नई दिल्ली: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (माकपा) के वरिष्ठ नेताओं- वृंदा करात और अनुराग सक्सेना ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर दिल्ली में ‘अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की पहचान’ की चल रही प्रक्रिया में बांग्ला भाषी नागरिकों के खिलाफ उत्पीड़न और मानवाधिकारों के उल्लंघन पर हस्तक्षेप करने की मांग की है.
शाह को लिखे एक पत्र में माकपा नेताओं ने लिखा, ‘हमें भारत के वास्तविक नागरिकों को बांग्ला बोलने के आधार पर परेशान किए जाने की कई शिकायतें मिली हैं. 10 जुलाई, 2025 को हम, दिल्ली से माकपा नेताओं की एक टीम के साथ बवाना जेजे कॉलोनी गए और कई शिकायतकर्ताओं से मिले. हमें न्यूनतम मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन, उत्पीड़न और कुछ मामलों में जबरन वसूली जैसे भ्रष्टाचार देखकर आश्चर्य हुआ.’
दिल्ली में बांग्ला भाषी प्रवासियों की पांच घटनाओं का उल्लेख करते हुए नेताओं ने ‘भारत के कानून का पालन करने वाले नागरिकों को परेशान करने के लिए पुलिस के अराजक व्यवहार’ की ओर इशारा किया. उन्होंने ऐसे उदाहरण दिए जहां व्यक्तियों को हथकड़ी लगाई गई, पीटा गया और धमकाया गया.
एक मामले में झारखंड से कई दशक पहले दिल्ली आकर बसे एक परिवार के घर पुलिस की टीमें बार-बार आती रहीं और उन्हें परेशान करती रहीं. उन्हें बताया गया कि उनकी सभी तस्वीरें पुलिस की वेबसाइट पर अपलोड कर दी गई हैं.
एक अन्य मामले में उन्होंने एक व्यक्ति को यह कबूल करने के लिए मजबूर किया कि वह बांग्लादेशी है, फिर उसे लाठियों से मारा, जमीन पर पटका और जूतों से उसके कानों पर वार किया.
60 से 70 वर्ष की आयु की तीन बुज़ुर्ग महिलाओं के मामले का ज़िक्र करते हुए, जिन्हें उनके माता-पिता बचपन में ही बांग्लादेश से भारत ले आए थे, नेताओं ने कहा, ‘वे हर दिन इस डर में जीती हैं कि उन्हें जबरन निर्वासित कर दिया जाएगा. ऐसी ग़रीब, कमज़ोर एकल महिलाओं के साथ ऐसा व्यवहार अमानवीय और अन्यायपूर्ण है.’
उन्होंने 26 जून की एक घटना का भी ज़िक्र किया, जिसमें पश्चिम बंगाल के आठ प्रवासी मज़दूरों को सबूत होने के बावजूद जबरन बांग्लादेश भेज दिया गया था.
उन्होंने कहा, ‘हम आपको याद दिलाना चाहेंगे कि पश्चिम बंगाल की 26 प्रतिशत आबादी बांग्ला भाषी मुसलमानों की है. इसके अलावा, अवैध प्रवासियों को वापस भेजने के लिए अंतरराष्ट्रीय मानदंड भी हैं. दिल्ली में पहचान के मौजूदा तरीके इन सभी मानदंडों का उल्लंघन करते हैं.’
उन्होंने आगे कहा, ‘क्या अब भारत में बांग्ला बोलना अपराध है? इसके अलावा, क्या भारत के सभी बांग्ला भाषी मुस्लिम नागरिकों को अपराधी और अवैध प्रवासी माना जाना चाहिए?’
इसे न्यूनतम मानवाधिकारों का उल्लंघन बताते हुए माकपा नेताओं ने गृह मंत्री से कानून प्रवर्तन एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई करने और ‘पीड़ितों को उनके नुकसान के लिए पर्याप्त मुआवजा’ देने की मांग की है.
उल्लेखनीय है कि द वायर ने पहले भी रिपोर्ट किया था कि दिल्ली में आप्रवासी विरोधी अभियान के बीच बंगाली प्रवासी किस तरह संघर्ष कर रहे हैं. द वायर ने यह भी बताया है कि पिछले छह महीनों में दिल्ली में लगभग 700 अवैध प्रवासियों को भारत सरकार की ‘पुश बैक’ रणनीति, जो पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद तेज हो गई थी, के तहत बांग्लादेश वापस भेज दिया गया.
