2006-2023 के बीच 19 राष्ट्रमंडल देशों में 213 पत्रकारों की हत्या: रिपोर्ट

कॉमनवेल्थ ह्यूमनराइट्स इनिशिएटिव, कॉमनवेल्थ पत्रकार संघ और कॉमनवेल्थ वकील संघ द्वारा प्रकाशित एक शोध रिपोर्ट के निष्कर्ष बताते हैं कि 56 राष्ट्रमंडल सदस्य देशों में से कई में राष्ट्रीय क़ानून प्रेस की स्वतंत्रता को गंभीर रूप से बाधित करते हैं और अभिव्यक्ति की आज़ादी के अधिकार को अनुचित रूप से प्रतिबंधित करते हैं.

(फोटो साभार: Flickr/CC BY 2.0)

नई दिल्ली: कॉमनवेल्थ ह्यूमनराइट्स इनिशिएटिव (सीएचआरआई), राष्ट्रमंडल पत्रकार संघ (सीजेए) और राष्ट्रमंडल वकील संघ द्वारा मंगलवार (9 सितंबर) को प्रकाशित एक शोध रिपोर्ट के निष्कर्षों से यह संकेत मिलता है कि 56 राष्ट्रमंडल सदस्य देशों में से कई में राष्ट्रीय कानून प्रेस की स्वतंत्रता को गंभीर रूप से बाधित करते हैं. साथ ही वे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को अनुचित रूप से प्रतिबंधित भी करते हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, 2006 से 2023 के बीच 19 राष्ट्रमंडल देशों में 213 पत्रकारों की हत्या हुई और 96% मामलों में अपराधियों को न्याय के दायरे में नहीं लाया जा सका.

इसके अलावा रिपोर्ट में कहा गया है कि 41 राष्ट्रमंडल देशों में मानहानि के लिए आपराधिक दंड का प्रावधान है, जबकि 48 में राजद्रोह से संबंधित कानून हैं. वहीं 37 राष्ट्रमंडल देशों में ईशनिंदा जैसे कानून हैं, जो पत्रकारिता के लिए चुनौती हैं.

इस संबंध में राष्ट्रमंडल पत्रकार संघ के विलियम हॉर्स्ले ने कहा, ‘बीते 20 वर्षों में 200 से ज़्यादा पत्रकारों की हत्याओं के ज़िम्मेदार लोगों पर मुकदमा चलाने और उन्हें सज़ा देने में कॉमनवेल्थ देश लगभग पूरी तरह से विफल रहे, जो शर्मनाक है.’

उन्होंने आगे कहा कि दंडमुक्ति के इस चलन को जड़ से उखाड़ फेंकना होगा. सच बोलने वालों को धमकियों और प्रतिशोध से बचाने के लिए कॉमनवेल्थ देशों की एक सच्ची भागीदारी संगठन को ऐसे समय में एक नया और ज़रूरी उद्देश्य प्रदान करेगी जब सच्चाई की अवधारणा पर तीखा हमला हो रहा है.

Who Controls the Narrative? Legal Restrictions on Freedom of Expression in the Commonwealth शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में पाया गया है कि मानहानि और राजद्रोह सहित भाषण संबंधी अपराधों के लिए आपराधिक प्रावधानों के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा कानूनों के उल्लंघन को पत्रकारों, मानवाधिकार रक्षकों और सरकारी आलोचकों को डराने और चुप कराने के लिए मनमाने ढंग से लागू किया जाता है.

उल्लेखनीय है कि यह रिपोर्ट राष्ट्रीय कानूनी ढांचों के गहन विश्लेषण पर आधारित है और अफ्रीका, एशिया, अमेरिका और कैरिबियन, यूरोप और प्रशांत क्षेत्रों के 30 से अधिक वरिष्ठ पत्रकारों और 35 वकीलों की गवाही इसमें शामिल की गई है.

रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि राष्ट्रमंडल देशों की पिछली निष्क्रियता ने कुछ सदस्य देशों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून के शासन की सुरक्षा के लिए गंभीर और लगातार चुनौतियों को उत्पन्न किया है.

‘बहुत से राष्ट्रमंडल देशों में औपनिवेशिक काल के कानूनों अब भी लागू’

इस रिपोर्ट तैयार करने वाले तीन राष्ट्रमंडल मान्यता प्राप्त संगठनों ने सभी सदस्य देशों से वैध सार्वजनिक अभिव्यक्ति को अपराध घोषित करने वाले कानूनों को तत्काल निरस्त करने का आह्वान किया है.

इन संगठनों ने मीडियाकर्मियों और सार्वजनिक प्रहरी की भूमिका निभाने वाले अन्य लोगों को हिंसा और धमकी से बचाने के लिए निर्णायक कार्रवाई का भी आह्वान किया है.

इस संबंध में कॉमनवेल्थ ह्यूमनराइट्स इनिशिएटिव की निदेशक स्नेह अरोड़ा ने कहा, ‘बहुत से राष्ट्रमंडल देश औपनिवेशिक काल के कानूनों को लागू करना जारी रखे हुए हैं, जो अभिव्यक्ति को अपराध मानते हैं और असहमति को दबाते हैं, जो उनके अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का स्पष्ट उल्लंघन है.’

उन्होंने आगे बताया कि समोआ में शासनाध्यक्षों द्वारा अपनाए गए मीडिया सिद्धांत सदस्य देशों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा और राष्ट्रीय कानूनों को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के अनुरूप बनाने के लिए कानूनी सुधार और संस्थागत सुरक्षा उपायों के माध्यम से ठोस कदम उठाने का एक उपयुक्त अवसर प्रदान करते हैं.’

रिपोर्ट में राष्ट्रमंडल मंत्रिस्तरीय कार्य समूह (सीएमएजी) से नागरिक समाज और मीडिया पर व्यवस्थागत बाधाओं को दूर करने के अपने दायित्व को पूरा करने का आग्रह किया गया है.

मालूम हो कि अक्टूबर 2024 में राष्ट्रमंडल देशों के नेताओं ने समोआ में अपनी शिखर बैठक के दौरान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सुशासन में मीडिया की भूमिका पर दिशानिर्देशों से जुड़े एक ऐतिहासिक सिद्धांतों के सेट को अपनाया था.

यह निर्णय राष्ट्रमंडल से संबद्ध प्रतिनिधि जमीनी संगठनों के नेतृत्व में वकालत और परामर्श के आठ साल के अभियान के बाद लिया गया था.

ये रिपोर्ट सचिवालय और सदस्य देशों से आग्रह करती है कि वे गैर-सरकारी संगठनों के साथ मिलकर, समोआ में शासनाध्यक्षों द्वारा अपनाए गए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सुशासन में मीडिया की भूमिका पर 11-सूत्रीय राष्ट्रमंडल सिद्धांतों का पालन सुनिश्चित करने के लिए दृढ़ता से कार्य करें.

ये मीडिया सिद्धांत सरकारों से मीडियाकर्मियों के लिए एक सुरक्षित और सक्षम वातावरण बनाने, और ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बाधित करने वाले अत्यधिक प्रतिबंधात्मक घरेलू कानूनों की समीक्षा करने और उनमें संशोधन करने पर विचार करने का आह्वान करते हैं.