सेल ‘घोटाला’: एवन स्टील पर सीबीआई एफआईआर, सीवीओ ने कहा- 370 करोड़ का हुआ नुकसान

वेंकटेश इंफ्रा के बाद अब एवन स्टील इंडस्ट्रीज सेल घोटाले के केंद्र में है. लोकपाल की फटकार के बाद सीबीआई ने 25 जुलाई को एफआईआर दर्ज की. आरोप है कि सेल अधिकारियों की मिलीभगत से एवन को सस्ती दर पर कच्चा माल बेचा गया, जिससे कंपनी को 263-370 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.

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(इलस्ट्रेशन: परिप्लब चक्रबर्ती/द वायर)

नई दिल्ली: वेंकटेश इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (वीआईपीपीएल) के बाद अब एवन स्टील इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) द्वारा की गई स्टील बिक्री में हुए कथित घोटाले के केंद्र में आ गई है.

द वायर हिंदी ने अपनी पिछली रिपोर्ट में बताया था कि कैसे भाजपा को 30 करोड़ का चंदा देने वाली कंपनी एपको इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड पर वेंकटेश इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (वीआईपीपीएल) के साथ मिलकर सेल को भारी नुकसान पहुंचाने के आरोपों की जांच सीबीआई कर रही है.

इस मामले में शुरुआती जांच के आधार पर लोकपाल ने एक आदेश में कहा था, ‘ऐसा प्रतीत होता है कि सेल के अधिकारियों द्वारा मुनासिब सावधानी नहीं बरती गई, जिसके चलते वीआईपीपीएल को अन्य ग्राहकों की तुलना में कम दर पर सामग्री दी गई.’

सेल-वीआईपीपीएल मामले पर द वायर हिंदी की रिपोर्ट.

लोकपाल ने सेल की आंतरिक प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्न उठाते हुए कहा था, ‘यह केवल आर्थिक हानि का सवाल नहीं है, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण है कि क्या सिस्टम को जानबूझकर हानि पहुंचाने और कंपनी को लाभ दिलाने के इरादे से छेड़छाड़ की गई. स्टील बाजार के अनुभवी खिलाड़ी, सेल के अधिकारियों की मिलीभगत से, सिस्टम में गड़बड़ी कर सकते हैं.’

अब एवन के मामले में सीबीआई ने सेल के अधिकारियों और अन्य व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है.

लोकपाल (शिकायत) नियम, 2020 की धारा 4 (ए) के तहत, आरोपी सरकारी अधिकारी का नाम उजागर नहीं किया गया है. 25 जुलाई, 2025 को दर्ज एफआईआर में भारतीय दण्ड संहिता की धारा 120B तथा भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम, 1988 (2018 में संशोधित) की धारा 7, 8 और 9 लगाई गई है.

आरोप है कि सरकारी अधिकारियों ने प्राइवेट कंपनियों के साथ मिलीभगत कर सेल को नुकसान और निजी पक्षों को अनुचित लाभ पहुंचाया है. सेल के चीफ विजिलेंस ऑफिसर ने प्राथमिक जांच में पाया है कि एवन को सस्ती दरों में बेचे गए उत्पाद की वजह से सेल को लगभग 263 करोड़ रुपये से 370 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है.

इन आरोपों की पुष्टि लोकपाल ने भी की. 10 जनवरी, 2024 के अपने आदेश में लोकपाल ने  कहा कि सेल अधिक मुनाफा कमा सकता था, लेकिन उसे एवन को उच्च गुणवत्ता वाला माल कम कीमत पर बेचकर नुकसान हुआ.

लोकपाल ने कहा कि वीआईपीपीएल और एवन, दोनों मामलों में स्टील मंत्रालय खुद विस्तृत जांच की मांग कर चुका है, जो दर्शाता है कि मामला कहीं गहरा है.

लोकपाल की फटकार के बाद दर्ज हुई एफआईआर 

गौर करें, लोकपाल ने 10 जनवरी, 2024 को सीबीआई को वीआईपीपीएल और एवन के मामलों की जांच करने का आदेश दे दिया था. इसके बाद लोकपाल ने 12 नवंबर, 2024 को निर्देश दिया था कि सेल से जुड़ी सभी शिकायतों का संज्ञान लिया जाए ताकि एक बड़े षड्यंत्र की संभावना को अनदेखा न किया जा सके.

