नई दिल्ली: महाराष्ट्र सरकार ने अंग्रेजी और मराठी माध्यम के स्कूलों में कक्षा 1 से 5 तक हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य करने के अपने निर्णय को वापस ले लिया है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य विधानमंडल के मानसून सत्र की पूर्व संध्या पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस निर्णय की घोषणा की.
फडणवीस ने यह भी घोषणा की कि शिक्षाविद् और पूर्व राज्यसभा सांसद नरेंद्र जाधव के नेतृत्व में एक नई विशेषज्ञ समिति बनाई जाएगी, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के त्रिभाषा फॉर्मूले को लागू करने पर सलाह देगी.
फडणवीस ने कहा, ‘सरकार त्रिभाषा फॉर्मूला किस कक्षा से लागू किया जाना चाहिए, यह तय करने से पहले इस नई समिति की रिपोर्ट का इंतजार करेगी.’
गौरतलब है कि इस वर्ष अप्रैल में मराठी और अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में कक्षा 1-5 तक हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य बनाने वाला आदेश जारी किया था. बाद में इस निर्णय पर भारी आलोचना के बाद महाराष्ट्र सरकार ने अपना कदम वापस ले लिया था.
इसके बाद राज्य सरकार ने 17 जून को एक संशोधित आदेश जारी किया था, जिसमें कहा गया कि हिंदी को सामान्य तौर पर कक्षा 1 से 5 तक मराठी और अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में छात्रों को तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाया जाएगा. सरकार ने कहा था कि हिंदी अनिवार्य नहीं होगी, लेकिन हिंदी के अलावा किसी भी भारतीय भाषा का अध्ययन करने के लिए स्कूल में प्रति कक्षा कम से कम 20 छात्रों की सहमति अनिवार्य है.
इस आदेश के बाद राज्य में व्यापक तौर पर सरकार की आलोचना हुई. राजनीतिक दलों के साथ-साथ विभिन्न संगठनों ने भी इसका विरोध किया. महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और उनके चचेरे भाई राज ठाकरे इसका विरोध करने के लिए सालों बाद साथ आए. 5 जुलाई को इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन की घोषणा की. हालांकि इस ताजा निर्णय के बाद विरोध प्रदर्शन रद्द हो गया है.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में फडणवीस ने आगे कहा, ‘जब उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने कक्षा 1 से तीन भाषा नीति – मराठी, हिंदी और अंग्रेजी – लागू करने के माशेलकर पैनल के सुझावों को स्वीकार किया था. उनके मंत्रिमंडल ने पैनल के सुझाव को स्वीकार कर लिया था, लेकिन अब वे राजनीति कर रहे हैं. हमने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि मराठी अनिवार्य रहेगी. वे केवल हिंदी का विरोध कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने अंग्रेजी को स्वीकार कर लिया है.’
इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘पहली कक्षा से तीन भाषाएं पढ़ाने के बहाने हिंदी भाषा को थोपने का फैसला आखिरकार वापस ले लिया गया है. सरकार ने इससे संबंधित दो जीआर रद्द कर दिए हैं. इसे देर से आई समझदारी नहीं कहा जा सकता, क्योंकि यह थोपे जाने का फैसला सिर्फ़ मराठी लोगों के दबाव के कारण वापस लिया गया है. सरकार हिंदी भाषा को लेकर इतनी अड़ियल क्यों थी और इसके लिए सरकार पर कौन दबाव बना रहा था, यह रहस्य बना हुआ है.’
