प्रधानमंत्री की परीक्षा पे चर्चा: सात साल में बढ़ा 522 प्रतिशत ख़र्चा

जबकि केंद्र सरकार की कई छात्रवृत्तियां ठप पड़ी हैं, 2018 में 3.67 करोड़ से शुरू हुआ ‘परीक्षा पे चर्चा’ का बजट 2025 में पांच गुना से भी अधिक बढ़कर 18.82 करोड़ रुपये पहुंच गया. यह कार्यक्रम कई जगहों पर प्रधानमंत्री का प्रचार नज़र आता है. केवल 2023-24 में 1,111 सेल्फी प्वाइंट्स पर 2.49 करोड़ रुपये (जीएसटी अलग) खर्च कर दिए गए.

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'परीक्षा पे चर्चा' में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (फोटो साभार: पीआईबी)

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्कूली बच्चों से संवाद के वार्षिक ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम पर सरकार का बजट सात वर्षों में पांच गुना से भी ज़्यादा बढ़ गया है.

2018 में इस कार्यक्रम के पहले संस्करण पर जहां 3.67 करोड़ रुपये खर्च हुए थे, 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 18.82 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. यानी पिछले सात साल में बजट में 522% की वृद्धि हुई है.

जिस वक्त शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ी कई अहम योजनाएं पैसों की कमी से जूझ रही हैं और हज़ारों छात्र परेशान हैं, तब ‘परीक्षा पे चर्चा’ के तहत प्रधानमंत्री के सेल्फी पॉइंट देश भर में तेजी से लगाए जा रहे हैं. केवल 2023 और 2024 के कार्यक्रमों के दौरान देशभर में 1,111 सेल्फी पॉइंट्स लगाए गए थे, जिस पर 2.49 करोड़ रुपये (जीएसटी अलग) खर्च हुए थे.

इस कार्यक्रम में उन समस्याओं की बजाय जिनसे छात्र स्कूल पार करते ही जूझते हैं, मसलन पेपर लीक या परीक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता, छात्रों को भाषण सुनाए जाते हैं, और प्रधानमंत्री की तस्वीरों के साथ सेल्फी लेने को प्रेरित किया जाता है.

कहने को यह शैक्षणिक कार्यक्रम है, लेकिन यह ‘इवेंट मैनेजमेंट’ पर टिका है. प्रतिवर्ष इवेंट मैनेजमेंट’ का खर्चा बढ़ता जा रहा है, जो 2024 में साढ़े छह करोड़ पहुंच गया था.

गौरतलब है कि यह कार्यक्रम सिर्फ़ एक दिन में संपन्न हो जाता है. यानी यह पूरा खर्चा सिर्फ़ एक दिन का है.

कोविड के कारण ‘परीक्षा पे चर्चा’ का चौथा संस्करण 7 अप्रैल 2021 को ऑनलाइन आयोजित किया गया था. प्रेस इनफार्मेशन ब्यूरो की विज्ञप्ति के अनुसार उस दिन प्रधानमंत्री मोदी ने ‘महामारी से उत्पन्न चुनौतियों के बीच’ ऑनलाइन भाषण के जरिये ‘छात्रों और उनके परिवारों को प्रेरित’ किया था.  इसके बावजूद उस ऑनलाइन आयोजन पर, यानी प्रधानमंत्री के भाषण पर छह करोड़ रुपये खर्च हुए.

परीक्षा पे चर्चा 2021 के दौरान छात्रों से ऑनलाइन बातचीत करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस अकेले कार्यक्रम पर 6 करोड़ रुपये खर्च हुए थे. (फोटो साभार: पीआईबी)

इसलिए इस कार्यक्रम का विस्तार प्रधानमंत्री के प्रचार का एक और माध्यम प्रतीत होता है.

इसे इस तरह भी देख सकते हैं कि ‘डिपार्टमेंट ऑफ स्कूल एजुकेशन एंड लिटरेसी’ की योजनाएं, जिनके तहत ‘नेशनल मीन्स कम मेरिट स्कॉलरशिप स्कीम’ और ‘प्रधानमंत्री इनोवेटिव लर्निंग प्रोग्राम’ आते हैं, उनका बजट घट गया है. 2018-19 केंद्र सरकार की इन योजनाओं का अनुमानित बजट 559.55 करोड़ रुपये था, जो 2025-26 में घटकर 429.00 करोड़ रह गया. यानी लगभग 23.2 प्रतिशत की कमी हो गई.

इसके अलावा नेशनल टैलेंट सर्च एग्ज़ामिनेशन (NTSE) समीक्षा के नाम पर 2021 से बंद पड़ा है. यह परीक्षा 1963 से चल रही थी और इसके माध्यम से हर साल कक्षा 10 के लगभग 2,000 मेधावी छात्रों को मासिक छात्रवृत्ति और स्नातकोत्तर स्तर तक मेंटरशिप दी जाती थी.