लेकिन सीबीआई ने 9 मई, 2025 को लोकपाल को जो रिपोर्ट सौंपी, उसमें एवन से जुड़ी जांच रिपोर्ट नहीं थी.

इसके बाद 2 जुलाई को लोकपाल ने सीबीआई को कड़ी फटकार लगाई और पूछा कि आखिर क्यों इस कंपनी के खिलाफ़ ‘अलग से जांच रिपोर्ट क्यों नहीं दाखिल की जा रही है.’

12 नवंबर, 2024 का आदेश.

आखिरकार लोकपाल ने सीबीआई निदेशक को 15 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने आदेश दिया, जिसके परिणामस्वरूप 25 जुलाई को एवन पर एफआईआर दर्ज की गई.

एवन पर लगे आरोप 

लोकपाल में दर्ज शिकायत के मुताबिक, अक्टूबर 2020 से मई 2022के बीच सेल के दो शीर्ष अधिकारियों, महेश चंद्र अग्रवाल (तत्काकलीन ईडी – सेल्स एंड आईटीडी) और सोमा मंडल (तत्कालीन सेल चेयरपर्सन) ने अपने पदों का दुरुपयोग करते हुए लुधियाना स्थित एवन कंपनी को बहुत कम दाम पर 2,65,820 टन सेमीज़-ब्लूम बेचे.

10 जनवरी, 2024 को लोकपाल द्वारा जारी आदेश में शिकायत के विवरण मिलते हैं.

सेमीज़ इस्पात का अर्द्ध-निर्मित उत्पाद है, जिससे अंतिम उत्पाद तैयार किया जाता है. सीवीओ-सेल की जांच रिपोर्ट जो सीवीसी ने लोकपाल को सौंपी है, उसके अनुसार अक्टूबर 2020 से मई 2022 के बीच एवन को सस्ती दर पर 2,65,820 टन समेज़ी बेचकर सेल को 263 से 370 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है.

ध्यान रहे, भारत में सिर्फ सेल इतनी मात्रा में यह कच्ची सामग्री उपलब्ध करा सकता है. लेकिन इसके बावजूद सेल ने बाज़ार में अपनी सशक्त उपस्थिति का फायदा नहीं उठाया और एवन को कम कीमत पर सामग्री बेच दी.

वीआईपीपीएल की तरह इस मामले में भी शिकायतकर्ता राजीव भाटिया हैं, जो कोलकाता स्थित सेल-सीएमओ मुख्यालय में जनरल मैनेजर (मार्केटिंग) और प्रोडक्ट मैनेजर थे, लेकिन इस साल 11 फरवरी को समय से पहले सेवानिवृत्त कर दिए गए.

सेल का कहना था कि भाटिया ‘ईमानदारी और जवाबदेही’ की कसौटी पर खरे नहीं उतरे, जबकि भाटिया ने सेल के भीतर बड़े स्तर पर हो रही गड़बड़ियों का खुलासा किया था.

सीवीओ-सेल रिपोर्ट.

प्रारंभिक जांच: सीवीसी की रिपोर्ट और लोकपाल की टिप्पणी

सीवीसी ने 24 अगस्त, 2023 को अपनी रिपोर्ट लोकपाल को सौंप दी.

सीवीसी और मंत्रालय की मुख्य टिप्पणियां:

सेल को एवन से मुनाफा अधिक कमाना चाहिए था, क्योंकि उच्च गुणवत्ता वाला माल कम दामों पर बेचा गया. यह नीतिगत गलती थी, लेकिन कुछ अधिकारियों की आपराधिक भूमिका को खारिज नहीं किया जा सकता.

मंत्रालय ने साफ कहा कि मामले की सीबीआई जैसी बाहरी विशेषज्ञ एजेंसी से जांच होनी चाहिए ताकि गड़बड़ी करने वाले लोगों की भूमिका सामने लाई जा सके.

इसी जांच रिपोर्ट के आधार पर लोकपाल ने 12 सितंबर, 2023 को एक आदेश पारित करते हुए तत्कालीन कार्यकारी निदेशक (सेल्स एंड इंटरनेशनल ट्रेड डिवीजन) महेश चंद अग्रवाल और तत्कालीन सेल चेयरपर्सन सोमा मंडल को 17 अक्टूबर, 2023 को लोकपाल के समक्ष पेश होने को कहा था.

