महाराष्ट्र: स्वतंत्रता दिवस पर मांस प्रतिबंध को लेकर विवाद, अजित पवार व ओवैसी ने निंदा की

महाराष्ट्र के कल्याण-डोंबिवली, मालेगांव, छत्रपति संभाजी नगर और नागपुर नगर निगमों ने स्वतंत्रता दिवस पर मांस बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया, जिसे लेकर राजनीतिक विवाद छिड़ गया है. उपमुख्यमंत्री और एनसीपी प्रमुख अजित पवार ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस या महाराष्ट्र दिवस जैसे दिनों में मांस की दुकानें बंद करना सही नहीं है.

(फोटो साभार: एक्स/@@AjitPawarSpeaks)

नई दिल्ली: महाराष्ट्र के कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (केडीएमसी) द्वारा हाल ही में स्वतंत्रता दिवस पर मांस की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी करने के बाद मंगलवार को मालेगांव, छत्रपति संभाजी नगर और नागपुर नगर निगमों ने भी ऐसा ही किया. इस कदम को लेकर राज्य में राजनीतिक विवाद छिड़ गया है और इस प्रतिबंध को लोगों की खान-पान की आदतों पर नकेल कसने वाला बताया.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस कदम की विपक्ष ने आलोचना की और शिवसेना (यूबीटी) ने इसे ‘शाकाहार थोपना’ बताया, जबकि सत्तारूढ़ गठबंधन के सदस्यों की प्रतिक्रियाएं विभाजित रहीं- जहां राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने इस पर सवाल उठाए, वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसका समर्थन किया और कहा कि पिछली सरकारों ने भी इसी तरह के प्रतिबंध लागू किए थे.

तीनों शहरों द्वारा मंगलवार को नोटिस जारी करने के बाद उपमुख्यमंत्री और एनसीपी प्रमुख अजित पवार ने कहा, ‘स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस या महाराष्ट्र दिवस जैसे दिनों में मांस की दुकानें बंद करना सही नहीं है.’

पवार ने तर्क दिया कि चूंकि ये दिन धार्मिक त्योहारों के लिए नहीं होते, इसलिए भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचेगी. उन्होंने यह भी कहा कि कोंकण क्षेत्र के कुछ समुदाय सूखी मछली के साथ सब्ज़ियां मिलाकर व्यंजन बनाने के लिए जाने जाते हैं.

उन्होंने कहा, ‘अगर यह आषाढ़ी एकादशी या महावीर जयंती के दिन होता, तो यह प्रतिबंध समझ में आता. लेकिन जब ऐसा कोई अवसर ही नहीं है, तो मांस की दुकानों को बंद रखने के लिए क्यों मजबूर किया जा रहा है? हमारे देश में सदियों से लोग शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरह के भोजन का सेवन करते आ रहे हैं.’

उन्होंने आगे कहा कि ‘ग्रामीण इलाकों और आदिवासी समुदायों के लोग वास्तव में छुट्टियों के दिनों में मांसाहारी भोजन का आनंद लेते हैं.’

15 अगस्त को मांसाहारी भोजन करने की पुष्टि करते हुए शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने कहा, ‘नगर निगम आयुक्तों को निलंबित कर देना चाहिए. उन्हें लोगों को यह बताने का कोई अधिकार नहीं है कि उन्हें क्या खाना चाहिए. अगरी और कोली जैसे समुदायों के लोग, जो नियमित रूप से मांसाहारी भोजन करते हैं, क्या करेंगे? हमारे जैसे कई हिंदू समुदायों में नवरात्रि के दौरान हम देवी दुर्गा को मांसाहारी भोजन का भोग लगाते हैं.’

उन्होंने महाराष्ट्र पर शाकाहार थोपने पर सवाल उठाया और कहा कि, जबकि हिंदू धर्म लोगों को अपने भोजन समूह चुनने का विकल्प देता है.

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के नेता बाला नंदगांवकर ने सरकार से ‘यह निर्णय वापस लेने’ की अपील की, जबकि कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने इसे ‘सड़कों की खराब स्थिति, यातायात जाम और प्रदूषण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों से लोगों का ध्यान हटाने के लिए’ सरकार की चाल बताया.

वहीं, एनसीपी (शरद पवार) नेता जितेंद्र आव्हाड घोषणा की कि वह 15 अगस्त को भोजन संबंधी ‘स्वतंत्रता’ का दावा करने के लिए मटन पार्टी आयोजित करेंगे.

उन्होंने एक्स पर कहा, ‘जिस दिन हमें आज़ादी मिली, उसी दिन आप हमसे अपनी पसंद का खाना खाने की आज़ादी छीन रहे हैं. यह तो हद हो गई. आप कौन होते हैं यह तय करने वाले कि लोग क्या और कब खाएंगे?’

जितेंद्र आव्हाड की घोषणा और ठाकरे के हमले के जवाब में भाजपा ने 12 मई, 1988 का एक राज्य सरकार का आदेश जारी किया, जिसने सभी नगर निगमों को स्वतंत्रता दिवस, महावीर जयंती आदि पर मांस की दुकानें बंद करने का अधिकार दिया था.

भाजपा प्रवक्ता नवनाथ बान ने एक्स पर पोस्ट किया: ‘1988 में कांग्रेस शासन के दौरान स्वतंत्रता दिवस पर मांस की दुकानें बंद कर दी गई थीं. इसके अलावा, 2021 में महाविकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार के दौरान नागपुर नगर निगम ने स्वतंत्रता दिवस पर पालन करने के लिए ऐसा ही आदेश जारी किया था. ये नेता उस समय चुप क्यों थे, और अब विवाद क्यों भड़का रहे हैं?’

ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम ने स्वतंत्रता दिवस, जन्माष्टमी पर बूचड़खाने और मांस की दुकानें बंद रखने का आदेश दिया

हैदराबाद के सांसद और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम द्वारा 15 और 16 अगस्त- स्वतंत्रता दिवस और जन्माष्टमी – को बूचड़खाने और मांस की दुकानें बंद रखने के आदेश की आलोचना की है.

उन्होंने एक्स पर पोस्ट में कहा, ‘ऐसा लगता है कि भारत भर के कई नगर निगमों ने 15 अगस्त को बूचड़खाने और मांस की दुकानें बंद रखने का आदेश दिया है. दुर्भाग्य से @GHMCOnline ने भी ऐसा ही आदेश दिया है. यह कठोर और असंवैधानिक है.’

ओवैसी ने कहा, ‘मांस खाने और स्वतंत्रता दिवस मनाने के बीच क्या संबंध है? तेलंगाना के 99% लोग मांस खाते हैं. ये मांस प्रतिबंध लोगों के स्वतंत्रता, निजता, आजीविका, संस्कृति, पोषण और धर्म के अधिकार का उल्लंघन करते हैं.’