नई दिल्ली: म्यांमार में इस सप्ताहांत तक चिन राज्य में दो जातीय समूहों के बीच भयंकर संघर्ष के कारण 3,000 से अधिक म्यांमारी शरणार्थी सीमावर्ती राज्य मिजोरम में प्रवेश कर चुके हैं.
स्थानीय ख़बरों के अनुसार, पिछले चार दिनों में शरणार्थियों का एक नया जत्था भारतीय राज्य के चम्फाई जिले में प्रवेश कर चुका है. भारतीय जिला चिन राज्य की सीमा से सटा हुआ है.
स्थानीय अधिकारी के हवाले से मिजोरम पोस्ट की रिपोर्ट में कहा गया है कि शरणार्थियों को जिले के ज़ोखावथर गांव में ठहराया गया है.
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘अधिकारी ने कहा कि म्यांमार के नागरिक मुख्य रूप से तीन सीमावर्ती गांवों- ख्वामावी, रिखावदार और लियान्हा – चिन पहाड़ियों में सक्रिय कई जुंटा विरोधी बलों में से दो – हुआलंगो क्षेत्र के चिन नेशनल डिफेंस फोर्स (सीएनडीएफ) और राइनलैंड डिफेंस फोर्स (सीडीएफ) के बीच भीषण गोलीबारी के कारण ज़ोखावथर भाग आए.’
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘शरणार्थियों ने गुरुवार (3 जुलाई) को मिजोरम में प्रवेश करना शुरू कर दिया और शनिवार (5 जुलाई) को दो सशस्त्र समूहों के बीच भारी गोलीबारी के बाद बड़ी संख्या में आए. कल (6 जुलाई) लड़ाई बंद होने के बाद अब अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थिति शांत है.’
लड़ाई बंद होने के बाद भी कम से कम 30 लोग सुरक्षा की तलाश में अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर गए.
बताया गया है कि असम राइफल्स ने किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय सीमा को सील कर दिया है. हालांकि, सीमावर्ती गांवों के निहत्थे आम नागरिक जो अपनी जान बचाने के लिए मिजोरम में प्रवेश करना चाहते थे, उन्हें सीमा पार करने की अनुमति दी गई है.
मिजोरम में पहले से ही 32,000 से ज़्यादा शरणार्थी हैं जो गृहयुद्ध की स्थिति के कारण उस देश से भाग आए हैं. इस हफ़्ते की शुरुआत में गृह मंत्रालय के निर्देश पर राज्य सरकार ने पांच साल से कम उम्र के बच्चों को छोड़कर शरणार्थियों के बायोमेट्रिक विवरण एकत्र करने की प्रक्रिया शुरू की है.
रिपोर्ट में स्थानीय समुदाय के एक नेता के हवाले से कहा गया है कि दो युद्धरत चिन जातीय सशस्त्र समूहों के बीच गोलीबारी की घटना क्षेत्रों – खास तौर पर ख्वामावी, जो चिन राज्य के वाणिज्यिक केंद्रों में से एक है और भारत और म्यांमार के बीच एक प्रमुख बिंदु है – पर नियंत्रण के लिए हुई है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘कम से कम चार कार्यकर्ता कथित तौर पर घायल भी हुए हैं और उन्हें इलाज के लिए मिजोरम लाया गया है.’
ऐसा माना जा रहा है कि मिजोरम के सबसे बड़े नागरिक समाज समूह, यंग मिजो एसोसिएशन (सीवाईएमए) ने दोनों समूहों के बीच युद्ध विराम सुनिश्चित करने के लिए हस्तक्षेप किया है.
