कुकी-जो विद्रोही समूह ने मणिपुर के मेईतेई क्षेत्रों के सात शिविरों को बंद करने पर सहमति जताई: रिपोर्ट

बताया गया है कि कुकी-जो विद्रोही समूहों और गृह मंत्रालय के अधिकारियों के बीच 16 जून को हुई बैठक में मणिपुर में समूहों द्वारा चलाए जा रहे कुछ शिविरों को स्थानांतरित करने और बंद करने पर सहमति बनी, जो तलहटी में मेईतेई आबादी वाले क्षेत्रों के करीब स्थित हैं.

मणिपुर पुलिस का प्रतीकात्मक फोटो. (फोटो साभार: एक्स/@manipur_police)

नई दिल्ली: कुकी-जो विद्रोही समूहों और गृह मंत्रालय (एमएचए) के अधिकारियों ने सोमवार (16 जून) को एक बैठक में मणिपुर में विद्रोही समूहों द्वारा चलाए जा रहे कुछ शिविरों को स्थानांतरित करने और बंद करने पर सहमति जताई है.

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि कुकी-ज़ो मिलिटेंट समूहों और गृह मंत्रालय (एमएचए) के अधिकारियों के बीच सोमवार (16 जून) को हुई बैठक में मणिपुर में समूहों द्वारा चलाए जा रहे कुछ शिविरों को स्थानांतरित करने और बंद करने पर सहमति बनी.

अधिकारी ने बताया कि गृह मंत्रालय ने लूटे गए हथियारों की बरामदगी और राष्ट्रीय राजमार्गों को खोलने पर जोर दिया.

सुरक्षा एजेंसियों ने 14 मौजूदा शिविरों में से सात को बंद करने का प्रस्ताव दिया है, जो तलहटी में मेईतेई आबादी वाले क्षेत्रों के करीब स्थित हैं.

मालूम हो कि सरकार के साथ ऑपरेशन निलंबन (एसओओ) समझौते में शामिल उग्रवादी समूहों ने दो वर्ष के अंतराल के बाद बीते 9 जून को गृह मंत्रालय के साथ वार्ता पुनः शुरू की.

अधिकारी ने कहा कि कुकी-ज़ो समूहों के साथ एसओओ समझौते के विस्तार के लिए कोई समय सीमा तय नहीं की गई है क्योंकि यह बुनियादी नियमों और अन्य शर्तों के पालन पर निर्भर है. यह समझौता 29 फरवरी, 2024 को अप्रभावी हो गया, जब मणिपुर सरकार त्रिपक्षीय समझौते से बाहर निकल गई, गृह मंत्रालय और एसओओ समूह अन्य दो हस्ताक्षरकर्ता थे.

3 मई, 2023 को राज्य में कुकी-ज़ो और मेईतेई समुदायों के बीच जातीय हिंसा भड़कने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह और कई मेईतेई समूहों ने सशस्त्र विद्रोही समूहों पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है.

सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘सोमवार को जमीनी नियमों पर चर्चा हुई और कुछ महत्वपूर्ण बदलावों पर सहमति बनी, जिसमें शिविरों को बंद करना भी शामिल है. राजमार्गों को पूरी तरह चालू करने पर भी जोर दिया गया.’

गौरतलब है राष्ट्रीय राजमार्ग-2 और 37, जो चारों ओर से घिरी इंफाल घाटी को क्रमशः नगालैंड और असम से जोड़ते हैं, तथा आवश्यक वस्तुओं और अन्य वस्तुओं की आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण हैं, कुकी-ज़ो बसे हुए क्षेत्रों से होकर गुजरते हैं.

अधिकारी ने बताया कि अगले दौर की वार्ता 15 दिन बाद होगी.

बदली शर्तें

एसओओ के एक प्रतिनिधि ने कहा कि चूंकि 3 मई, 2023 से पहले की मांगें बदल गई हैं, इसलिए एसओओ समझौते के आधारभूत नियमों पर फिर से विचार करने की आवश्यकता है.

प्रतिनिधि ने कहा, ‘हमने गृह मंत्रालय को कुछ योजनाएं भी प्रस्तावित की हैं, जिनमें सुरक्षा बल शामिल हैं. शिविरों को बंद करने पर चर्चा चल रही है. जब हमने 2008 में समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, तो बुनियादी नियमों को अंतिम रूप देने के लिए एक अभ्यास किया गया था, वही प्रक्रिया अब भी अपनाई जा रही है.’

यूनाइटेड पीपुल्स फ्रंट (यूपीएफ) और कुकी नेशनल ऑर्गनाइजेशन (केएनओ) से मिलकर बने एसओओ समूहों के लगभग 2,200 कैडर मणिपुर के पहाड़ी जिलों में 14 शिविरों में रहते हैं. कैडर 6,000 रुपये प्रति माह के वजीफे के हकदार हैं, जो हिंसा भड़कने के बाद से नहीं दिया गया है.

1990 के दशक में कुकी-नगा संघर्ष के बाद एसओओ समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए थे. विद्रोही समूहों ने कुकी-ज़ो लोगों के लिए एक स्वतंत्र भूमि की मांग की थी.

इससे पहले समूहों ने मणिपुर में कुकी-ज़ो परिषदों के लिए स्वायत्तता की मांग की थी. मई 2023 के बाद वे कुकी-ज़ो क्षेत्रों के लिए विधानसभा के साथ एक केंद्र शासित प्रदेश की मांग कर रहे हैं.