श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप में गिरफ़्तार

श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे को शुक्रवार (22 अगस्त) को 'सरकारी धन का दुरुपयोग' करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया. यह आरोप राष्ट्रपति पद पर रहते हुए उनकी विदेश यात्राओं से संबंधित है. उन्होंने आरोपों का खंडन किया है. विक्रमसिंघे 2022 से 2024 तक राष्ट्रपति रहे थे.

रानिल विक्रमसिंघे. (फोटो साभार: ट्विटर)

नई दिल्ली: श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे को शुक्रवार (22 अगस्त) को ‘सरकारी धन का दुरुपयोग’ करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया.

बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, यह आरोप राष्ट्रपति पद पर रहते हुए उनकी विदेश यात्राओं से संबंधित है.

रिपोर्ट के अनुसार, वह शुक्रवार को राजधानी कोलंबो की मजिस्ट्रेट अदालत में पेश हुए, जहां उन्होंने क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन्स डिपार्टमेंट (सीआईडी) को बयान दिया.

राष्ट्रपति के पद पर रहते हुए विक्रमसिंघे ने 23 विदेश यात्राएं कीं, जिन पर 60 करोड़ श्रीलंकाई रुपये से अधिक का खर्च हुए.

समाचार एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार की गिरफ्तारी 2023 में क्यूबा में जी-77 शिखर सम्मेलन से लौटते समय विक्रमसिंघे के ब्रिटेन में ठहरने से संबंधित है. उस अवसर पर वह और उनकी पत्नी वॉल्वरहैम्प्टन विश्वविद्यालय के एक समारोह में शामिल हुए थे.

श्रीलंका की सीआईडी ​​का आरोप है कि यह एक निजी यात्रा थी, जिसके लिए सरकारी धन का इस्तेमाल किया गया था. इस साल जून में इस मामले की जांच एक अदालत ने शुरू की थी.

विक्रमसिंघे ने आरोपों से किया इनकार

विक्रमसिंघे ने आरोपों का खंडन किया है. उन्होंने कहा है कि उनकी पत्नी ने अपनी यात्रा का खर्च खुद उठाया और उनकी यात्रा के लिए किसी सरकारी धन का इस्तेमाल नहीं किया गया

बता दें कि विक्रमसिंघे 2022 से 2024 तक राष्ट्रपति रहे. वह श्रीलंका में गंभीर आर्थिक संकट के दौरान राष्ट्रपति बने थे. देश के बिगड़ते आर्थिक हालातों के बीच देश की जनता महीनों से प्रदर्शन की थी, इन्हीं प्रदर्शनों के चलते पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे को देश छोड़कर भागना और इस्तीफा देना पड़ा था. उस दौरान रानिल विक्रमसिंघे प्रधानमंत्री थे. प्रदर्शनकारियों ने उनके खिलाफ भी खूब प्रदर्शन किए थे, जिनके चलते उन्होंने भी अपने इस्तीफे की पेशकश की थी.

श्रीलंका को आर्थिक सुधार की राह पर वापस लाने में मदद करने का श्रेय उन्हें रूप से दिया जाता है. विक्रमसिंघे ने 1990 के दशक से छह अलग-अलग कार्यकालों में प्रधानमंत्री के रूप में भी काम किया.

विक्रमसिंघे, जो श्रीलंका में गिरफ़्तार होने वाले पहले पूर्व राष्ट्रपति हैं, 1977 में पहली बार सांसद चुने जाने के बाद से ही इस श्रीलंका की राजनीति का एक अभिन्न अंग रहे हैं.

पेशे से वकील, वह राजनेताओं और व्यापारियों के एक संपन्न परिवार से आते हैं.

1994 में यूनाइटेड नेशनल पार्टी (यूएनपी) का नेतृत्व संभालने के बाद भ्रष्ट पार्टी सदस्यों से छुटकारा पाने के लिए उन्होंने एक अनुशासन आयोग का गठन किया था। इससे उनकी पार्टी की छवि में सुधार आया था।

पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने राष्ट्रपति बनने के लिए कई प्रयास किए, लेकिन मौका 2022 में राजपक्षे के भाग जाने के बाद मिला. उस समय 2020 के चुनावों में उनकी पार्टी का लगभग सफाया हो गया था और संसद में वे इसके एकमात्र प्रतिनिधि रह गए थे.

2024 के राष्ट्रपति चुनाव में विक्रमसिंघे तीसरे नंबर पर रहे थे और श्रीलंका की जनता ने एक साधारण ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले वामपंथी नेता अनुरा कुमारा दिसानायके को अपना नया राष्ट्रपति चुना था. दिसानायके, जनता विमुक्ति पेरामुना (जेवीपी) के नेता है, जो मार्क्सवादी-लेनिनवादी जड़ों वाली पार्टी है. वह राष्ट्रपति चुनाव में नेशनल पीपुल्स पावर (एनपीपी) गठबंधन के प्रत्याशी थे.