नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में स्थित इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान में 5 जून को माओवादियों और सुरक्षाबलों के बीच हुई मुठभेड़ में मारे गए सात लोगों में से एक 38 वर्षीय आदिवासी व्यक्ति महेश कुटियम थे, जो स्थानीय गांव के एक सरकारी स्कूल में एक साल से अधिक समय से रसोइए के रूप में काम कर रहे थे.
पुलिस का दावा है कि महेश कुटियम समेत मारे गए सभी सात लोग माओवादी थे. पुलिस के मुताबिक, इरपागुट्टा गांव का रहने वाला महेश, स्कूल में रसोइया होने के साथ-साथ सीपीआई (माओवादी) की नेशनल पार्क एरिया कमेटी का सदस्य भी था और उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित था.
हालांकि महेश के परिवार का दावा है कि उनका माओवादियों से कोई लेना-देना नहीं था और वह सिर्फ स्कूल में खाना बनाते थे.
महेश की पत्नी सुमित्रा कुटियम ने हिंदुस्तान टाइम्स से कहा, ‘मेरे पति मवेशी चराने जंगल गए थे. शाम तक वे घर नहीं लौटे. बाद में गांववालों से पता चला कि उन्हें सुरक्षाबल ले गए हैं और अगले दिन उन्हें मुठभेड़ में माओवादी बताकर मार दिया गया.’
उन्होंने कहा, ‘वो निर्दोष थे. हम गरीब लोग हैं, लेकिन कानून का पालन करते हैं. मेरे बच्चे (सात बच्चे हैं, जिनमें से चार स्कूल जाते हैं) बार-बार पूछते हैं कि पापा कब आएंगे. मुझे समझ नहीं आ रहा कि अब मैं उन्हें अकेले कैसे पालूंगी.’
एक अन्य ग्रामीण इर्मा वेलाड़ी ने अख़बार को बताया, ‘हमने सुरक्षाकर्मियों को उन्हें जंगल के पास से ले जाते देखा. वे निहत्थे थे और अपने मवेशी को खोज रहे थे. फिर हमें खबर मिली कि उन्हें माओवादी कहकर मार दिया गया. यह गलत है.’
जिस स्थानीय सरकारी स्कूल में रमेश काम करते थे, वहां के प्रधानाध्यापक रमेश उप्पल ने उनकी पहचान और स्कूल में उनकी भूमिका की पुष्टि की है.
उप्पल ने कहा, ‘महेश 2023 में मिड-डे मील रसोइये के तौर पर हमारे स्कूल से जुड़े. वह नियमित रूप से काम करता था और उसे 1,200 प्रति माह वेतन मिलता था. वह इस साल अप्रैल में आखिरी बार स्कूल में उपस्थित था.’
हालांकि, बस्तर पुलिस ने रविवार (22 जून) को एक बयान में कहा कि महेश और अन्य छह की मौत बीजापुर जिले के नेशनल पार्क क्षेत्र में चलाए गए एक माओवादी विरोधी अभियान के दौरान हुई.
बयान के मुताबिक, यह कार्रवाई खुफिया जानकारी के आधार पर की गई और मुठभेड़ के बाद सात शव बरामद हुए थे.
बीजापुर कलेक्टर संबित मिश्रा ने कहा कि घटना की निष्पक्ष मजिस्ट्रियल जांच कराई जा रही है.
10 जून को सुरक्षाबलों ने बताया था कि उन्होंने इंद्रावती नेशनल पार्क के घने जंगलों में एक नक्सल विरोधी अभियान के दौरान वरिष्ठ नक्सल नेता सुधाकर समेत सात माओवादियों को मार गिराया.
पुलिस के अनुसार, बाद में जिन शवों की पहचान हुई, उनमें माडेड ब्लॉक के दूरस्थ गांव के रहने वाले 35 वर्षीय महेश कुटियम का शव भी शामिल था.
बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी. द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में भी यह कहा गया कि महेश कुटियम स्कूल में रसोइया था, लेकिन साथ ही माओवादी भी था.
बयान में कहा गया, ‘जांच के दौरान यह पुष्टि हुई कि महेश कुटियम प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) संगठन का सक्रिय सदस्य था, जो नेशनल पार्क एरिया डिवीजन में काम कर रहा था. उसका इस संगठन से स्पष्ट संबंध था. यह भी सामने आया है कि वह इरपागुट्टा गांव के प्राथमिक विद्यालय में सहायक रसोइया के तौर पर कार्यरत था. उसकी नियुक्ति ग्राम स्तरीय स्कूल प्रबंधन समिति द्वारा की गई थी और मार्च 2025 तक उसे वेतन दिया जा रहा था. यह भी जांच का विषय है कि महेश कुटियम की केंद्रीय समिति सदस्य गौतम और राज्य समिति सदस्य भास्कर जैसे वरिष्ठ माओवादी नेताओं से कैसे और कब मुलाकात हुई. मामले की सभी पहलुओं की गहन, निष्पक्ष और पेशेवर जांच की जा रही है.’
