छत्तीसगढ़: बजरंग दल द्वारा ‘धर्मांतरण’ का आरोप लगाए जाने के बाद दो नन समेत तीन गिरफ़्तार

छत्तीसगढ़ पुलिस ने बजरंग दल के सदस्यों के विरोध प्रदर्शन के बाद दुर्ग रेलवे स्टेशन पर 18-19 साल की तीन महिलाओं के साथ जाते समय दो नन और एक आदमी को धर्मांतरण के आरोप में गिरफ़्तार किया है. ईसाई समुदाय ने इन गिरफ़्तारियों की कड़ी निंदा की है.

नई दिल्ली में छत्तीसगढ़ के ईसाई आदिवासियों पर कथित हमले के खिलाफ प्रदर्शन. (फाइल फ़ोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ पुलिस ने बजरंग दल के सदस्यों के विरोध प्रदर्शन के बाद शनिवार (26 जुलाई) को छत्तीसगढ़ के दुर्ग रेलवे स्टेशन पर असीसी सिस्टर्स ऑफ मैरी इमैक्युलेट (एएसएमआई) की दो कैथोलिक ननों को गिरफ्तार किया.

इन दोनों नन और उनके साथ एक युवक को उस समय गिरफ्तार किया गया जब वे सभी नारायणपुर जिले की 18 से 19 साल की तीन महिलाओं के साथ जा रहे थे.

युवक की पहचान नारायणपुर निवासी सुखमन मंडावी के रूप में हुई है. उन्हें मूल केरल की निवासी दो ननों – प्रीति मैरी और वंदना फ्रांसिस – के साथ गिरफ्तार किया गया है.

द न्यूज मिनट की रिपोर्ट के अनुसार, उन पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और छत्तीसगढ़ धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 1968 के तहत मानव तस्करी और धर्मांतरण सहित अन्य अपराधों के आरोप लगाए गए हैं.

टीएनएम की रिपोर्ट में कहा गया है कि रायपुर आर्चडायोसिस के विकर जनरल फादर सेबेस्टियन पूमाट्टम के अनुसार, नन इन महिलाओं को घरेलू काम के लिए आगरा के कॉन्वेंट में रखने के लिए उनके साथ जा रही थीं.

फादर पूमाट्टम ने कहा, ‘इन महिलाओं को 8,000 से 10,000 रुपये मासिक वेतन पर रसोई सहायक के रूप में नौकरी की पेशकश की जा रही थी. उनके पास अपने माता-पिता के सहमति पत्र थे और सभी की उम्र 18 वर्ष से अधिक थी.’

बजरंग दल के सदस्यों का यह विरोध प्रदर्शन तब हुआ जब एक टीटीई ने समूह से पूछताछ की और रेलवे पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया.

फादर पूमट्टम ने कहा, ‘युवतियां और एक पुरुष उस प्लेटफॉर्म पर पहुंचे जहां नन इंतज़ार कर रही थीं. परीक्षक ने उनके टिकट के बारे में पूछा और उन्होंने कहा कि वे ननों के पास हैं. इसके तुरंत बाद परीक्षक ने स्थानीय बजरंग दल के सदस्यों को सूचित किया, जो कुछ ही मिनटों में बड़ी संख्या में वहां पहुंच गए.’

बजरंग दल के सदस्यों के आग्रह पर तीनों लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद महिलाओं को सरकारी आश्रय गृह भेज दिया गया, जबकि दो ननों और उस व्यक्ति को 18 अगस्त तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.

दिल्ली स्थित कॉन्ग्रिगेशन ऑफ द होली फैमिली की नन- सिस्टर आशा पॉल ने आरोप लगाया कि हिरासत में ली गई ननों से चर्च के किसी भी प्रतिनिधि को मिलने नहीं दिया गया और यह संदेह करने का कारण है कि युवतियों को अपना बयान बदलने के लिए मजबूर किया गया ताकि वे कह सकें कि उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध ले जाया जा रहा है.

सिस्टर पॉल ने कहा, ‘हमारे पास माता-पिता की सहमति के सभी प्रमाण, पहचान पत्र और दस्तावेज मौजूद हैं, जो यह साबित करते हैं कि इसमें कोई बल प्रयोग या धर्मांतरण शामिल नहीं था.’

ईसाई समुदाय ने गिरफ्तारियों की निंदा की

इस घटना के बाद ईसाई समुदाय के सदस्यों ने गिरफ्तारियों की कड़ी निंदा की है.

टीएनएम की रिपोर्ट में घटना के बाद एक पादरी के हवाले से कहा गया है, ‘ननों को मनगढ़ंत आरोपों में गिरफ्तार किया गया है. यह एक और उदाहरण है. भीड़ द्वारा हिंसा, पुलिस के खिलाफ मामले और चर्च द्वारा संचालित संस्थानों पर हमले चिंताजनक रूप से लगातार हो रहे हैं. भाजपा शासित राज्य सरकारों की चुप्पी या मिलीभगत ने ऐसे समूहों को और बढ़ावा दिया है.’

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने केंद्रीय गृह मंत्री और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सख्त कार्रवाई की मांग की है.

वेणुगोपाल द्वारा लिखे गए पत्र में कहा गया है, ‘यह बेहद परेशान करने वाला है कि स्वयंभू निगरानीकर्ता सांप्रदायिक तनाव भड़का सकते हैं और बिना किसी कानूनी आधार के धर्मांतरण और मानव तस्करी के बेबुनियाद आरोप लगा सकते हैं. स्पष्ट दस्तावेज़ों और माता-पिता की सहमति के बावजूद अधिकारियों ने कथित तौर पर राजनीतिक दबाव में ननों और उस व्यक्ति को हिरासत में रखने का फैसला किया है. यह स्पष्ट रूप से न्याय की अवहेलना और अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों पर हमला है.’

कांग्रेस नेता और सासंद प्रियंका गांधी ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह कोई अकेला मामला नहीं है – भाजपा शासन में अल्पसंख्यकों को व्यवस्थित रूप से परेशान और बदनाम किया जा रहा है.

उन्होंने एक्स पर पोस्ट में कहा, ‘मैं 25 जुलाई को छत्तीसगढ़ के दुर्ग रेलवे स्टेशन पर हुई चौंकाने वाली घटना की कड़ी निंदा करती हूं. दो ईसाई ननों – सिस्टर वंदना और सिस्टर प्रीति – को अन्य लोगों के साथ बिना किसी कानूनी आधार के और धर्मांतरण व मानव तस्करी के झूठे आरोपों में हिरासत में लेना, अल्पसंख्यक अधिकारों पर एक गंभीर हमला है.’

उन्होंने कहा कि भीड़तंत्र और सांप्रदायिक भेदभाव का हमारे लोकतंत्र में कोई स्थान नहीं है. कानून का शासन कायम रहना चाहिए.

इस बीच, केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने भी रविवार को दोनों ननों को न्याय दिलाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी से हस्तक्षेप करने की मांग की.

प्रधानमंत्री को लिखे एक पत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि मैरी और फ्रांसिस को उस समय गिरफ्तार किया गया जब वे अपने कॉन्वेंट में काम करने आ रही महिलाओं को लेने गए थे.