नई दिल्ली: बिहार के पूर्णिया जिले में बीते रविवार को जादू-टोना करने के शक में एक ही परिवार की तीन महिलाओं समेत पांच सदस्यों की कथित तौर पर हत्या कर दी गई और उनके शव जला दिए गए.
यह घटना पूर्णिया शहर से 15 किलोमीटर दूर मुफस्सिल थाना क्षेत्र के टेटगामा गांव में हुई. इस गांव में उरांव और अन्य आदिवासी समुदाय के परिवार रहते हैं.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 6 जुलाई की रात हुई इस घटना के बाद अब पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ़्तार किया है.
पुलिस ने बताया कि मृतकों की पहचान बाबू लाल उरांव (50), उनकी मां कांतो देवी (70), पत्नी सीता देवी (45), बेटे मंजीत कुमार (25) और बहू रानी देवी (22) के रूप में हुई है.
पूर्णिया पुलिस ने मंगलवार को कहा कि पिछले डेढ़ साल में कम से कम पांच बच्चों की मौत और पिछले हफ़्ते हुई एक और मौत इस अपराध का कारण हो सकती है.
पुलिस ने कहा कि यह एक दुर्लभ मामला है जिसमें ऐसा लगता है कि पूरे गांव ने मिलकर एक ही परिवार के पांच लोगों की हत्या कर दी, जिनके बारे में उनका मानना था कि वे जादू-टोना करते थे.
अखबार के अनुसार, पुलिस ने एफआईआर में नामजद 23 लोगों में से मुकुल उरांव, छोटू उरांव और सनाउल्लाह को गिरफ्तार कर लिया है. एफआईआर में लगभग 150 अज्ञात लोगों की भीड़ का भी ज़िक्र है.
एक ग्रामीण के हवाले से अखबार ने कहा, ‘पिछले डेढ़ साल में कम से कम पांच बच्चों की मौत हो चुकी है और ग्रामीणों को शक है कि यह सीता देवी द्वारा किए गए जादू-टोने की वजह से हुआ है.’
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, परिवार में एकमात्र जीवित बचइ सीता देवी के बेटे सोनू (16) ने पुलिस को बताया कि रविवार रात 10 बजे लगभग 50 लोगों की भीड़ उनके घर में घुस आई और उनकी मां पर जादू-टोना करने का आरोप लगाया.
लड़के ने पुलिस को बताया कि भीड़ ने पहले उनकी मां को डायन कहकर लाठियों से पीटा. फिर उन्होंने परिवार के बाकी सदस्यों, जो महिला को बचाने आए थे, उन पर हमला किया और उसके सामने सभी को मौत के घाट उतार दिया.
पुलिस ने बताया कि हमलावर कथित तौर पर पीड़ितों के शवों को उनके घर से लगभग 100-150 मीटर दूर ले गए और उन्हें आग लगा दी. उन्होंने बताया कि सोमवार शाम को उनके के आंशिक रूप से जले हुए अवशेष बरामद किए गए.
अखबार के अनुसार, पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए एक संदिग्ध ने कथित तौर पर कबूल किया है कि ग्रामीणों ने डीजल डालकर शवों को जला दिया था. बयान में कहा गया है, ‘कहा जा रहा है कि उन्हें गला घोंटकर मारने के बाद शवों को जलाया गया.’
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को घटनास्थल पर पहुंचे पूर्णिया के जिलाधिकारी अंशुल कुमार ने कहा, ‘यह घटना लोगों में व्याप्त अंधविश्वास का नतीजा है. इससे पता चलता है कि हमें इन आदिवासी इलाकों में साक्षरता और जागरूकता की कमी को दूर करने के लिए काम करने की ज़रूरत है.’
पूर्णिया सदर अनुमंडल पुलिस अधिकारी पंकज कुमार शर्मा ने कहा, ‘अब तक की हमारी जांच से पता चला है कि यह घटना पारंपरिक उपचार पद्धतियों या कथित जादू-टोने को लेकर हुए विवाद के कारण हुई थी. ऐसा माना जा रहा है कि बाबूलाल उरांव, जो इस तरह के अनुष्ठान करते थे, के परिवार को तीन दिन पहले रामदेव उरांव के परिवार के एक बच्चे की मौत और एक अन्य के बीमार पड़ने के बाद निशाना बनाया गया. ऐसा लगता है कि इसी वजह से यह हमला हुआ.’
