राज्यसभा के चार नए मनोनीत सदस्यों में उज्ज्वल निकम से लेकर इतिहासकार मीनाक्षी जैन के नाम शामिल

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राज्यसभा के लिए चार नए लोगों को मनोनीत किया है. इसमें पूर्व विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला, 26/11 मुंबई आतंकवादी हमलों के मामले में विशेष लोक अभियोजक उज्ज्वल निकम, केरल भाजपा नेता सी सदानंदन मास्टर और इतिहासकार मीनाक्षी जैन शामिल हैं.

26/11 मुंबई आतंकवादी हमलों के मामले में विशेष लोक अभियोजक उज्ज्वल निकम, केरल भाजपा नेता सी सदानंदन मास्टर, इतिहासकार मीनाक्षी जैन और हर्ष वर्धन श्रृंगला. (फोटो साभार: सोशल मीडिया)

नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राज्यसभा के लिए चार नए लोगों को मनोनीत किया है. इसमें पूर्व विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला, 26/11 मुंबई आतंकवादी हमलों के मामले में विशेष लोक अभियोजक उज्ज्वल निकम, केरल भाजपा नेता सी सदानंदन मास्टर और इतिहासकार मीनाक्षी जैन शामिल हैं.

इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा शनिवार (12 जुलाई) देर रात जारी एक अधिसूचना में कहा गया, ‘भारत के संविधान के अनुच्छेद 80 के खंड (1)(क) और खंड (3) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राष्ट्रपति ने मनोनीत सदस्यों की सेवानिवृत्ति के कारण खाली हुए पदों को भरने के लिए राज्यसभा में इन चारों को नामित किया है.’

मालूम हो कि मनोनीत सदस्यों को वे सभी शक्तियां और विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं, जिसके निर्वाचित सांसद हक़दार होते हैं, लेकिन उन्हें राष्ट्रपति के चुनाव में मतदान करने का अधिकार नहीं होता.

उज्ज्वल देवराज निकम

मूल रूप से महाराष्ट्र के जलगांव ज़िले के रहने वाले उज्ज्वल देवराज निकम एक वरिष्ठ वकील के रूप में जाने जाते हैं. उन्हें 1993 के मुंबई बम विस्फोट मामले से लेकर 2008 मुंबई हमले जैसे महत्वपूर्ण मामलों में विशेष सरकारी वकील नियुक्त किया था. उज्ज्वल निकम ने पहले महाराष्ट्र सरकार और फिर सीबीआई के लिए वकील के रूप में काम किया.

निकम को 2016 में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की टिकट पर मुंबई नॉर्थ सेंट्रल से 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन वह हार गए थे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उज्ज्वल निकम को बधाई देते हुए कहा, ‘उज्ज्वल निकम का क़ानूनी क्षेत्र और हमारे संविधान के प्रति समर्पण अनुकरणीय है. वह न केवल एक सफल वकील रहे हैं, बल्कि महत्वपूर्ण मामलों में न्याय के प्रयासों में भी सबसे आगे रहे हैं.’

उन्होंने कहा, ‘अपने पूरे क़ानूनी करियर के दौरान निकम ने हमेशा संवैधानिक मूल्यों को मज़बूत करने और आम नागरिकों के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार सुनिश्चित करने के लिए काम किया है. यह ख़ुशी की बात है कि राष्ट्रपति ने उन्हें राज्यसभा के लिए मनोनीत किया है. उनकी संसदीय पारी के लिए मेरी शुभकामनाएं.’

हर्ष वर्धन श्रृंगला

1984 बैच के भारतीय विदेश सेवा (आईएफ़एस) अधिकारी हर्ष श्रृंगला क़रीब चार दशक तक अलग-अलग पदों पर रहे हैं. वे भारत के पूर्व विदेश सचिव और वरिष्ठ राजनयिक के रूप में जाने जाते हैं. देश की विदेश नीति और कूटनीति के उनकी अहम भूमिका मानी जाती है.

उन्होंने अमेरिका, थाईलैंड और बांग्लादेश जैसे देशों में भारत के राजदूत या उच्चायुक्त के तौर पर काम किया. जनवरी 2020 से अप्रैल 2022 तक वे भारत के 33वें विदेश सचिव रहे.

इस दौरान उन्होंने कोरोना महामारी, भारत-चीन सीमा तनाव और अफ़ग़ानिस्तान संकट जैसे अहम अंतरराष्ट्रीय मसलों पर भारत की रणनीति का नेतृत्व किया.

