कर्नाटक के धर्मस्थल के धर्माधिकारी वीरेंद्र हेगड़े के भाई हर्षेंद्र कुमार डी. ने एक सफाई कर्मचारी द्वारा लगाए गए आरोपों की कवरेज से संबंधित 8,842 लिंक को हटाने/डी-इंडेक्स करने के लिए एकपक्षीय निषेधाज्ञा (ex parte injunction) प्राप्त की है. कर्मचारी द्वारा लगाए गए आरोपों के अनुसार, उन्होंने धर्मस्थल में कई शवों को दफनाया है. इन लिंक में अखबारों, टीवी चैनलों, वेबसाइटों और यूट्यूबर्स द्वारा इन आरोपों को लेकर की गई कवरेज शामिल है.
हर्षेंद्र द्वारा दायर याचिका में कई ट्वीट, फेसबुक पोस्ट और व्यक्तियों द्वारा किए गए रेडिट थ्रेड का भी उल्लेख किया गया है.
बेंगलुरु की एक अदालत ने अगली सुनवाई तक हर्षेंद्र, उनके परिवार के सदस्यों, वादी के परिवार द्वारा संचालित संस्थानों और श्री मंजूनाथस्वामी मंदिर, धर्मस्थल के ख़िलाफ़ किसी भी मानहानिकारक सामग्री और जानकारी के प्रकाशन, प्रसार, शेयर, अपलोड और प्रसारण पर रोक लगाने का भी आदेश जारी किया है.
दसवीं अतिरिक्त नगर दीवानी एवं सत्र न्यायालय के न्यायाधीश विजय कुमार राय ने कहा कि अदालत पूरी तरह से संतुष्ट है कि वादी ने एकपक्षीय आदेश देने के लिए प्रथम दृष्टया एक मजबूत मामला प्रस्तुत किया है. आदेश में कहा गया है, ‘इसके अलावा सुविधा का संतुलन वादी के पक्ष में है और यदि एकपक्षीय अस्थायी निषेधाज्ञा का आदेश नहीं दिया जाता है, तो वादी को अपूरणीय क्षति और कठिनाई होगी.’
हालांकि, हर्षेंद्र ने अपनी याचिका में 338 संगठनों और व्यक्तियों के नाम लिए हैं, लेकिन उन्होंने जॉन डो आदेश (John Doe order) पर ज़ोर दिया, जिसे न्यायाधीश ने स्वीकार कर लिया. जॉन डो आदेश का अर्थ है कि यह प्रतिबंध नामित और अनामित पक्षों पर लागू होगा.
हर्षेंद्र ने 18 जुलाई को याचिका दायर की थी और उसी दिन निषेधाज्ञा आदेश भी जारी कर दिया गया था.
संगीन आरोप
देश भर के मीडिया संस्थान सफाई कर्मचारी की शिकायत और उससे जुड़ी कानूनी प्रक्रियाओं पर रिपोर्टिंग कर रहे हैं. अपनी शिकायत में सफाई कर्मचारी ने कहा कि वह मंदिर में काम करता है, लेकिन उसने किसी भी अपराध के लिए ज़िम्मेदार किसी व्यक्ति का नाम नहीं लिया. हालांकि, उसने यह ज़रूर बताया कि ‘सुपरवाइजर’ ने उसे शवों को दफनाने के लिए धमकाया और मजबूर किया.
धर्मस्थल मंदिर के कर्मचारियों को पहले भी इसी तरह का एक जॉन डो आदेश प्राप्त हुआ था.
हर्षेंद्र ने 8,842 लिंक सूचीबद्ध किए हैं, जिनमें 4,140 यूट्यूब वीडियो, 932 फेसबुक पोस्ट, 3,584 इंस्टाग्राम पोस्ट, 108 समाचार लिंक, 37 रेडिट पोस्ट और 41 ट्वीट शामिल हैं. निषेधाज्ञा आदेश में द न्यूज़ मिनट द्वारा निर्मित पांच वीडियो, जिनमें ‘लेट मी एक्सप्लेन’ के दो एपिसोड शामिल हैं, का भी उल्लेख किया गया है.
