मिज़ोरम: भाजपा के सत्ता से बाहर होने के बाद गवर्नर ने चकमा स्वायत्त जिला परिषद में राज्यपाल शासन लागू किया

मिज़ोरम के राज्यपाल और नरेंद्र मोदी सरकार में पूर्व मंत्री वीके सिंह ने राज्य की चकमा स्वायत्त जिला परिषद में राज्यपाल शासन लागू कर दिया है. यह फैसला सत्तारूढ़ ज़ोरम पीपुल्स मूवमेंट द्वारा भाजपा को परिषद की सत्ता से बाहर करने के कुछ दिनों बाद लिया गया है.

New Delhi: Minister of State for External Affairs VK Singh addresses a press conference on Pravasi Bharatiya Divas, in New Delhi, Friday, Jan. 11, 2019. (PTI Photo/Vijay Verma) (PTI1_11_2019_000050B)
मिजोरम के राज्यपाल वीके सिंह. (फाइल फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: मिजोरम के राज्यपाल और नरेंद्र मोदी सरकार में पूर्व मंत्री वीके सिंह ने राज्य की चकमा स्वायत्त जिला परिषद (सीएडीसी) में राज्यपाल शासन लागू कर दिया है. यह फैसला सत्तारूढ़ ज़ोरम पीपुल्स मूवमेंट (जेडपीएम) द्वारा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को परिषद से सत्ता से बाहर करने के कुछ दिनों बाद लिया गया है.

असम के कार्बी आंगलोंग स्वायत्त जिला परिषद में 2016 में भी ऐसी ही स्थिति बनी थी, जब भाजपा ने विपक्षी कांग्रेस से सत्ता छीन ली थी, क्योंकि उसके निर्वाचित सदस्यों ने पार्टी बदल ली थी. उस समय असम के तत्कालीन राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने न केवल भाजपा को निर्वाचित परिषद से सत्ता छीनने की अनुमति दी थी, बल्कि इसके कार्यकाल को छह महीने के लिए बढ़ा दिया था, जिसके अंत में चुनाव हुए जिसमें सत्तारूढ़ पार्टी ने जीत हासिल की.

मिजोरम में इस साल 16 जून को चकमा स्वायत्त जिला परिषद के अध्यक्ष लक्कन चकमा द्वारा बुलाए गए विशेष सत्र में राज्य में सत्ता में मौजूद जेडपीएम ने भाजपा के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया. इसके मुख्य कार्यकारी सदस्य मोलिन कुमार चकमा को उनकी पार्टी के पूर्व सदस्यों ने सत्ता से बाहर कर दिया, जो जेडपीएम में शामिल हो गए थे.

16 जून के प्रस्ताव में मतदान करने वाले 17 निर्वाचित सदस्यों में से 15 भाजपा के बागी थे, जिन्होंने पार्टी के खिलाफ मतदान किया था और इसके पक्ष में सिर्फ एक वोट पड़ा था. मिजो नेशनल फ्रंट के एकमात्र सदस्य ने मतदान से परहेज किया था. मतदान ने भाजपा से जेडपीएम के लिए सत्ता परिवर्तन सुनिश्चित किया था.

भाजपा से जेडपीएम में आए लक्कन चकमा ने फिर नई परिषद बनाने का दावा पेश किया. हालांकि, भाजपा के खिलाफ प्रस्ताव सफलतापूर्वक पारित होने के बमुश्किल तीन सप्ताह बाद राज्यपाल सिंह ने इसे अस्वीकार करने का फैसला किया और इसके बजाय अगले छह महीनों के लिए विधान परिषद में अपना प्रत्यक्ष शासन बढ़ा दिया, बशर्ते राज्य विधानसभा द्वारा इसका विस्तार किया जाए.

इस साल 4 फरवरी को भाजपा ने राज्य के इतिहास में पहली बार सीएडीसी चुनाव में सत्ता हासिल की थी. इसे राज्य में राष्ट्रीय पार्टी की बड़ी जीत के रूप में देखा गया. ऐसा इसलिए क्योंकि भाजपा 2018 के विधानसभा चुनावों में चकमा बहुल क्षेत्रों में जीती गई एकमात्र सीट को 2023 के चुनावों में बरकरार रखने में विफल रही थी. 2018 की वह जीत पूर्वोत्तर राज्य में भाजपा की पहली जीत थी.

असम के राज्यपाल ने 2016 में भाजपा के पक्ष में जो किया था, 7 जुलाई को उसके विपरीत राज्यपाल वीके सिंह ने अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करके परिषद पर नियंत्रण कर लिया, जब भाजपा सत्ता से बाहर हो गई.

स्थानीय ख़बरों के अनुसार, राज्य जिला परिषद और अल्पसंख्यक मामलों के सचिव एल. पचुआउ द्वारा जारी एक अधिसूचना में कहा गया है कि ‘राज्यपाल का दृढ़ मत है कि निरंतर राजनीतिक अस्थिरता सीएडीसी के लिए अत्यंत हानिकारक है और निश्चित रूप से संविधान की छठी अनुसूची के प्रावधान का उद्देश्य यह नहीं है, जिसमें लोगों की भलाई के लिए जनजातीय क्षेत्र के प्रभावी प्रशासन की परिकल्पना की गई है.’

अधिसूचना में कहा गया है कि ‘इस मामले पर मंत्रिपरिषद की राय प्राप्त कर ली गई है और राज्यपाल इस बात से संतुष्ट हैं कि सीएडीसी का प्रशासन छठी अनुसूची के प्रावधानों के अनुसार नहीं चलाया जा सकता है.’

अधिसूचना में कहा गया है, ‘इसलिए राज्यपाल सीएडीसी में निहित या उसके द्वारा प्रयोग की जाने वाली शक्तियों के सभी कार्यों को स्वयं संभालने के लिए सहमत हैं.’

ज्ञात हो कि पूर्वोत्तर में मिजोरम, त्रिपुरा, मेघालय और असम में 10 स्वायत्त जिला परिषदें हैं.

भाजपा ने कार्बी आंगलोंग स्वायत्त जिला परिषद भी इसी तरह हथिया ली थी

2016 में भाजपा ने असम के कार्बी आंगलोंग स्वायत्त जिला परिषद में इसी तरह सत्ता हथिया ली थी, जब विपक्षी कांग्रेस चुनावों में विजयी हुई थी. तुलीराम रोंगखांग, जिन्होंने कांग्रेस के टिकट पर परिषद के मुख्य कार्यकारी सदस्य का पद जीता था, ने सत्तारूढ़ भाजपा में शामिल हो गए, जिससे भाजपा के लिए पिछले दरवाजे से परिषद में सत्ता हथियाने का रास्ता आसान हो गया.

तत्कालीन राज्यपाल पुरोहित ने रोंगखांग को भाजपा में जाने के बाद अगली परिषद बनाने की अनुमति दी.

जनवरी 2017 में असम के तत्कालीन राज्यपाल पुरोहित ने एक असाधारण शक्ति का प्रयोग किया था, ताकि कार्बी आंगलोंग स्वायत्त जिला परिषद के आगामी चुनावों में देरी किया जा सके. उन्होंने बिना चुनाव कराए ही कांग्रेस से भाजपा के पास आई परिषद का कार्यकाल छह महीने के लिए बढ़ा दिया था.

छह महीने बाद जून 2017 में चुनाव हुए जिसमें भाजपा परिषद के इतिहास में पहली बार केएडीसी चुनाव जीत सकी – जैसे कि उसने इस फरवरी में चकमा स्वायत्त जिला परिषद में जीत हासिल की थी.

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