नई दिल्ली: 12 जून को अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 के दुर्घटनाग्रस्त होने और 241 यात्रियों की मौत के बाद, कंपनी के ड्रीमलाइनर विमानों की उड़ानों पर संकट लगातार बढ़ता जा रहा है.
मंगलवार 17 जून को ही एयर इंडिया की 13 ड्रीमलाइनर उड़ानों को तकनीकी या संचालन संबंधी कारणों से रद्द करना पड़ा. इनमें वह अहमदाबाद-लंदन रूट भी शामिल था जिसे दुर्घटना के बाद नए फ्लाइट नंबर (AI-159) के साथ बहाल किया गया था.
इस फ्लाइट को दोपहर 1:10 बजे रवाना होना था, लेकिन विमान की अनुपलब्धता के कारण उसे 3 बजे तक टालने के बाद अंततः रद्द कर दिया गया. एयर इंडिया के अनुसार, जिस विमान को भेजना था वह लंदन से देरी से लौटा. एयरस्पेस प्रतिबंध और अतिरिक्त सुरक्षा जांचों ने विमान के रोटेशन को और बाधित किया है.
भारतीय नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) के मुताबिक, एयर इंडिया ने 12 जून से अब तक अपने 66 ड्रीमलाइनर विमानों की उड़ानें रद्द की हैं. कुल 83 वाइड-बॉडी फ्लाइट रद्द हुईं, जिनमें अधिकांश ड्रीमलाइनर थीं. अकेले 18 जून को 13 ड्रीमलाइनर फ्लाइट्स रद्द हुईं.
डीजीसीए और एयर इंडिया के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच मंगलवार को एक उच्च-स्तरीय बैठक हुई, जिसमें क्रैश के बाद सुरक्षा जांचों को तेज करने के निर्देश दिए गए. भारतीय, अमेरिकी और ब्रिटिश जांच एजेंसियों के साथ-साथ बोइंग और इंजन निर्माता GE की टीमें अहमदाबाद में मौजूद हैं.
डीजीसीए के अनुसार, एयर इंडिया के ड्रीमलाइनल बेड़े में शामिल 33 विमानों में से 24 विमानों की जांच पूरी हो चुकी है, दो और मंगलवार को पूरी होनी थीं और एक की बुधवार को. शेष 6 विमानों में से दो दिल्ली में ग्राउंडेड हैं, जिनकी जांच सेवा-योग्यता घोषित होने के बाद होगी.
रद्द की गई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में दिल्ली-दुबई (AI-915), दिल्ली-वियना (AI-153), दिल्ली-पेरिस (AI-143), अहमदाबाद-लंदन (AI-159), बेंगलुरु-लंदन (AI-133) और लंदन-अमृतसर (AI-170) शामिल हैं. दिल्ली-पेरिस फ्लाइट तो प्री-फ्लाइट चेक के दौरान सामने आई खराबी और पेरिस एयरपोर्ट के नाइट ऑपरेशन प्रतिबंधों की वजह से कैंसिल करनी पड़ी.
इसके अलावा मौसम और एयरस्पेस बंद होने की वजह से दिल्ली-मुंबई, दिल्ली-हैदराबाद, दिल्ली-इंदौर और दिल्ली-तिरुवनंतपुरम जैसी घरेलू उड़ानें भी रद्द हुईं.
‘कोई बड़ी सुरक्षा चूक नहीं’
डीजीसीए ने कहा कि उनकी हालिया निरीक्षण रिपोर्ट में ड्रीमलाइनर बेड़े में ‘कोई बड़ी सुरक्षा चूक नहीं’ मिली, लेकिन फ्लाइट्स का बार-बार रद्द होना और AOG (एयरक्राफ्ट ऑन ग्राउंड) स्थिति में पड़े विमानों की संख्या ने एयर इंडिया की संचालन व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं.
डीजीसीए की सिफारिशें और एयर इंडिया को निर्देश
डीजीसीए ने रियल-टाइम डिफेक्ट रिपोर्टिंग सिस्टम लागू करने का सुझाव दिया है, ताकि सुरक्षा विभागों को समय पर जानकारी मिल सके. वहीं एयर इंडिया को इंजीनियरिंग, ऑपरेशन और ग्राउंड हैंडलिंग यूनिट्स के बीच तालमेल बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं. साथ ही स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया, ताकि यात्रियों को होने वाली परेशानी कम हो.
पहले से जारी है तकनीकी समस्याओं का सिलसिला
2024 में संसद में दिए आंकड़ों के अनुसार, एयर इंडिया में तकनीकी या संचालन कारणों से औसतन रोज़ 4 उड़ानें रद्द होती रही हैं. यानी हादसे से पहले भी तकनीकी समस्याएं कोई नई बात नहीं थीं.
मुआवज़ा और व्यवस्था
विमानों के लगातार रद्द होनी से यात्रियों को होने वाली असुविधा को ध्यान में रखते हुए एयर इंडिया ने कहा है कि वह यात्रियों को होटल में ठहराने, पूरा पैसा लौटाने या वैकल्पिक बुकिंग की पेशकश कर रही है.