इस सूची में थर्ड आई, धूत, समीर एमडी और डीटॉक्स शामिल हैं, जिन्होंने यूट्यूब वीडियो डाले हैं. सूची में कुछ मीडिया संगठन हैं: द न्यूज मिनट, डेक्कन हेराल्ड, द हिंदू, द न्यू इंडियन एक्सप्रेस, टाइम्स ऑफ इंडिया, इंडियन एक्सप्रेस, प्रजावाणी, कन्नड़ प्रभा, होसा दिगंथा, बैंगलोर मिरर, उदयवाणी, दिनमणि, दीना थांथी, दिनाकरन, संयुक्त कर्नाटक, विजयवाणी, विश्ववाणी, केरल कौमुदी, राजस्थान पत्रिका, ईसंजे, संजीवनी, दिनसुधर, सन्मार्ग, हिंदुस्तान टाइम्स, पीटीआई, एएनआई और आईएएनएस, मातृभूमि, मलयाला मनोरमा, न्यूज 18, टीवी9 ग्रुप, इंडिया टीवी, न्यूज एक्स, सुवर्णा, न्यूज फर्स्ट और डाइजी वर्ल्ड टीवी.
अपनी याचिका में हर्षेंद्र ने तर्क दिया कि श्री मंजूनाथस्वामी मंदिर, श्री क्षेत्र धर्मस्थल, एजुकेशनल सोसाइटी द्वारा संचालित संस्थान, धर्मस्थल मंदिर द्वारा स्थापित संगठन, वादी डी. वीरेंद्र हेगड़े के बड़े भाई और परिवार के सदस्य मीडिया घरानों द्वारा प्रकाशित ‘झूठी और मनगढ़ंत’ सामग्री से प्रभावित हो रहे हैं.
याचिका में कहा गया है, ‘मैं यह कहना चाहता हूं कि यदि वादी, उनके बुजुर्ग और उनके परिवार के सदस्यों, मंदिर और उनके द्वारा संचालित संस्थानों के खिलाफ बिना किसी आधार के कोई भी लापरवाही भरा आरोप लगाया जाता है तो उनकी अमूल्य प्रतिष्ठा प्रभावित होगी.’
हर्षेंद्र ने न्यायाधीश से अनुरोध किया कि अगली सुनवाई तक हर्षेंद्र, उनके परिवार के सदस्यों, उनके परिवार द्वारा संचालित संस्थाओं और श्री मंजूनाथस्वामी मंदिर, धर्मस्थल का उल्लेख डिजिटल मीडिया, जिसमें यूट्यूब चैनल और सभी सोशल मीडिया या किसी भी प्रकार का प्रिंट मीडिया में न किया जाए.
आदेश देते हुए न्यायाधीश ने कहा, ‘अदालत इस तथ्य की अनदेखी नहीं कर सकती कि यद्यपि प्रत्येक नागरिक की प्रतिष्ठा अत्यंत महत्वपूर्ण है, फिर भी जब किसी संस्थान और मंदिर के विरुद्ध कोई आरोप लगाया जाता है, तो इसका प्रभाव व्यापक वर्ग के लोगों पर पड़ता है, जिनमें विभिन्न कॉलेजों और स्कूलों में पढ़ने वाले कर्मचारी और छात्र भी शामिल हैं. इसलिए, एक भी झूठा और अपमानजनक प्रकाशन संस्थान के कामकाज को गंभीर रूप से प्रभावित करेगा.’
याचिका में नामित यूट्यूब पोर्टल थर्ड आई ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और तर्क दिया है कि यह आदेश अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन करता है तथा इसे रद्द करने की मांग की है.
(यह लेख मूलतः द न्यूज़ मिनट पर प्रकाशित हुआ था.)
