श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने गुरुवार (27 जून) को कहा कि पहलगाम आतंकवादी हमले से पहले इस साल की अमरनाथ यात्रा के लिए पंजीकृत तीर्थयात्रियों में से केवल एक तिहाई ने ही मंदिर की यात्रा की पुष्टि की है.
हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, उन्होंने कहा कि 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकवादी हमले के चलते इस वर्ष अमरनाथ यात्रा के लिए तीर्थयात्रियों के पंजीकरण में 10 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है.
श्रीनगर में राजभवन में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए सिन्हा ने कहा कि वार्षिक तीर्थयात्रा के लिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की गई है. यह तीर्थयात्रा इस वर्ष 3 जुलाई से शुरू होकर 9 अगस्त को समाप्त होगी.
उपराज्यपाल सिन्हा ने कहा, ’22 अप्रैल की घटना से पहले तीर्थयात्रियों का पंजीकरण अच्छी गति से चल रहा था, लेकिन उसके बाद पंजीकरण में कमी आई. पिछले साल की तुलना में पंजीकरण में 10.19% की गिरावट आई है.’
उन्होंने बताया कि पहलगाम क्षेत्र के बैसरन में हुए हमले से पहले लगभग 2.36 लाख तीर्थयात्रियों ने यात्रा के लिए पंजीकरण कराया था. हमले में 26 लोग मारे गए थे, जिनमें से ज्यादातर सैलानी थे.
सिन्हा ने कहा, ‘जम्मू-कश्मीर प्रशासन और सुरक्षा बलों द्वारा उठाए गए कदमों के कारण तीर्थयात्रियों में विश्वास लौट रहा है, जिसके परिणामस्वरूप पंजीकरण में फिर से तेजी आई है.’
एलजी के अनुसार, श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड (एसएएसबी) ने 22 अप्रैल से पहले यात्रा के लिए पंजीकरण कराने वाले तीर्थयात्रियों से दोबारा सत्यापन कराने की प्रक्रिया शुरू की है.
उन्होंने कहा, ‘अब तक 85,000 तीर्थयात्रियों ने अपने पंजीकरण की दोबारा पुष्टि की है. हमें उम्मीद है कि आने वाले दिनों में पंजीकरण में तेजी आएगी.’
उल्लेखनीय है कि उपराज्यपाल इस श्राइन बोर्ड के अध्यक्ष हैं. हर साल देश भर से लाखों हिंदू श्रद्धालु हिमालय में 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित अमरनाथ गुफा मंदिर में खतरनाक पहाड़ी मार्गों, ग्लेशियरों और बर्फ से भरी नदियों से गुजरते हुए दर्शन करने आते हैं. पहलगाम अमरनाथ यात्रा के दो मुख्य आधार शिविरों में से एक है.
यह पूछे जाने पर कि क्या आतंकवादी हमले से इस वर्ष अमरनाथ यात्रा प्रभावित हुई है, सिन्हा ने बताया कि इससे समूचा जम्मू-कश्मीर, विशेषकर घाटी प्रभावित हुई है.
उपराज्यपाल ने कहा कि वह सभी को आश्वस्त करना चाहते हैं कि न केवल कश्मीर आने वाले तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के लिए बल्कि स्थानीय लोगों के लिए भी अच्छे सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं.
उन्होंने कहा, ‘आधार शिविरों में तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था है, जबकि सुरक्षा बल किसी भी स्थिति से निपटने के लिए क्षेत्र में निगरानी और मॉक ड्रिल कर रहे हैं. सभी सेवा प्रदाताओं का सत्यापन पूरा हो चुका है और अधिक पुलिस अधिकारियों और सीएपीएफ कर्मियों को तैनात किया गया है.’