समीक्षा के नाम पर ही मौलाना आज़ाद नेशनल फेलोशिप के तहत पीएचडी कर रहे अल्पसंख्यक समुदायों के सैकड़ों शोधार्थियों की छात्रवृत्ति भी दिसंबर 2024 से रोक दी गई है. यह छात्रवृत्ति अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय प्रदान करता है.

फंड की कमी का हवाला देकर केंद्र सरकार ने वंचित समुदाय के क़रीब 60% छात्रों का विदेश में पढ़ाई का वज़ीफ़ा भी रोक दिया है.

यानी, वे योजनाएं जिनसे छात्रों को सीधा फायदा मिलता रहा है, वे लड़खड़ा रही हैं और दूसरी तरफ ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम में करोड़ रुपये झोंककर सरकार प्रधानमंत्री मोदी का प्रचार कर रही है.

क्यों शुरू किया गया था ‘परीक्षा पे चर्चा’?

यह प्रधानमंत्री मोदी द्वारा छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से संवाद का एक वार्षिक कार्यक्रम है. इसकी शुरुआत 16 फरवरी 2018 को हुई थी. इसका उद्देश्य परीक्षा के तनाव को कम करना, छात्रों को सकारात्मक सोच के साथ परीक्षा की तैयारी के लिए प्रेरित करना और शिक्षा को लेकर प्रधानमंत्री के विज़न को साझा करना है.

हर साल यह कार्यक्रम किसी बड़े स्थल पर आयोजित किया जाता है और देशभर के लाखों छात्र इससे ऑनलाइन जुड़ते हैं. इसे ‘एग्ज़ाम वॉरियर्स’ नामक प्रधानमंत्री मोदी की पुस्तक से जोड़ा गया है, जिसमें उन्होंने छात्रों को परीक्षा के समय तनावमुक्त रहने के लिए सुझाव दिए हैं.

2018 में ‘परीक्षा पे चर्चा’ के पहले आयोजन में छात्रों से बातचीत करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (फोटो साभार: पीआईबी)

‘परीक्षा पे चर्चा’ का खर्चा

सामाजिक कार्यकर्ता कन्हैया कुमार द्वारा द वायर हिंदी को उपलब्ध कराए गए आरटीआई के जवाबों से पता चलता है कि प्रति वर्ष इस आयोजन पर इस तरह खर्चा हुआ.

  • 2018: 3.67 करोड़ रुपये
  • 2019: 4.93 करोड़ रुपये
  • 2020: 5.69 करोड़ रुपये
  • 2021: 6 करोड़ रुपये
  • 2022: 8.61 करोड़ रुपये
  • 2023: 10.04 करोड़ रुपये
  • 2024: 13.55 करोड़ रुपये (अनुमानित)
  • 2025: 18.82 करोड़ रुपये

अब तक के आठ संस्करणों पर सरकार ने लगभग 70.88 करोड़ रुपये खर्च कर दिए हैं.

सेल्फी पॉइंट्स पर करोड़ों का खर्च

लेकिन यह खर्चा अमूमन इवेंट मैनेजमेंट, फ़िल्म निर्माण और सेल्फी पॉइंट जैसी चीज़ों पर हो रहा है.

चूंकि मौजूदा सरकार में प्रधानमंत्री के साथ सेल्फी का खास महत्व है, इसलिए केवल 2023 और 2024 में सरकार ने इस कार्यक्रम के लिए देश भर में 1,111 सेल्फी पॉइंट्स के निर्माण पर 2.49 करोड़ रुपये (जीएसटी छोड़कर) खर्च किए थे. इसमें 2D और 3D, दोनों तरह के सेल्फी पॉइंट्स शामिल हैं.

सेल्फी यूनिट्स का खर्च.

एक 3D सेल्फी यूनिट को लगाने की लागत 1,25,000 तक आती है. वहीं प्रत्येक 2D सेल्फी यूनिट का खर्च 15,000 से 21,000 रुपये तक आता है. इन सेल्फी यूनिट्स पर प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर बनी होती है.

इसके अलावा डिजिटल प्रचार पर हर साल लाखों रुपये खर्च होते हैं, और प्रचार सामग्रियों पर भी मुख्य रूप से प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर होती है. 2021 से 2024 के बीच ‘परीक्षा पे चर्चा’ के डिजिटल प्रचार पर सरकार ने 2.44 करोड़ रुपये खर्च किए हैं.

इस आयोजन का डिजिटल प्रचार प्रधानमंत्री की छवि को विविध रूपों में प्रस्तुत करता है.

 

परीक्षा पे चर्चा 2023 के दौरान छात्रों से बातचीत करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (फोटो साभार: पीआईबी)

किस काम पर कितना खर्च?

सभी संस्करणों के खर्च का विस्तृत ब्योरा तो उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन कुछ की जानकारी मिली है. जैसे 10 फरवरी, 2025 को दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ‘परीक्षा पे चर्चा’ के आठवें संस्करण में करोड़ों रुपये खर्च किए गए.

