जम्मू: पुलिस ने चोरी के आरोपी कश्मीरी को निर्वस्त्र कर सरकारी गाड़ी पर घुमाया, जांच के आदेश

बीते 24 जून को जम्मू पुलिस ने चोरी के आरोप में एक कश्मीरी व्यक्ति के साथ कथित तौर पर मारपीट की, उनके कपड़े उतरवाए और हाथ बांधकर सरकारी वाहन पर परेड कराई. सोशल मीडिया पर घटना का वीडियो वायरल होने के बाद इसकी जांच के लिए एक समिति गठित की गई है.

एक वीडियो स्क्रीनशॉट जिसमें जम्मू पुलिस की मौजूदगी में कश्मीरी व्यक्ति को गाड़ी के आगे बिठाया गया है.

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के अधिकारियों ने चोरी के आरोपी एक कश्मीरी व्यक्ति के साथ 24 जून को शीतकालीन राजधानी के व्यस्त बाजार में जम्मू पुलिस द्वारा कथित तौर पर मारपीट करने, उसके कपड़े उतरवाने और सरकारी वाहन में परेड कराने की घटना की जांच के आदेश दिए हैं.

इस वर्ष जम्मू में ‘भीड़ द्वारा न्याय’ की यह दूसरी घटना है, जिसमें पुलिस पर कदाचार के आरोप लगे हैं और यह घटना 2017 में एक सेना मेजर से जुड़ी घटना से मिलती जुलती है, जिसमें एक कश्मीरी व्यक्ति को सेना के वाहन से बांधकर बडगाम जिले में घुमाया गया था.

ताजा घटना में सोशल मीडिया पर कई बार शेयर किए गए एक वीडियो में दो वर्दीधारी पुलिसकर्मी बख्शी नगर पुलिस स्टेशन के थाना प्रभारी (एसएचओ) आजाद मन्हास की मौजूदगी में जम्मू-कश्मीर पुलिस के वाहन के पीछे से एक व्यक्ति, जिसके हाथ उसकी पीठ के पीछे बंधे हुए हैं, को खींचते हुए दिखते हैं. जब दोनों पुलिसकर्मी संदिग्ध को घसीटते हुए गाड़ी के बोनट पर ले जाते हुए दिखाई देते हैं, तो मौके पर मौजूद कुछ पत्रकार अपने माइक उस परेशान व्यक्ति की ओर घुमाते हैं, जो खुद को श्रीनगर का निवासी बताता है.

वीडियो में मन्हास को संदिग्ध व्यक्ति के चेहरे पर छड़ी से प्रहार करते हुए और उसे इतनी जोर से धक्का देते हुए दिखाया गया है कि वह बोनट पर सीधा बैठ जाए और उसका चेहरा दिखाई दे. पुलिस वाहन पर लगे स्पीकर पर घोषणा की जाती है कि संदिग्ध व्यक्ति एक ‘पेशेवर चोर’ है.

पुलिस के अनुसार, संदिग्ध ने 6 जून को बख्शी नगर थाना क्षेत्र में एक अस्पताल के बाहर एक व्यक्ति को लूटा था. पीड़ित ने मंगलवार को संदिग्ध को एक बाजार क्षेत्र में देखा और अपने पैसे मांगे. हालांकि, संदिग्ध ने कथित तौर पर उसे चाकू से घायल करने के बाद भागने की कोशिश की.

जल्द ही, इलाके में गश्त कर रहे पुलिस वाले भी पीछा करने लगे और संदिग्ध को पकड़ लिया गया. बाद में संदिग्ध पर कथित तौर पर कुछ लोगों ने हमला किया और कुछ पुलिस वाले भी कथित तौर पर भीड़ में शामिल हो गए. इस हमले के बाद उनकी शर्ट उतार दी गई और उनके गले में जूतों की माला डाल दी गई.

घटनास्थल पर पत्रकारों से बात करते हुए एसएचओ मन्हास ने दावा किया कि संदिग्ध हाल ही में पकड़े गए चोरों के गिरोह का सदस्य है. पुलिस अधिकारी ने उन्हें पकड़ने में पुलिस की मदद करने के लिए स्थानीय लोगों की भी प्रशंसा की. एसएचओ ने आरोप लगाया, ‘वह नशे में था.’

