नई दिल्ली: गुरुवार (24 जुलाई) शाम जम्मू शहर में पुलिस और नशा तस्करों के बीच हुई गोलीबारी में गुर्जर समुदाय के एक युवक की मौत हो जाने से बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. मृतक के परिवार ने घटना को फर्जी मुठभेड़ बताते हुए हत्या का आरोप लगाया है. जिसके बाद प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है.
द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, जम्मू के निक्की तवी निवासी 21 वर्षीय मोहम्मद परवेज़ गुरुवार रात पुलिस और ‘संदिग्ध नशा तस्करों’ के बीच हुई गोलीबारी में कथित तौर पर घायल हो गया. परवेज़ को जम्मू मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया.
इसके बाद देर रात अस्पताल के बाहर परिजनों ने विरोध प्रदर्शन किया और पुलिस पर परवेज़ को नशेड़ी बताकर उसकी निर्मम हत्या करने का आरोप लगाया.
परवेज़ के परिवार ने उस पर मादक पदार्थ तस्कर होने के आरोप को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि वह और उसका साला दवाइयां लेने बाज़ार गए थे.
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, ‘विशेष शाखा की एक टीम ने एक संदिग्ध ड्रग अड्डे पर छापा मारा था. कुछ लोगों ने उन पर गोलीबारी की और झड़प के दौरान गोली चल गई, जिससे एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसकी बाद में मौत हो गई.’
हालांकि, पुलिस के बयान को संदेह और कड़ी निंदा का सामना करना पड़ा है. गुरुवार शाम जम्मू के सरकारी मेडिकल कॉलेज के बाहर विरोध प्रदर्शन हुए, जहां कई नेता और स्थानीय लोग न्याय की मांग के लिए इकट्ठा हुए.
दो पुलिसकर्मी निलंबित
द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार देर रात दो पुलिसकर्मियों – हेड कांस्टेबल बलजिंदर सिंह और कांस्टेबल पवन सिंह – को निलंबित कर दिया गया और उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए. साथ ही, घटना की मजिस्ट्रेट जांच भी शुरू कर दी गई.
जम्मू पुलिस ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि वे परवेज़ और उसके साथी का पीछा कर रहे थे या वह ड्रग तस्करों के साथ क्रॉस-फायरिंग का शिकार हुआ था.
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने हत्या की आलोचना करते हुए एक्स पर कहा, ‘जम्मू के निकी तवी निवासी मोहम्मद परवेज़ की हत्या बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और बेहद खेदजनक है. पुलिस द्वारा बल प्रयोग सोच-समझकर किया जाना चाहिए और अंधाधुंध नहीं होना चाहिए. जम्मू-कश्मीर ने अतीत में ऐसी घटनाओं की भारी कीमत चुकाई है. इस घटना की पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से जांच होनी चाहिए. मोहम्मद परवेज़ के परिवार के प्रति मेरी संवेदनाएं.’
इस बीच, पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती ने कहा कि कल पुलिस ने एक आदिवासी युवक की हत्या कर दी. उन्होंने कहा, ‘अब उस पर ड्रग डीलर होने का ठप्पा लगा दिया गया है. अगर ऐसा हो भी, तो भी हम एक लोकतांत्रिक देश में रहते हैं जहां खाप पंचायतों या कंगारू अदालतों के बजाय कानून के शासन से न्याय होता है. मुझे पूरी उम्मीद है कि पुलिस महानिदेशक इस चौंकाने वाली घटना का संज्ञान लेते हुए समयबद्ध निष्पक्ष जांच का आदेश देंगे.’
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भाजपा के जम्मू-कश्मीर उपाध्यक्ष और पूर्व मंत्री चौधरी जुल्फिकार अली ने भी न्यायिक जांच की मांग की. उन्होंने कहा, ‘गुर्जर समुदाय के प्रमुख सदस्यों का दावा है कि मृतक का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था. इस घटना से समुदाय में गहरा आक्रोश है. अधिकारियों को निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करनी चाहिए.’
एक अन्य गुर्जर नेता तालिब हुसैन ने इसे ‘फर्जी मुठभेड़’ करार दिया और कहा कि परवेज़ के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं थी. उन्होंने कहा, ‘अगर वह दोषी था, तो उसे गिरफ्तार किया जाना चाहिए था और अदालत में मुकदमा चलाया जाना चाहिए था. उसे मारना न्याय नहीं है.’
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मादक पदार्थों की तस्करी और पशु तस्करी के खिलाफ कार्रवाई की आड़ में गुर्जर तेजी से निशाना बन रहे हैं.
कैबिनेट मंत्री जावेद अहमद राणा ने कहा कि उन्होंने जम्मू के आईजीपी भीम सेन टूटी और संभागीय आयुक्त रमेश कुमार से बात की है. उन्होंने कहा, ‘घटना की जांच की जा रही है, लेकिन इस तरह की हत्याएं अस्वीकार्य हैं.’