सरकार के मुताबिक, इस दौरान इवेंट मैनेजमेंट, मीडिया प्रोडक्शन, ग्राउंड एक्टिवेशन, लाइव स्ट्रीमिंग और भोजन आदि पर 14,21,99,125 रुपये खर्च हुए. वहीं विज्ञापन, ई-टेंडरिंग, टैक्सी सेवा, छात्रों के लिए आवास, बसें, किताबों की खरीद और यात्रा प्रबंध आदि पर 97,65,370 रुपये खर्च हुए.

2024 2023 2022
इवेंट मैनेजमेंट 6.42 करोड़ रुपये 3.85 करोड़ रुपये 4.04 करोड़ रुपये
फिल्म शूटिंग 1.95 करोड़ रुपये 1.56 करोड़ रुपये 1.45 करोड़ रुपये
डिजिटल प्रचार 90.61 लाख रुपये 44.05 लाख रुपये 35.29 लाख रुपये
भोजन 98.68 लाख रुपये 53.04 लाख रुपये 56.35 लाख रुपये
2D सेल्फी यूनिट्स 1.06 करोड़ रुपये 95.33 लाख रुपये
3D सेल्फी यूनिट्स 60 लाख रुपये
कार्यक्रम स्थल के लिए 1.36 करोड़ 12.14 लाख रुपये 10.13 लाख रुपये
अन्य (विज्ञापन, टैक्सी, आदि)  25.32 लाख रुपये 21.80 लाख रुपये 4.34 लाख रुपये

 

2021 खर्च
फिल्म निर्माण 2.17 करोड़ रुपये
डिजिटल पोस्टर और बैनर डिज़ाइन 9 लाख रुपये
विज्ञापन 65.89 लाख रुपये
शूटिंग अरेंजमेंट और प्रोडक्शन 1.88 करोड़ रुपये
बल्क एसएमस 2.45 लाख रुपये
वीडियो कॉन्फ्रेंस सेटअप 10.50 लाख रुपये

इसके अलावा 2021 के कार्यक्रम के लिए नरेंद्र मोदी द्वारा लिखी किताब ‘एग्ज़ाम वॉरियर्स’ को खरीदने में 3,97,500 रुपये खर्च किए गए थे।

इन सब में एजुकेशनल कंसल्टेंट्स इंडिया लिमिटेड का चार्ज और टैक्स शामिल नहीं है.

नरेंद्र मोदी द्वारा लिखी किताब ‘एग्ज़ाम वॉरियर्स’. (साभार: पेंगुइन इंडिया)

सरकार कहती है कि ‘परीक्षा पे चर्चा’ में इवेंट मैनेजमेंट, वेन्यू बुकिंग, इंटरनेट सेवा, मोबाइल टॉयलेट, विज्ञापन, भोजन, ऑडियो-विजुअल, फिल्म शूटिंग, सोशल मीडिया प्रचार और परिवहन सेवाओं का काम बाहरी कंपनियां संभालती हैं.

लेकिन किस सेवा के लिए किसे कितने का भुगतान किया जा रहा है, इसका बिल या इनवॉइस देने से इनकार कर दे रही है.

सरकार का कहना है उसे आरटीआई अधिनियम, 2005 की धारा 8(1)(d) और 8(1)(e) के तहत ऐसी जानकारी साझा न करने की छूट प्राप्त है क्योंकि ये जानकारी फिड्यूशियरी रिलेशनशिप के अंतर्गत आती हैं. इससे व्यावसायिक गोपनीयता (commercial confidence, trade secrets) और प्रतिस्पर्धा को नुकसान हो सकता है.

बिल या इनवॉइस मांगने पर सरकार की तरफ से मिले जवाब.

डिजिटल इंडिया में सर्टिफिकेट छपाई पर 6.19 करोड़ रुपये खर्च

यही नहीं, आरटीआई कार्यकर्ता अजय बासुदेव बोस को मिली जानकारी के मुताबिक, ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम के प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र देने के लिए सरकार 6.19 करोड़ रुपये सिर्फ छपाई पर खर्च कर चुकी है. ये प्रमाणपत्र डिजिटल रूप से भी जारी किए जा सकते थे, जिससे सरकारी खर्च में भारी कटौती संभव थी, खासकर तब जब केंद्र सरकार ‘डिजिटल इंडिया’ जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं को एक दशक से प्रचारित कर रही है. यह आंकड़ा ऐसे समय सामने आया है जब डिजिटल इंडिया मिशन की 10वीं वर्षगांठ (1 जुलाई 2025) मनाई जा रही है, जिसका उद्देश्य सरकारी प्रक्रियाओं को कागज रहित, पारदर्शी और किफायती बनाना था.

अजय बासुदेव बोस के आरटीआई आवेदन का जवाब.
अजय बासुदेव बोस के आरटीआई आवेदन का जवाब.

इतने खर्च का हासिल क्या?

सरकार का दावा है कि यह कार्यक्रम छात्रों के तनाव को कम करने और उनके मनोबल को बढ़ाने के लिए है, लेकिन साल दर साल बढ़ता खर्च और तमाम प्रचार गतिविधियां सवाल खड़ा करती हैं कि क्या यह वास्तव में संवाद का मंच है या प्रधानमंत्री की ब्रांडिंग का माध्यम?