नई दिल्ली: उत्तराखंड में शिक्षकों के एक वर्ग ने स्कूलों में सुबह की प्रार्थना के दौरान भगवद् गीता के कम से कम एक श्लोक का पाठ अनिवार्य करने के राज्य सरकार के फैसले का विरोध किया है और इसे ‘संविधान विरोधी आदेश’ करार दिया है.
द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, अनुसूचित जाति-जनजाति शिक्षक संघ के अध्यक्ष संजय कुमार टम्टा ने बुधवार को देहरादून में संवाददाताओं से कहा, ‘गीता एक धार्मिक ग्रंथ है और स्कूल में धर्म का प्रचार करना संविधान के अनुच्छेद 28(1) के विरुद्ध है.’
उन्होंने आगे कहा, ‘हमने शिक्षा विभाग को इस आदेश को वापस लेने के लिए लिखा है. अन्यथा, हम सरकार को यह याद दिलाने के लिए अदालत जाएंगे कि यह संविधान का उल्लंघन है.’
शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) मुकुल कुमार सती ने मंगलवार को कहा था कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर यह आदेश जारी किया गया है और कहा गया है कि शिक्षकों को छात्रों को श्लोकों के सिद्धांत समझाना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी शिक्षा छात्रों के जीवन और व्यवहार में प्रतिबिंबित हो.
सती ने देहरादून में पत्रकारों से कहा, ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के तहत छात्रों को पारंपरिक भारतीय ज्ञान प्रणाली का आधार सीखना होगा. इसके अनुसार पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तकें तैयार करने के प्रयास चल रहे हैं. मुख्यमंत्री को 6 मई को पाठ्यक्रम की संरचना के बारे में बताया गया था और उन्होंने हमें श्रीमद्भगवद्गीता और रामायण को शामिल करने का निर्देश दिया था.’
संविधान के अनुच्छेद 28 (1) के तहत राज्य निधि से पूर्णतः संचालित किसी भी शैक्षणिक संस्थान में कोई धार्मिक शिक्षा प्रदान नहीं की जाएगी.
टम्टा ने कहा, ‘सरकारी स्कूलों में विभिन्न धर्मों के छात्र पढ़ते हैं और उन्हें किसी खास धर्म की किताब पढ़ने के लिए मजबूर करना नासमझी है. हम पूरे राज्य में इस आदेश का विरोध करेंगे.’
सरकार ने एनसीईआरटी को स्कूली पाठ्यक्रम में भगवदगीता और रामायण को शामिल करने का अनुरोध किया
इस बीच, राज्य के शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने बुधवार को कहा कि राज्य सरकार ने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) से 17,000 सरकारी स्कूलों के पाठ्यक्रम में भगवद गीता और रामायण को शामिल करने का अनुरोध किया है.
रावत ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया, ‘मुख्यमंत्री के साथ शिक्षा विभाग की एक बैठक में हमने एनसीईआरटी को उत्तराखंड के 17,000 सरकारी स्कूलों में पढ़ाए जाने वाले पाठ्यक्रम में भगवद् गीता और रामायण को शामिल करने का काम सौंपा है.’
उन्होंने आगे कहा कि जब तक नया पाठ्यक्रम लागू नहीं हो जाता, तब तक छात्र दैनिक प्रार्थना सत्रों में इन ग्रंथों के श्लोकों का पाठ करेंगे.
द हिंदू के अनुसार, इससे पहले 15 जुलाई को एनसीईआरटी ने ‘वीणा’ नामक एक नई पाठ्यपुस्तक जारी की, जिसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुरूप विकसित किया गया है. इस पुस्तक का उद्देश्य छात्रों को भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों के साथ-साथ इसकी सभ्यता विरासत से जोड़ना है. इसका एक अध्याय, ‘गंगा की कहानी’, गोमुख से गंगासागर तक गंगा की यात्रा का वर्णन करता है, जिसमें हरिद्वार, वाराणसी, प्रयागराज, पटना, कानपुर और कोलकाता जैसे शहर शामिल हैं.
एक अन्य अध्याय, ‘एआई’, छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से परिचित कराता है, यह समझाते हुए कि मशीनें कैसे मनुष्यों की तरह सीखती हैं और समस्याओं का समाधान करती हैं. इसका उद्देश्य मिडिल स्कूल के छात्रों में वैज्ञानिक सोच को प्रोत्साहित करना है. एनसीईआरटी ने कई कक्षाओं के लिए अपडेटेट पाठ्यपुस्तकें जारी करना शुरू कर दिया है. कुछ पुस्तकें पहले ही जारी हो चुकी हैं, जबकि अन्य वर्ष के अंत तक इसकी उम्मीद है.