हालांकि, एसएचओ ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह किस आधार पर आरोप लगा रहे हैं. घटना के दौरान पुलिस के लिए संदिग्ध की मेडिकल जांच करवाना संभव नहीं था.

‘गंभीर टिप्पणी’

मंगलवार को सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (जम्मू) जोगिंदर सिंह ने घटना की जांच के लिए एक समिति गठित की. सिंह ने एक आदेश में कहा कि पुलिस ने पुलिस अधिकारियों के आचरण को ‘गंभीरता से’ लिया है और जांच के आदेश दिए गए हैं जो एक सप्ताह के भीतर पूरी हो जाएगी.

आदेश में कहा गया है, ‘जम्मू पुलिस कानून के शासन को बनाए रखने में दृढ़ता से विश्वास करती है और साथ ही किसी भी अधिकारी/कर्मचारी की ओर से किसी भी गैर-पेशेवर प्रवृत्ति/दृष्टिकोण को प्रोत्साहित नहीं किया जाएगा और ऐसे दोषी सदस्यों के खिलाफ वांछित विभागीय/कानूनी कार्रवाई की जाएगी.’

इस घटना से पूरे जम्मू-कश्मीर में आक्रोश फैल गया है और अवामी इत्तेहाद पार्टी के विधायक शेख खुर्शीद और अन्य ने पुलिसकर्मियों के अपमानजनक आचरण के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है.

उन्होंने कहा, ‘कानून प्रवर्तन को कभी भी तमाशा या अपमान का जरिया नहीं बनना चाहिए. चाहे कोई भी अपराध हो, हमारी न्याय प्रणाली कानून के शासन द्वारा संचालित होती है, न कि भीड़ की मानसिकता या सार्वजनिक शर्मिंदगी से. इस तरह की कार्रवाइयां न्याय को बनाए रखने और व्यक्तिगत अधिकारों की रक्षा करने के लिए बनाए गए संस्थानों पर खराब प्रभाव डालती हैं.’

एक कश्मीरी मनशा अल्ताफ ने एक्स पर लिखा, ‘किस कानून के तहत उन्हें निर्वस्त्र घुमाया गया और गले में जूते पहनाए गए? पुलिस को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि कोई अपराधी है या नहीं, यह काम तो अदालत का है. यह सरासर गुंडागर्दी है.’

हिंदू दक्षिणपंथी समूह पुलिस का समर्थन किया

इसी बीच, जम्मू में हिंदू दक्षिणपंथी समूह बजरंग दल द्वारा बख्शी नगर एसएचओ के समर्थन में एक प्रदर्शन आयोजित किया गया तथा एसएसपी जम्मू से जांच वापस लेने का आग्रह किया गया.

बख्शी नगर की घटना 2017 में मध्य कश्मीर के बडगाम जिले में 53 राष्ट्रीय राइफल्स के सेना मेजर लीतुल गोगोई द्वारा एक कश्मीरी नागरिक फारूक अहमद डार को सेना की कार के बोनट पर बांधने की दर्दनाक घटना से मिलती जुलती है, जिन्होंने दावा किया था कि उन्होंने पीड़ित को पत्थरबाजों के खिलाफ मानव ढाल के रूप में इस्तेमाल किया था.

हालांकि इस घटना से पूरी दुनिया में आक्रोश फैल गया था, लेकिन गोगोई को ‘आतंकवाद विरोधी अभियानों में उनके प्रयासों’ के लिए सेना प्रमुख के प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया था.

इसी वर्ष अप्रैल में जम्मू शहर के व्यस्त परेड बाजार में एक संदिग्ध चोर को एक महिला की बालियां छीनने की कोशिश करते हुए पकड़ा गया था, जिसके बाद उसके आधे बाल मुंडवा दिए गए थे और उसके माथे पर काली स्याही से हिंदी में ‘चोर’ लिख दिया गया था.

जम्मू के रियासी जिले के निवासी संदिग्ध को बाद में पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में अर्धनग्न अवस्था में पक्का डांगा पुलिस थाने तक घुमाया गया, जिसके बाद उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)