दिल्ली: युमना की गुणवत्ता में गिरावट, मल जनित बैक्टीरिया का स्तर तय सीमा से 4,000 गुना अधिक

यमुना के पानी की गुणवत्ता में गिरावट दर्ज की गई है. नदी के पानी में फीकल कोलीफॉर्म (एक प्रकार का बैक्टीरिया जो मुख्य रूप से अनुपचारित सीवेज से उत्पन्न होता है) का स्तर सुरक्षित तय सीमा से 4,000 गुना बढ़ गया है.

प्रयागराज में गंगा और यमुना नदियों के बढ़ते जलस्तर के बीच संगम पर खड़ी नावें, शुक्रवार, 11 जुलाई, 2025. (प्रतीकात्मक तस्वीर: पीटीआई)

नई दिल्ली: यमुना के पानी की गुणवत्ता में पिछले महीने की तुलना इस महीने जुलाई में गिरावट दर्ज की गई है.

रिपोर्ट के अनुसार, नदी के पानी में फीकल कोलीफॉर्म (एक प्रकार का बैक्टीरिया जो मुख्य रूप से अनुपचारित सीवेज से उत्पन्न होता है) का स्तर सुरक्षित तय सीमा से 4,000 गुना बढ़ गया है.

उल्लेखनीय है कि दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) द्वारा जारी एक नई स्टेटस रिपोर्ट में बताया गया है कि पानी में घुलित ऑक्सीजन और जैव रासायनिक ऑक्सीजन मांग (जल गुणवत्ता के दो अन्य महत्वपूर्ण मापदंड) का स्तर भी निर्धारित सुरक्षित सीमा से काफी ऊपर था.

चौंकाने वाला मल जनित कोलीफॉर्म स्तर

मालूम हो कि डीपीसीसी राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशों के अनुसार यमुना नदी के दिल्ली खंड (यह नदी केंद्र शासित प्रदेश में 22 किलोमीटर तक बहती है) में आठ स्थानों पर जल गुणवत्ता की मासिक रिपोर्ट प्रस्तुत करती है.

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई की रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली से होकर बहने वाली यमुना नदी में मल कोलीफॉर्म का स्तर तेज़ी से बढ़ा है.

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा निर्धारित मल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की सुरक्षित सीमा 2,500 एमपीएन (सबसे संभावित संख्या)/100 मिलीलीटर है.

वहीं, रिपोर्ट में कहा गया है कि पल्ला, जहां से यमुना दिल्ली में प्रवेश करती है – जुलाई में मल कोलीफॉर्म का स्तर 2,700 एमपीएन/100 मिलीलीटर (जून में 2,100 से ऊपर) और वज़ीराबाद में 3,900 एमपीएन/100 मिलीलीटर (2,600 से ऊपर) था.

वहीं, आईटीओ ब्रिज पर यह 92,00,000 एमपीएन/100 मिलीलीटर तक पहुंच गया है, जो स्वीकार्य सीमा से 4,000 गुना अधिक है.

रिपोर्ट की मानें, तो नीचे की ओर स्तर अधिकतम तय सीमा से 1,000 गुना अधिक था. आईएसबीटी ब्रिज पर मल कोलीफॉर्म का स्तर 28,00,000; निज़ामुद्दीन ब्रिज पर 11,00,000, ओखला बैराज पर 22,00,000, ओखला के पास आगरा नहर पर 21,00,000 और असगरपुर में 7,90,000 था.

रिपोर्ट के अनुसार, आईटीओ ने इस वर्ष मल कोलीफॉर्म के मामले में सबसे अधिक प्रदूषण स्तर दर्ज किया.

उच्च घुलनशील और जैव रासायनिक ऑक्सीजन स्तर भी

जैव रासायनिक ऑक्सीजन मांग या बीओडी, पानी में कार्बनिक पदार्थों को विघटित करने के लिए आवश्यक ऑक्सीजन की मात्रा है.

रिपोर्ट के अनुसार, पल्ला में बीओडी – जो दिल्ली में इस नदी का प्रवेश स्थान भी है और फिर केंद्र शासित प्रदेश में 22 किलोमीटर तक बहती है – 8 मिलीग्राम/लीटर है, जो केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा निर्धारित 3 मिलीग्राम/लीटर या उससे कम की सुरक्षित सीमा से कहीं अधिक है.

आईटीओ ब्रिज पर जुलाई में यह बढ़कर 70 मिलीग्राम/लीटर हो गया.

जून में उन्हीं स्थानों पर बीओडी का स्तर काफी कम था. रिपोर्ट के अनुसार, पल्ला में यह 5 मिलीग्राम/लीटर, वज़ीराबाद में 8 मिलीग्राम/लीटर, आईएसबीटी में 31 मिलीग्राम/लीटर, आईटीओ ब्रिज पर 46 मिलीग्राम/लीटर, निज़ामुद्दीन में 40 मिलीग्राम/लीटर, ओखला बैराज में 30 मिलीग्राम/लीटर, आगरा नहर में 38 मिलीग्राम/लीटर और असगरपुर में 44 मिलीग्राम/लीटर था.

इस बीच, दिल्ली की यमुना नदी में घुली हुई ऑक्सीजन या डीओ का स्तर भी गिर गया है, जो जलीय जीवन के लिए पानी में उपलब्ध ऑक्सीजन की मात्रा है.

वज़ीराबाद में डीओ का स्तर जून में 6.3 मिलीग्राम/लीटर से गिरकर जुलाई में केवल 3.4 मिलीग्राम/लीटर रह गया, जो न्यूनतम सुरक्षित सीमा से भी कम है. आगे की ओर, ऑक्सीजन का स्तर शून्य हो जाता है, और असगरपुर में यह थोड़ा बढ़कर 0.9 मिलीग्राम/लीटर हो जाता है. रिपोर्ट के अनुसार, “ऑक्सीजन की लगभग पूरी तरह कमी के कारण यमुना का एक बड़ा हिस्सा जलीय जीवों के रहने लायक नहीं रह गया है.”