वे 2019-20 के दौरान अमेरिका में भारत के राजदूत भी रहे और उन्होंने 2019 में टेक्सस में आयोजित ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के साथ मिलकर काम किया. उन्होंने 2023 में भारत की जी-20 अध्यक्षता के मुख्य समन्वयक के रूप में भी कार्य किया. श्रृंगला एक प्रमुख गोरखा चेहरा हैं, जो दार्जिलिंग की पहाड़ियों से आते हैं.

पीएम मोदी ने श्रृंगला को लेकर कहा है कि उन्होंने एक राजनयिक, बुद्धिजीवी और रणनीतिक विचारक के रूप में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है.

उन्होंने कहा, ‘पिछले कई सालों में उन्होंने भारत की विदेश नीति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और जी-20 की हमारी अध्यक्षता में भी योगदान दिया है. मुझे ख़ुशी है कि उन्हें राष्ट्रपति ने राज्यसभा के लिए मनोनीत किया है. उनका अद्वितीय दृष्टिकोण संसदीय कार्यवाही को और समृद्ध बनाएगा.’

सी. सदानंदन मास्टर

सी. सदानंदन मास्टर एक सेवानिवृत्त स्कूल शिक्षक हैं, जिन्हें हाल ही में केरल भाजपा का उपाध्यक्ष भी बनाया गया है. वे केरल के कन्नूर ज़िले में दो दशक पहले हुई राजनीतिक हिंसा के पीड़ितों में से एक हैं. उनके परिवार की पृष्ठभूमि कम्युनिस्ट विचारधारा की थी लेकिन वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के ज़रिए आरएसएस से जुड़े.

25 जनवरी 1994 को कन्नूर में अपने घर के पास सदानंदन मास्टर पर जानलेवा हमला हुआ, जिसमें उन्होंने अपने दोनों पैर गंवा दिए थे. उन्होंने गुवाहाटी विश्वविद्यालय से बी.कॉम और कालीकट विश्वविद्यालय से बी.एड की डिग्री ली है. पढ़ाने के साथ-साथ वे केरल में नेशनल टीचर्स यूनियन के उपाध्यक्ष भी बने.

2016 और 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें कुथुपरम्बा विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया था, यह वही इलाक़ा है जहां 1990 के दशक में कई राजनीतिक हत्याएं हुई थीं.

प्रधानमंत्री ने सी. सदानंदन मास्टर की तारीफ़ करते हुए उनके जीवन को ‘साहस और अन्याय के आगे न झुकने की भावना का प्रतीक’ बताते हुए कहा, ‘हिंसा और धमकी राष्ट्र के विकास के प्रति उनके जज़्बे को रोक नहीं सकी. एक शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में भी उनके प्रयास सराहनीय हैं. युवा सशक्तीकरण के प्रति उनकी गहरी आस्था है.’

मीनाक्षी जैन

दिल्ली विश्वविद्यालय के गार्गी कॉलेज में इतिहास पढ़ाने वाली डॉ. मीनाक्षी जैन, भारतीय इतिहास, सांस्कृतिक धरोहर और धार्मिक विषयों पर आधारित अपने लेखन और शोध के लिए जानी जाती हैं. उनकी प्रमुख किताबों में सती: एवैंजेलिकल्स, बैपटिस्ट मिशनरीज़ एंड द चेंजिंग कोलोनियल डिस्कोर्स, रामा एंड अयोध्या, पैरलल पाथवेज़ और द फ़्लाइट ऑफ़ डिएटीज़ एंड रीबर्थ ऑफ़ टेम्पल्स आदि शामिल हैं.

डॉ. मीनाक्षी जैन को दिसंबर 2014 में इंडियन काउंसिल ऑफ़ हिस्टोरिकल रिसर्च के सदस्य के रूप में नामित किया गया था. साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें 2020 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था.

पीएम मोदी ने उन्हें बधाई देते हुए कहा है कि यह अत्यंत ख़ुशी की बात है कि मीनाक्षी जैन को राष्ट्रपति ने राज्यसभा के लिए मनोनीत किया है.

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘उन्होंने एक विद्वान, शोधकर्ता और इतिहासकार के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है. शिक्षा, साहित्य, इतिहास और राजनीति विज्ञान के क्षेत्र में उनके कार्यों ने अकादमिक विमर्श को महत्वपूर्ण रूप से समृद्ध किया है. संसदीय कार्यकाल के लिए उन्हें शुभकामनाएं.’

गौरतलब है कि इन चारों व्यक्तियों को राज्यसभा में राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 80 (3) के तहत मनोनीत किया गया है, जो उन व्यक्तियों के लिए होता है जिन्होंने साहित्य, विज्ञान, कला और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में विशेष योगदान दिया हो.