महेश चंद्र अग्रवाल के अधिवक्ता ने कहा कि सेल द्वारा एवन को ब्लूम्स बेचना प्रक्रिया के अनुसार था. यहां किसी किस्म की आपराधिक मंशा या गैरकानूनी कार्य नहीं था.

सोमा मंडल के अधिवक्ता ने कहा कि उनका कीमत निर्धारण या एवन से सीधे लेन-देन में कोई हाथ नहीं था. वे उस समय चेयरपर्सन थीं और रोज़मर्रा के व्यापारिक फैसलों में प्रत्यक्ष रूप से शामिल नहीं थीं.

लोकपाल ने 10 जनवरी, 2024 के अपने आदेश में कहा कि ‘उचित सतर्कता का पालन नहीं किया गया. …कुछ अधिकारियों द्वारा आपराधिक कृत्य किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.’

लोकपाल ने आगे कहा कि सेल अधिक मुनाफा कमा सकता था, लेकिन उसे एवन को उच्च गुणवत्ता वाला माल कम कीमत पर बेचकर नुकसान हुआ.

लोकपाल ने लिखा है, ‘संबंधित अधिकारियों और कथित लाभार्थी कंपनी के बीच सांठगांठ की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है.’

इस बीच इस्पात मंत्रालय ने बाहरी एजेंसी से मामले की गहराई से जांच कराने को कहा ताकि विभिन्न पक्षों की भूमिका को परखा जा सके.

जब इस्पात मंत्रालय ने सेल से जवाब मांगा, सेल ने उन 17 अधिकारियों के नाम भेजे, जिनसे होकर एवन को हुई बिक्री के दस्तावेज गुजरे थे. 10 जनवरी, 2024 के लोकपाल के आदेश के बाद मंत्रालय ने इन 17 अधिकारियों में से 13 को निलंबित कर दिया था, जिन चार का निलंबन नहीं हुआ था, वे दरअसल इस कार्रवाई से पहले ही सेवानिवृत हो चुके थे.

सेवानिवृत होने वालों में महेश चंद्र अग्रवाल का नाम भी था. इस बीच 30 अप्रैल, 2023 को सेल के चेयरमैन पद से रिटायरमेंट के बाद सोमा मंडल की नियुक्ति पब्लिक एंटरप्राइज़ सिलेक्शन बोर्ड (PESB) के सदस्य के रूप में हो गई थी.

सीबीआई जांच और कोर्ट का स्टे

10 जनवरी, 2024 के लोकपाल ने सीबीआई को जांच के आदेश दिए.

सीबीआई जांच के आदेश के खिलाफ सोमा मंडल दिल्ली हाईकोर्ट पहुंची थी. अदालत ने 26 जुलाई, 2024 को उनके खिलाफ चल रही जांच पर स्टे लगा दिया. हालांकि, उच्च न्यायालय ने सीबीआई को 10 जनवरी, 2024 के लोकपाल के आदेश के अनुसार अन्य सभी मामलों में जांच जारी रखने की अनुमति दे दी.

दिल्ली हाईकोर्ट में इसकी अगली सुनवाई 25 सितंबर, 2025 को होनी है.

इस बीच सोमा मंडल अपने पद पर रहते हुए सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) के सीएमडी और निदेशकों का चयन करती रही हैं. देखना यह होगा कि एवन के खिलाफ सीबीआई की जांच शुरू होने के बाद क्या वह पद बनी रहती हैं या सरकार उनके खिलाफ कोई सख्त कदम उठाएगी?

सेल के भीतर लगातार सामने आ रहे विवादों से सवाल उठता है कि क्या सार्वजनिक क्षेत्र की सबसे बड़ी इस्पात कंपनी के भीतर कोई संगठित समस्या है? पहले वीआईपीपीएल और अब एवन — दोनों ही मामलों में एक पैटर्न दिखाई देता है, जिसमें निजी कंपनी को भारी लाभ पहुंचाया गया और सार्वजनिक धन का नुकसान हुआ.

द वायर हिंदी ने एमसी अग्रवाल से संपर्क किया लेकिन उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया. सोमा मंडल को सवाल भेजे गए हैं, लेकिन रिपोर्ट प्रकाशित होने तक उन्होंने जवाब नहीं भेजा है.