नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद रामचंद्र जांगड़ा द्वारा हाल ही में पहलगाम आतंकी हमले के दौरान पीड़ित महिलाओं में ‘बहादुरी की कमी’ को लेकर टिप्पणी के चौतरफा आलोचना के बाद भी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की चुप्पी बनी हुई है.
हरियाणा राज्य महिला आयोग, जिसने अशोका विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद के खिलाफ उनके फेसबुक पोस्ट के लिए शिकायत दर्ज करने में देर नहीं लगाई, वह खामोश है और अब तक सांसद के खिलाफ कोई कार्रवाई की बात नहीं की गई है.
यह तब है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत भाजपा के नेता 22 अप्रैल को हुए पहलगाम हमले का बदला लेने के प्रतीकात्मक अर्थों से भरे भाषण दे रहे हैं.
मालूम हो कि शनिवार (24 मई) को हरियाणा से भाजपा सांसद जांगड़ा ने कहा था, ‘वहां पर जो हमारी वीरांगनाएं बहनें थीं, जिनकी मांग का सिंदूर छीन लिया गया, वीरांगना का भाव नहीं था, जोश नहीं था, जज्बा नहीं था, दिल नहीं था, इसलिए हाथ जोड़ के गोली का शिकार हो गए. लेकिन हाथ जोड़ने से कोई छोड़ता नहीं. हमारे आदमी वहां पर हाथ जोड़कर मारे गए.’
रविवार (25 मई) को जांगड़ा ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि उनका बयान केवल महिलाओं को अहिल्याबाई होल्कर के जीवन से प्रेरणा लेने के लिए प्रेरित करने के लिए था.
उन्होंने रविवार को पत्रकारों से कहा, ‘मैंने इस मामले पर अपनी स्थिति पहले ही स्पष्ट कर दी है. यह हमारी अमर वीरांगना अहिल्याबाई होल्कर जी की जयंती का कार्यक्रम था और मैं उनके जीवन के पहलुओं पर प्रकाश डाल रहा था.’
उन्होंने कहा, ‘मैंने कहा कि हमें उनके जीवन से प्रेरणा लेने की जरूरत है और उस संदर्भ में मैंने प्रेरक तरीके से यह बयान दिया कि आज के समय में हमारी बहादुर महिलाओं की तरह जीना जरूरी है. मेरे बयान के पीछे कोई और मकसद नहीं था. वे आतंकवादी थे, वे हत्या करने आए थे. मैं सिर्फ अहिल्याबाई के जीवन और उनसे प्रेरणा लेने के बारे में प्रेरक तरीके से कहना चाहता था.’
भाजपा की राष्ट्रीय प्रवक्ता शाजिया इल्मी ने द वायर से कहा, ‘जांगड़ा की ओर से स्पष्टीकरण आया है और यह स्पष्ट है कि पार्टी ऐसे बयानों का समर्थन नहीं करती है.’
‘यह पार्टी का विचार नहीं है’
जांगड़ा की टिप्पणी पर भाजपा की ओर से एकमात्र सार्वजनिक बयान केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर की ओर से आया, जिन्होंने रविवार को कहा कि जांगड़ा का बयान पार्टी का विचार नहीं है और इस मामले को यहीं खत्म कर देना चाहिए.
करनाल में एक कार्यक्रम से इतर खट्टर ने कहा, ‘यह पार्टी के बारे में नहीं है, यह उनकी निजी राय हो सकती है. उन्होंने स्पष्टीकरण भी जारी किया है. उन्होंने कहा कि उनका इरादा महिलाओं को भी वीरांगना बनने के लिए प्रोत्साहित करना था, लेकिन उनके शब्द गलत संदर्भ में थे.’
उन्होंने कहा, ‘हमारी बहनों के बारे में ऐसी टिप्पणी करना उचित नहीं है, जिन्होंने अपना सिंदूर (पति) खो दिया. यह गलत है, और जिन लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं, उनके लिए जांगड़ा जी ने निश्चित रूप से अपनी ओर से खेद व्यक्त किया है, और मेरा भी मानना है कि अब इस मामले को खत्म कर देना चाहिए.’
शीर्ष नेतृत्व खामोश
इस मामले में एक ओर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की चुप्पी जारी है, वहीं दूसरी ओर पीएम मोदी ने सोमवार (26 मई) को ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का दावा करना जारी रखा और बताया कि कैसे उन्होंने पहलगाम हमले में अपने पतियों को खोने वाली महिलाओं का बदला लिया.
गुजरात के दाहोद में बोलते हुए मोदी ने कहा कि ‘जो हमारी बेटियों का सिंदूर पोंछेंगे, उनका भी सफाया हो जाएगा’, लेकिन उन्होंने अपनी पार्टी के नेताओं के बयानों का कोई जिक्र नहीं किया.
इस बीच हरियाणा राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेणु भाटिया, जिन्होंने अशोका विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद के खिलाफ उनके युद्ध-विरोधी पोस्ट के लिए एफआईआर दर्ज करवाई थी, जिसके कारण बाद में उनकी गिरफ्तारी भी हुई थी, ने भी इस रिपोर्ट को लिखे जाने के समय तक जांगड़ा के खिलाफ कोई कार्रवाई शुरू नहीं की है.
द वायर ने हरियाणा राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेणु भाटिया से संपर्क कर यह सवाल पूछा है कि क्या आयोग ने इस मामले में कोई कार्रवाई शुरू की है या ऐसा करने की योजना है. जवाब मिलने पर इस रिपोर्ट को अपडेट किया जाएगा.
विवादित टिप्पणी करने वाले पहले नेता नहीं
मालूम हो कि जांगड़ा से पहले मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह ने भी कर्नल सोफिया कुरैशी पर की गई अपनी टिप्पणी के लिए आलोचना का सामना किया था. कर्नल कुरैशी ने विंग कमांडर व्योमिका सिंह के साथ मिलकर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान केंद्र सरकार की ब्रीफिंग में हिस्सा लिया था.
विजय शाह ने कर्नल कुरैशी को उनकी मुस्लिम पहचान का हवाला देते हुए ‘आतंकवादियों की बहन’ कहा था, वे अभी भी अपने पद पर बने हुए हैं. अदालत द्वारा उनके खिलाफ एफआईआर की जांच के आदेश देने और उनकी माफी को खारिज करने के बावजूद पार्टी की ओर से अभी तक उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है.
इस संबंद में शाजिया इल्मी ने द वायर से कहा, ‘कुछ नेताओं द्वारा दिए गए ये गैर-जिम्मेदाराना बयान पार्टी के विचार नहीं हैं, चाहे वह विजय शाह हों या जांगड़ा. पार्टी महिलाओं का सम्मान करती है, जैसा कि ऑपरेशन सिंदूर की ब्रीफिंग के दौरान भी भारत सरकार की कार्रवाइयों से देखा गया था, जिसका नेतृत्व दो महिला अधिकारियों ने किया था.’
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