आंध्र प्रदेश में टॉक शो के पैनलिस्ट की टिप्पणी को लेकर वरिष्ठ पत्रकार गिरफ़्तार, राजनीतिक बवाल

साक्षी टीवी के वरिष्ठ पत्रकार कोम्मिनेनी श्रीनिवास राव को आंध्र प्रदेश पुलिस ने 9 जून को उनके हैदराबाद स्थित घर से गिरफ़्तार किया है. उनके द्वारा संचालित लाइव टॉक शो में एक पैनलिस्ट ने कथित तौर पर 'आपत्तिजनक और दुर्भावनापूर्ण' टिप्पणियां कीं थीं. इस घटना के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं.

पुलिस ने पत्रकार कोमिनेनी श्रीनिवास राव को गिरफ्तार किया. (फोटो: यूट्यूब/साक्षी टीवी)

नई दिल्ली: आंध्र प्रदेश पुलिस द्वारा सोमवार (9 जून) को साक्षी टीवी के वरिष्ठ पत्रकार कोम्मिनेनी श्रीनिवास राव को उनके हैदराबाद स्थित घर से गिरफ्तार कर गुंटूर भेज दिया गया, जिससे राज्य में गहरे ध्रुवीकृत तथा अक्सर शत्रुतापूर्ण मीडिया और राजनीतिक माहौल में बड़ा हंगामा मच गया है.

यह गिरफ्तारी अमरावती राजधानी क्षेत्र के थुल्लूर मंडल के रायापुडी गांव के अमरावती कैपिटल फार्मर्स दलित ज्वाइंट एक्शन कमेटी (जेएसी) के नेता कम्बमपति सिरीशा द्वारा पुलिस में की गई शिकायत पर आधारित थी, जो 6 जून 2025 को साक्षी टीवी पर राव द्वारा संचालित एक लाइव टॉक शो – कथित तौर पर ‘केएसआर लाइव शो’ (अब हटा लिया गया) – को लेकर थी.

शो में एक पैनलिस्ट पत्रकार वीवीआर कृष्णम राजू, ने कथित तौर पर ‘आपत्तिजनक और दुर्भावनापूर्ण’ टिप्पणियां कीं. सिरीशा की शिकायत में ऐसी टिप्पणियों का हवाला दिया गया है जिसमें कथित तौर पर अमरावती को ‘देवताओं की राजधानी’ नहीं बल्कि ‘वेश्याओं की राजधानी’ बताया गया है जहां केवल एड्स के मरीज़ रहते हैं.

उन्होंने तर्क दिया कि कथित तौर पर ‘साक्षी प्रबंधन के स्पष्ट प्रोत्साहन’ से दिए गए इन बयानों से अमरावती की महिलाओं, विशेषकर दलित महिलाओं के आत्मसम्मान को गहरी ठेस पहुंची है.

पुलिस ने श्रीनिवास राव, कृष्णम राजू (फिलहाल फरार) और साक्षी टीवी प्रबंधन पर कई कानूनों के तहत आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज की है. इनमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(1)(यू) शामिल है,  सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (जैसा कि 2008 में संशोधित किया गया है) की धारा 67, इलेक्ट्रॉनिक रूप से आपत्तिजनक सामग्री प्रकाशित या शेयर करने के लिए और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराएं, जिनमें धारा 79 (महिला की शील भंग करने के इरादे से की गई हरकतें), धारा 196 (समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) और बीएनएस 353(2), 299, 356(2), और 61(1) के तहत अन्य आरोप शामिल हैं.

प्रसारण के बाद लेकिन गिरफ़्तारी से पहले पैनलिस्ट वीवीआर कृष्णम राजू ने कथित तौर पर सार्वजनिक रूप से माफ़ी मांगी थी. मॉडरेटर श्रीनिवास राव ने भी स्पष्टीकरण जारी किया था. कुछ ख़बरों में कहा गया है कि उन्होंने स्पष्ट किया कि राजू की टिप्पणी अमरावती के कुछ हिस्सों में कथित यौनकर्मियों के बारे में थी, न कि पूरी राजधानी के बारे में.

इसके बाद मंगलवार (10 जून) को अदालत ने राव को 14 दिन की रिमांड पर भेज दिया और एससी/एसटी अधिनियम के तहत दर्ज आरोपों को यह कहते हुए हटा दिया कि आरोपों में अभियोजन के लिए आधार नहीं है.

मीडिया-राजनीतिक संबंधों में मजबूती

इस घटना की गंभीरता को आंध्र प्रदेश के मीडिया स्वामित्व और राजनीतिक गठबंधन के परिदृश्य के संदर्भ में सबसे अच्छी तरह से समझा जा सकता है. साक्षी मीडिया समूह – जो साक्षी टीवी और अखबार का मालिक है – का नेतृत्व वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी की पत्नी वाईएस भारती करती हैं.

जगन मोहन रेड्डी के पिता स्वर्गीय वाईएस राजशेखर रेड्डी ने मुख्यमंत्री रहते हुए साक्षी की स्थापना की थी.

इसके विपरीत, ईनाडु समूह – जो ईनाडु अखबार और ईटीवी नेटवर्क का मालिक है – रामोजी राव द्वारा स्थापित; और एबीएन आंध्र ज्योति – जो एबीएन टीवी, आंध्र ज्योति अखबार का मालिक है – जिसका नेतृत्व वेमुरी राधाकृष्ण करते हैं, को व्यापक रूप से वर्तमान मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) का समर्थन करने के रूप में देखा जाता है.

