मणिपुर: मेईतेई संगठन ने बंद वापस लिया, प्रदर्शन के दौरान फायरिंग के आरोप में एक गिरफ़्तार

मेईतेई संगठन अरमबाई तेंग्गोल ने कथित तौर पर संगठन के आंदोलन के कारण 'जनता को हो रही परेशानी' को देखते हुए अपना 10 दिवसीय पूर्ण बंद वापस ले लिया है. वहीं, प्रदर्शन के दौरान सुरक्षाकर्मियों पर गोलीबारी के आरोप में संगठन का सदस्य गिरफ्तार हुआ है.

रविवार, 8 जून को मणिपुर के इंफाल ईस्ट जिले में एक बस का जला हुआ ढांचा देखा गया, जिसे केंद्रीय बलों के परिवहन में इस्तेमाल किया जाता था. इस बस को उस भीड़ ने आग के हवाले किया, जो मेईतेई संगठन अरामबाई तेंग्गोल के एक नेता की गिरफ्तारी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहा था. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: मेईतेई संगठन अरमबाई तेंग्गोल (एटी) ने कथित तौर पर संगठन के आंदोलन के कारण जनता को हो रही परेशानी को देखते हुए मंगलवार को तत्काल प्रभाव से अपना 10 दिवसीय पूर्ण बंद वापस ले लिया है. हालांकि, संगठन ने कहा कि वह संगठन के नेता की रिहाई की अपनी मांग को जारी रखेगा, जिसे सीबीआई ने गिरफ्तार किया है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस घटनाक्रम के तुरंत बाद राज्य सरकार ने एटी नेता असेम कानन सिंह की गिरफ्तारी पर व्यापक विरोध के बीच घाटी के जिलों में लगाए गए निषेधाज्ञा आदेश में आंशिक रूप से ढील दी.

आधिकारिक आदेश के अनुसार, सुबह 5 बजे से शाम 5 बजे तक लोगों को अपने घर से बाहर निकलने की अनुमति है, जबकि शाम 5 बजे से सुबह 5 बजे तक निषेधाज्ञा लागू रहेगी. कानून प्रवर्तन में लगी सरकारी एजेंसियों-आपातकालीन सेवाओं, आवश्यक सेवाओं और बैंकिंग संस्थानों को निषेधाज्ञा के दायरे से बाहर रखा गया है.

अरमबाई तेंग्गोल के स्वयंभू पीआरओ रॉबिन मंगांग ने संवाददाताओं को बताया कि संगठन ने विभिन्न कारणों को ध्यान में रखते हुए अपना आंदोलन वापस लेने का फैसला किया है.

मंगांग ने कहा, ‘हमने असेम कानन सिंह की गिरफ्तारी के विरोध में बंद लगाया था. लेकिन आंदोलन योजना के अनुसार नहीं चल रहा था. कुछ निहित स्वार्थी लोग इसका फायदा उठा रहे हैं और संगठन की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं. इसके अलावा, संगठन ने नकारात्मक प्रभावों को भी स्वीकार किया है, जैसे कि सामानों की बढ़ती कीमतें, यात्रियों का उत्पीड़न आदि.’

साथ ही, पीआरओ ने कहा कि संगठन लोकतांत्रिक तरीकों का उपयोग करते हुए संगठन के नेता की रिहाई की मांग को जारी रखेगा.

मंगंग ने दावा किया कि अरमबाई तेंग्गोल एक सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन है जिसका एकमात्र उद्देश्य राज्य के इंडिजिनस लोगों की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान की रक्षा और संरक्षण करना है.

उन्होंने कहा, ‘दुर्भाग्य से एटी को अवैध ‘कुकी आतंकवादियों’ के हमले से मातृभूमि की रक्षा के लिए हथियार उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा.’

सुरक्षाकर्मियों पर गोलीबारी के आरोप में मेईतेई संगठन का सदस्य गिरफ्तार, 19 अन्य हिरासत में

मणिपुर में हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान मेईतेई संगठन अरमबाई तेंग्गोल के एक सदस्य को सुरक्षाकर्मियों पर कथित तौर पर गोलीबारी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है.

समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इंफाल में प्रदर्शनों के दौरान हिंसा में कथित तौर पर शामिल होने के आरोप में 19 अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया गया है.

अधिकारी ने बताया कि अरमबाई तेंग्गोल के सदस्य को मंगलवार को गिरफ्तार किया गया है. उन पर आरोप है कि उन्होंने 9 जून को इंफाल पश्चिम जिले के तेरा सापम इलाके में सड़क जाम हटाने की कोशिश कर रहे सुरक्षाकर्मियों पर गोली चलाई थी.

पुलिस ने कहा, ‘हमलावर अरमबाई तेंग्गोल का कार्यकर्ता – राज उर्फ ​​बोइनाओ पंगेइजम को मणिपुर पुलिस ने हथियार के साथ गिरफ्तार कर लिया है.’ उन्होंने कहा कि उन्हें मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया और आठ दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है.

उन्होंने बताया कि पुलिस ने इंफाल पूर्वी जिले में सड़क हिंसा में शामिल होने के आरोप में 19 लोगों को हिरासत में भी लिया है.

अधिकारी ने कहा, ‘वे सड़कें अवरुद्ध करते, यात्रियों को परेशान करते और सार्वजनिक अशांति पैदा करते पाए गए, ज्यादातर वे नशे की हालत में थे और उनके कार्यों से कानून का पालन करने वाले नागरिकों को असुविधा हुई और सार्वजनिक व्यवस्था बाधित हुई.’

ज्ञात हो कि मणिपुर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, जहां प्रदर्शनकारियों ने निषेधाज्ञा का उल्लंघन किया और इंफाल घाटी के कई जिलों में सुरक्षा बलों के साथ झड़पें हुईं. प्रदर्शनकारियों ने गिरफ्तार किए गए अरमबाई तेंग्गोल नेता कानन सिंह और चार अन्य की बिना शर्त रिहाई की मांग की.

मालूम हो कि मई 2023 से मेईतेई और कुकी-ज़ो समुदायों के बीच जातीय हिंसा में 260 से अधिक लोग मारे गए हैं और हजारों लोग बेघर हो गए हैं.

मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफा देने के बाद केंद्र ने 13 फरवरी को पूर्वोत्तर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया था. राज्य विधानसभा, जिसका कार्यकाल 2027 तक है, को निलंबित कर दिया गया है.