नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (28 जून) को मध्य प्रदेश के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मंत्री कुंवर विजय शाह को ऑपरेशन सिंदूर के बाद कर्नल सोफिया कुरैशी पर की गई टिप्पणी, जिसमें उन्होंने उनकी मुस्लिम पहचान का हवाला देते हुए उन्हें ‘आतंकवादियों की बहन’ कहा था, के लिए उचित माफी मांगने में विफल रहने पर फटकार लगाई.
लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस सूर्यकांत ने शाह के वकील से कहा, ‘इस तरह की माफ़ी से आपका क्या मतलब है? यह आदमी हमारे धैर्य की परीक्षा ले रहा है… पहली तारीख को उन्होंने यही बयान दिया था… यह रिकॉर्ड में कहां है? यह (ऑनलाइन माफ़ी) उनके इरादों को दर्शाता है, जिससे हमें उसकी ईमानदारी पर और शक होता है…’
जस्टिस कांत ने यह टिप्पणी उस समय की जब जस्टिस जयमाला बागची और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ शाह द्वारा दायर दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी.
एक याचिका में शाह ने अपने खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के स्वतः संज्ञान आदेश को चुनौती दी है. दूसरी याचिका उच्च न्यायालय के 15 मई के आदेश के खिलाफ है, जिसमें संबंधित पीठ ने शाह के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर असंतोष व्यक्त किया था और कहा था कि वह निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए इसकी निगरानी करेगी.
अदालत ने इससे पहले शाह के खिलाफ एफआईआर की जांच के लिए मध्य प्रदेश राज्य से बाहर के तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया था. पीठ ने सोमवार को एसआईटी के एक सदस्य से जांच पूरी करने के लिए आवश्यक समय के बारे में पूछा.
मई में शीर्ष अदालत ने शाह की टिप्पणी के लिए उन्हें फटकार लगाते हुए कहा था कि पूरा देश उनसे शर्मिंदा है.
मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और लोकसभा सांसद शाह ने कर्नल कुरैशी के खिलाफ अपमानजनक, सांप्रदायिक टिप्पणी की थी, जो विंग कमांडर व्योमिका सिंह के साथ ऑपरेशन सिंदूर पर प्रेस ब्रीफिंग के चेहरों में से एक थीं.
मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री कुंवर विजय शाह ने उनकी मुस्लिम पहचान का हवाला देते कर्नल सोफिया कुरैश को ‘आतंकवादियों की बहन’ कहा था.
उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा था, ‘जिन्होंने हमारी बेटियों के सिंदूर उजाड़े, उन्हीं कटे-पिटे लोगों को उन्हीं की बहन भेजकर उनकी ऐसी-तैसी करवाई. उन्होंने कपड़े उतार-उतारकर हिंदुओं को मारा और मोदी जी ने उनकी बहन को उनकी ऐसी-तैसी करने के लिए हमारे जहाज से उनके घर भेजा.’
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 14 मई को मंत्री के खिलाफ स्वतः संज्ञान लेते हुए मामला शुरू किया था. अदालत ने कर्नल कुरैशी के खिलाफ उनकी अपमानजनक टिप्पणी पर तत्काल आपराधिक मामला दर्ज करने का आदेश दिया था, जिसमें कहा गया था कि उनकी टिप्पणी ‘न केवल संबंधित अधिकारी के लिए बल्कि सशस्त्र बलों के लिए भी अपमानजनक और खतरनाक है.’