राव, राधाकृष्ण और नायडू सभी कम्मा समुदाय से हैं, जिसे अगड़ी जाति माना जाता है. अन्य चैनल जैसे टीवी5, जिसके मालिक बोलिनेनी राजगोपाल नायडू हैं, जो कम्मा समुदाय से हैं, वर्तमान में टीटीडी के अध्यक्ष हैं तथा चंद्रबाबू नायडू के करीबी सहयोगी माने जाते हैं, को भी इसी प्रकार देखा जाता है.

इस पक्षपातपूर्ण विभाजन के कारण अक्सर मीडिया घराने एक-दूसरे पर ‘फर्जी खबरें’ फैलाने का आरोप लगाते हैं. ऐतिहासिक रूप से ईनाडु ने एनटीआर और बाद में चंद्रबाबू नायडू के उदय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जबकि साक्षी जगन मोहन रेड्डी की राजनीतिक यात्रा के लिए महत्वपूर्ण रहा.

इस प्रतिद्वंद्विता में मुकदमे, मीडिया पर प्रतिबंध और यहां तक ​​कि पत्रकारों और मीडिया कार्यालयों पर हमले भी शामिल हैं.

वाईएसआरसीपी ने गिरफ्तारी को प्रतिशोध बताया

जगन मोहन रेड्डी और पार्टी के राज्य समन्वयक सज्जला रामकृष्ण रेड्डी सहित वाईएसआरसीपी नेताओं ने गिरफ्तारी की कड़ी निंदा करते हुए इसे ‘राजनीतिक प्रतिशोध’, ‘प्रेस को चुप कराने’ और ध्यान भटकाने का प्रयास बताया. उन्होंने तर्क दिया कि मॉडरेटर के रूप में श्रीनिवास राव पैनलिस्ट की टिप्पणी के लिए जिम्मेदार नहीं थे, उन्होंने कथित तौर पर राजू को चेतावनी दी थी और विवादास्पद चर्चा छोटी थी.

उन्होंने कहा कि साक्षी टीवी ने राजू की राय को खारिज कर दिया और दोनों ने टीडीपी-झुकाव वाले मीडिया द्वारा कथित तौर पर इस मुद्दे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए जाने से पहले स्पष्टीकरण या माफी की पेशकश की थी.

वाईएसआरसीपी नेताओं ने दावा किया कि गंभीर आरोपों का इस्तेमाल जमानत से इनकार करने का प्रयास था. साक्षी कार्यालयों पर हमले, जैसे कि रेनीगुंटा में एक हमला, जिसकी वाईएसआरसीपी सांसद गुरुमूर्ति ने निंदा की थी – को एक योजनाबद्ध अभियान का हिस्सा बताया.

10 जून को जगन मोहन रेड्डी ने चंद्रबाबू नायडू पर पाखंडी होने का आरोप लगाया. उन्होंने नायडू और उनके रिश्तेदारों द्वारा महिलाओं के बारे में की गई कथित विवादास्पद टिप्पणियों का उल्लेख किया और बलात्कार और हिंसा के आंकड़ों का हवाला देते हुए इस विवाद को सरकार की विफलताओं पर पर्दा बताया.

सत्तारूढ़ गठबंधन ने कार्रवाई का बचाव किया, टिप्पणियों की निंदा की

टीडीपी, उसके गठबंधन सहयोगी जन सेना (उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण के नेतृत्व में) और भाजपा के नेताओं ने राज्य निकायों के प्रमुखों के साथ पुलिस कार्रवाई का बचाव किया. मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने टिप्पणियों की कड़ी निंदा करते हुए उन्हें अश्लील और अस्वीकार्य बताया.

पवन कल्याण ने इसे जगन मोहन रेड्डी और साक्षी की ‘सुनियोजित साजिश’ बताया. राज्य के मानव संसाधन विकास एवं आईटी मंत्री और मुख्यमंत्री नायडू के बेटे नारा लोकेश ने प्रदर्शनकारियों के बारे में सज्जला रामकृष्ण रेड्डी की कथित टिप्पणी की ओर इशारा करते हुए महिलाओं के प्रति वाईएसआरसीपी के रवैये पर सवाल उठाया.

द वायर से बात करते हुए टीडीपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता दीपक रेड्डी ने भी कई बिंदुओं पर बात की. जब उनसे पूछा गया कि जब एक पैनलिस्ट ने ये टिप्पणियां की थीं, तो एंकर को क्यों गिरफ्तार किया गया, तो रेड्डी ने कहा, ‘साक्षी हमेशा से वाईएसआरसीपी का प्रचार मुखपत्र रहा है. हम उन्हें पत्रकार नहीं मानते. हमारा मानना ​​है कि यह पहले से ही योजनाबद्ध और संगठित था, न कि आकस्मिक.’

बदले की राजनीति और साक्षी को निशाना बनाने के बहाने के आरोपों पर उन्होंने कहा, ‘जांच का दायरा बढ़ेगा क्योंकि साक्षी ने दो साल से अपना लाइसेंस रिन्यू नहीं किया है. भारत सरकार ने लाइसेंस रिन्यू नहीं किया और इससे कई सवाल खड़े होते हैं.’

टीडीपी-झुकाव वाले चैनलों के खिलाफ शिकायतों पर कार्रवाई न करने के विपक्ष के दावों के बारे में रेड्डी ने दावा किया, ‘हमें ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली है. अगर वे कोई शिकायत देते हैं, तो हम सख्त, गैर-भेदभावपूर्ण कार्रवाई करेंगे.’

इस बीच, आंध्र प्रदेश महिला आयोग की अध्यक्ष रायपति शैलजा ने साक्षी टीवी और इसमें शामिल लोगों को नोटिस जारी करने की घोषणा की. उन्होंने पुलिस की कार्रवाई की सराहना की और पूछा कि राजू क्यों फरार है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)