जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्रों पर कार्रवाई, झड़पों व कैंपस से बैन के मामलों में बढ़ोतरी: रिपोर्ट

पिछले दो वर्षों में जामिया मिलिया इस्लामिया में अधिकारियों द्वारा निलंबन और कैंपस प्रतिबंध सहित अन्य कार्रवाई का सामना करने वाले छात्रों की संख्या बढ़ी है. इस अवधि में छात्रों के बीच झड़पों में भी वृद्धि देखी गई.

4 अप्रैल, 2025 को जामिया मिलिया इस्लामिया के परिसर में वक्फ (संशोधन) विधेयक के खिलाफ छात्रों का विरोध प्रदर्शन और सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: जामिया मिलिया इस्लामिया में अधिकारियों द्वारा निलंबन और कैंपस प्रतिबंध सहित अन्य कार्रवाई का सामना करने वाले छात्रों की संख्या पिछले दो वर्षों में बढ़ी है. ये जानकारी टाइम्स ऑफ इंडिया को सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मिली है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि कार्रवाई का सामना करने वाले छात्रों की संख्या 2019 के 17 से बढ़कर 2022 में 47, 2023 में 105 और 2024 में 74 हो गई है – यानी चार वर्षों में कुल 243 छात्र.

आरटीआई के मुताबिक, इस अवधि में छात्रों के बीच झड़पों में भी वृद्धि देखी गई. 2023 और 2024 में ऐसी 42 घटनाएं दर्ज की गईं.

हालांकि, 2020 और 2021 में जब कोविड-19 लॉकडाउन लागू था, तब विश्वविद्यालय में कोई झड़प नहीं हुई.

मालूम हो कि 2019 के अंत में नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ जामिया में जोरदार विरोध प्रदर्शन हुए थे. जब छात्र शांति बनाए हुए थे, दिल्ली पुलिस ने 15 दिसंबर, 2019 को एक असाधारण कदम उठाते हुए परिसर में प्रवेश किया और पढ़ाई कर रहे छात्रों पर हमला किया, लाइब्रेरी में आंसू गैस के गोले छोड़े और असाधारण अराजकता पैदा की. इस कार्रवाई में सौ से अधिक छात्र घायल हुए थे.

इन वर्षों में एक अल्पसंख्यक संस्थान के तौर पर जामिया सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी की मुस्लिम विरोधी नीतियों का गवाह रहा है.

द वायर ने तब एक रिपोर्ट में बताया था कि इस साल 13 फरवरी की सुबह विश्वविद्यालय के अंदर विरोध प्रदर्शन कर रहे 14 छात्रों को सोते समय जगाया गया और संस्थान के सुरक्षा गार्ड्स ने उन्हें जबरन उठाकर पुलिस के हवाले कर दिया. ये छात्र चार छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई को रद्द करने की मांग को लेकर धरने पर बैठे थे, जिन्हें एक स्मृति दिवस कार्यक्रम आयोजित करने के लिए निलंबित कर दिया गया था.

इस साल की शुरुआत में दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस निलंबन आदेश पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी थी. जस्टिस दिनेश कुमार शर्मा ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर विश्वविद्यालय द्वारा की गई प्रतिक्रिया की निंदा करते हुए इसे ‘चिंताजनक’ बताया था.

गौरतलब है कि पिछले साल 29 नवंबर को जारी एक ज्ञापन में कहा गया था कि ‘विश्वविद्यालय परिसर के किसी भी हिस्से में किसी भी संवैधानिक गणमान्य व्यक्ति के खिलाफ कोई विरोध प्रदर्शन, धरना या नारे लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी.’ इसके साथ ही परिसर में ग्राफिटी (graffiti) और पोस्टर लगाने पर 50,000 रुपये तक का जुर्माना है.

दंडात्मक कार्रवाई

अखबार की रिपोर्ट में कहा गया है कि छात्रों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई में चेतावनी और कारण बताओ नोटिस से लेकर निलंबन और परिसर में प्रतिबंध तक शामिल हैं.

इसके अनुसार, ‘2023 में जामिया ने 71 कारण बताओ नोटिस जारी किए थे. 21 छात्रों से अच्छे आचरण के बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने को कहा था और तीन को कैंपस से प्रतिबंधित कर दिया गया था. ऐसे ही 2024 में 56 छात्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए, आठ को अच्छे आचरण के बॉन्ड पर रखा गया, चार को निलंबित कर दिया गया और एक को कैंपस से बैन कर दिया गया था.’

इसके अलावा छह साल की अवधि में विवादों के संबंध में पांच एफआईआर दर्ज की गईं, एक 2019 में और चार 2024 में.

अखबार की रिपोर्ट में कहा गया है, ‘एफआईआर ‘चोट पहुंचाने’ से संबंधित धाराओं के तहत दर्ज की गई थीं.

हालांकि, विश्वविद्यालय ने आरटीआई अधिनियम की धारा 8 (1) (एच) का हवाला देते हुए विशिष्ट प्रावधानों का खुलासा करने से इनकार कर दिया, जो जांच में बाधा डालने वाले विवरणों को छूट देता है.’

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2019 और 2024 के बीच जामिया ने कुल 27,000 रुपये का जुर्माना वसूला. इसमें 2019 में 7,000 रुपये, 2022 में 4,000 रुपये, 2023 में 12,500 रुपये और 2024 में 3,500 रुपये शामिल हैं. कोविड-19 वर्ष 2020 या 2021 में कोई जुर्माना नहीं वसूला गया.