नई दिल्ली: आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू ज़िले स्थित मारेडुमिल्ली के जंगलों में बुधवार (18 जून) की सुबह एंटी-नक्सल फोर्स ‘ग्रेहाउंड्स’ के साथ हुई मुठभेड़ में माओवादियों की केंद्रीय समिति के एक सदस्य समेत तीन माओवादी मारे गए.
अल्लूरी सीताराम राजू ज़िले के पुलिस अधीक्षक अमित बारदार ने बताया, ‘मौके से एक एके-47 राइफल बरामद हुई है, जो दर्शाता है कि मारे गए लोगों में कोई वरिष्ठ नेता है. हमे संदेह है कि वह गजरला रवि उर्फ उदय हो सकता है, जो सेंट्रल कमेटी का सदस्य था. मुठभेड़ में महिला माओवादी नेता अरुणा उर्फ वेंकटा और एक अज्ञात पुरुष माओवादी भी मारे गए हैं.’
पुलिस का कहना है कि माओवादी छत्तीसगढ़ से राज्य में दाखिल हुए थे और यह मुठभेड़ खुफिया जानकारी के आधार पर चलाए गए तलाशी अभियान के दौरान हुई.
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल गजरला रवि उर्फ गणेश को माओवादी संगठन का प्रमुख सैन्य रणनीतिकार माना जाता था. वह तेलंगाना के जयशंकर भूपालपल्ली ज़िले के चिट्याला गांव के रहने वाले थे और मलकानगिरी व दंडकारण्य क्षेत्रों में सक्रिय थे. गजरला पहले आंध्र-ओडिशा सीमा स्पेशल जोनल कमेटी का सचिव भी रह चुके थे.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, उनके पांच भाइयों में से तीन बड़े भाई भी माओवादी संगठन में शामिल हो चुके थे. साल 2004 में माओवादियों द्वारा गजरला को वाईएस राजशेखर रेड्डी सरकार के साथ शांति वार्ता के लिए भेजा गया था.
वहीं, अरुणा वरिष्ठ माओवादी नेता चलपति उर्फ अप्पा राव की पत्नी थीं, जिन्हें पहले ही एक मुठभेड़ में मारा जा चुका है.
इस बीच भाकपा (माओवादी) ने छत्तीसगढ़ में चल रहे ऑपरेशन कगार के विरोध में 20 जून को आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में बंद की घोषणा की है. संगठन के राज्य समिति के प्रवक्ता जगन ने एक बयान में कहा कि ‘जनवरी 2024 से अब तक ऑपरेशन कगार के तहत 550 से अधिक माओवादी, जिनमें कई वरिष्ठ नेता शामिल हैं, मारे जा चुके हैं.’
बंद के मद्देनज़र आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है.
केंद्र सरकार ने मार्च 2026 तक माओवादियों का पूरी तरह सफाया करने का लक्ष्य तय किया है, जिसके तहत ऑपरेशन कगार चलाया जा रहा है.
