विरोधी फिल्म ‘परियेरुम पेरुमल’ की रीमेक है और इसे ‘यू/ए 16+’ रेटिंग दी गई है.

सीबीएफसी ने हिंदी फिल्म में सोलह संशोधनों का सुझाव दिया है, जबकि मूल तमिल फिल्म चार कट के बाद रिलीज हुई थी. संशोधनों में हिंदी में एक संवाद को बदलना भी शामिल था, जो मूल रूप से था, ‘3,000 वर्षों का लंबित कार्य केवल 70 वर्षों में पूरा नहीं किया जा सकेगा.’

इसे बदलकर यह कर दिया गया कि ‘सदियों पुराने भेदभाव का लंबित मामला सिर्फ 70 वर्षों में समाप्त नहीं होगा.’

इसी तरह, जाति के नामों का इस्तेमाल गाली के तौर पर करने जैसे कि ‘चमार’ और ‘भंगी’ को भी म्यूट कर दिया गया है और उनकी जगह क्रमशः ‘जंगली’ शब्द का इस्तेमाल किया गया है. एक और पंक्ति जो कहती है, ‘धर्म का काम है’, उसे ‘पुण्य का काम है’ से बदल दिया गया है.

एक अन्य संवाद, जिसमें बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम की एक उपमा का संदर्भ दिया गया है, को भी बदला गया.

हाल ही में फिल्म फुले के ट्रेलर के आधार पर कुछ ब्राह्मण समूहों द्वारा आपत्ति जताए जाने के बाद सीबीएफसी ने निर्माताओं को ‘महार’, ‘मांग’, ‘पेशवाई’ और ‘मनु की जाति व्यवस्था’ जैसे जाति नामों के उल्लेख को बदलने का निर्देश दिया था.