नई दिल्ली: मेघालय के पूर्वी खासी हिल्स जिले के सोहरा पुलिस थाने में 19 वर्षीय एक युवक को हिरासत में कथित तौर पर प्रताड़ित किया गया और उसे शौचालय का पानी पीने के लिए मजबूर किया गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया. घटना की जांच के आदेश दे दिए गए हैं.
समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़ित की मां मिल्ड्रेड जिरवा ने एसपी विवेक सिम और मेघालय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस (सेवानिवृत्त) टी. वैफेई के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज कराते हुए न्याय और जवाबदेही की मांग की है.
अपनी एफआईआर में जिरवा ने कहा कि 3 जुलाई को पुलिस उसके बेटे गेटविन को कुछ दिन पहले एक अन्य युवक से हुए झगड़े के सिलसिले में तलाशने आई थी.
अधिकारियों के अनुसार, वह अपने बेटे के साथ सुबह करीब 9 बजे सोहरा थाने गई थी.
उन्होंने आरोप लगाया, ‘मुझे यह देखकर आश्चर्य हुआ कि मेरा बेटा दोपहर करीब 2 बजे गंभीर रूप से घायल अवस्था में थाने से बाहर आया. मैं उसे तुरंत सोहरा सीएचसी ले गई, जहां से उसे शिलांग सिविल अस्पताल रेफर कर दिया गया. तब से वह अस्पताल में है.’
उन्होंने पुलिस के आचरण पर सवाल उठाते हुए दावा किया, ‘अगर मेरे बेटे ने कोई अपराध किया था, तो उचित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए था. रिहा होने से पहले उसे थाने में थर्ड-डिग्री टॉर्चर किया गया. यह दर्शाता है कि उसके मानवाधिकारों का उल्लंघन किया गया, जिससे उसे गंभीर मानसिक और शारीरिक नुकसान हुआ.’
अपने साथ हुई घटना को याद करते हुए गेटविन ने आरोप लगाया कि हिरासत में लिए जाने के बाद पुलिस ने उनकी पिटाई की और फिर उन्हें लॉकअप में डाल दिया. उन्होंने दावा किया, ‘जब मैंने पानी मांगा तो उन्होंने मना कर दिया. मुझे शौचालय से पानी पीने के लिए मजबूर किया गया.’
शिकायत के जवाब में पुलिस विभाग ने जांच शुरू कर दी है. डीजीपी इदाशीशा नोंग्रांग ने कहा कि एसडीपीओ पिनुरस्ला बी. वानस्वेत को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है.
एसपी ने कहा कि एक बार तथ्यों की पूरी तरह से पुष्टि हो जाने पर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सभी आवश्यक और उचित कार्रवाई की जाएगी. इस घटना ने व्यापक चिंता पैदा कर दी है. मानवाधिकार समूहों और नागरिक समाज संगठनों ने मामले की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच की मांग की है.
