नई दिल्ली: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) कार्यकर्ताओं और छावा संगठन के सदस्यों के बीच हुई झड़प की कड़ी आलोचना के बाद एनसीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने सोमवार (21 जुलाई) को पार्टी की युवा विंग के प्रमुख सूरज चव्हाण को अपने पद से इस्तीफा देने को कहा.
डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट के अनुसार, यह झड़प रविवार (20 जुलाई) को लातूर में हुई थी, जब छावा संगठन – जो मुख्य रूप से युवाओं का प्रतिनिधित्व करने वाला एक संगठन है – के सदस्यों ने अपने नेता विजय घाटगे के नेतृत्व में महाराष्ट्र एनसीपी इकाई के अध्यक्ष और रायगढ़ के सांसद सुनील तटकरे से भिड़ गए थे.
छावा संगठन के कार्यकर्ताओं ने तटकरे पर ताश के पत्तों की गड्डी फेंकी थी, क्योंकि वे राज्य के कृषि मंत्री माणिकराव कोकाए द्वारा विधानमंडल के अंदर ‘जंगली रम्मी’ नामक एक ऑनलाइन ताश का खेल खेलते हुए एक वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे.
इस घटना के बाद एनसीपी कार्यकर्ताओं ने छावा संगठन के सदस्यों पर कथित तौर पर हमला किया, जिसमें पार्टी की युवा शाखा के प्रमुख चव्हाण भी शामिल थे.
एनसीपी प्रमुख पवार ने एक्स पर पोस्ट किया, ‘लातूर में कल हुई एक अत्यंत गंभीर और निंदनीय घटना की पृष्ठभूमि में मैंने राष्ट्रवादी युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सूरज चव्हाण को तुरंत अपने पद से इस्तीफा देने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं.’
इस बीच, चव्हाण ने माफ़ी भी मांगी है.
हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, पवार ने इस घटना को निंदनीय बताते हुए आगे कहा कि यह सख्त फैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि चव्हाण का व्यवहार पार्टी के मूल्यों के खिलाफ है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
एनसीपी प्रमुख ने ज़ोर देकर कहा कि वह किसी भी प्रकार की हिंसा, अभद्र व्यवहार या असंसदीय भाषा के इस्तेमाल के ख़िलाफ़ हैं.
उन्होंने कहा, ‘हम समाज के हर वर्ग की जायज़ मांगों और भावनाओं का ईमानदारी से सम्मान करते हैं. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की पहचान छत्रपति शिवाजी महाराज, शाहू महाराज, महात्मा फुले और डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर के लोकतांत्रिक, समतावादी और भ्रातृत्वपूर्ण आदर्शों पर आधारित है.’
पवार ने कहा कि उन्होंने अपने पार्टी कार्यकर्ताओं से सार्वजनिक जीवन में लोकतंत्र, शांति और अहिंसा के मूल्यों को हमेशा बनाए रखने को कहा है.
बताया जाता है कि 1990 में स्थापित मराठा युवा संगठन छावा का समुदाय में काफ़ी प्रभाव है. मराठा और बहुजन समुदायों के सदस्यों के बीच इसकी मज़बूत पकड़ का श्रेय विभिन्न मुद्दों पर समूह के आक्रामक रुख को दिया जाता है. यह समूह किसानों और मराठा समुदाय से संबंधित हिंसक विरोध प्रदर्शनों में भी शामिल रहा है.
राज्य भर में मराठा समुदाय में छावा के प्रभाव को देखते हुए इसके नेताओं पर हमला आगामी चुनावों में एनडीए गठबंधन की संभावनाओं को नुकसान पहुंचा सकता है.
