नई दिल्ली: कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने शुक्रवार (12 सितंबर) को आरोप लगाया कि अडानी समूह ने मध्य प्रदेश के धीरौली में अपनी कोयला खदान परियोजना के लिए सरकारी और वन भूमि पर पेड़ों की कटाई शुरू कर दी है, जो वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) का घोर उल्लंघन है.
पूर्व पर्यावरण मंत्री ने यह भी दावा किया कि मोदी सरकार ने 2019 में यह आवंटन थोपा था और अब 2025 में आवश्यक कानूनी मंज़ूरी के बिना इसे आगे बढ़ा रही है.
उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘ऐसा सिर्फ़ इसलिए है क्योंकि मोदीनी अपने आप में एक क़ानून हैं.’
उन्होंने कहा, ‘मध्य प्रदेश के धीरौली में मोदानी ने अपनी कोयला खदान के लिए सरकारी और वन भूमि पर पेड़ों की कटाई शुरू कर दी है – बिना चरण-II वन मंज़ूरी के और वन अधिकार अधिनियम, 2006; पेसा, 1996 का घोर उल्लंघन करते हुए. ग्रामीण, जिनमें ज़्यादातर अनुसूचित जनजाति समुदाय और यहां तक कि विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) भी शामिल हैं, उचित ही विरोध कर रहे हैं.’
रमेश ने कहा, ‘यह कोयला ब्लॉक पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में आता है, जहां आदिवासी अधिकार और स्वशासन के प्रावधान संवैधानिक रूप से सुरक्षित हैं.’
उन्होंने आरोप लगाया, ‘इन संरक्षणों को पूरी तरह नज़रअंदाज़ किया गया है – ग्राम सभा से कोई परामर्श नहीं किया गया, जबकि पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996 और सुप्रीम कोर्ट के निर्णय स्पष्ट रूप से ग्राम सभा की सहमति को अनिवार्य ठहराते हैं.’
उन्होंने आगे कहा, ‘वनाधिकार अधिनियम, 2006 के अनुसार, वनभूमि को गैर-वन उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल करने का फ़ैसला ग्राम सभाएं करती हैं. लेकिन इस मामले में ग्राम सभा की मंजूरी को दरकिनार किया गया प्रतीत होता है.’
रमेश ने दावा कि पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से लगभग 3,500 एकड़ प्रमुख वनभूमि के डायवर्ज़न के लिए स्टेज-II अनुमति अभी तक नहीं मिली है – फिर भी मोदानी ने वनों की कटाई शुरू कर दी.
उन्होंने कहा, ‘परियोजनाओं के कारण पहले उजड़े परिवारों को अब फिर से बेदखली का सामना करना पड़ रहा है – यानी दोहरा विस्थापन.’
उन्होंने कहा कि इस परियोजना के लागू होने से महुआ, तेंदू, औषधियां, ईंधन लकड़ी – सब कुछ समाप्त हो जाएगा. इसका सीधा असर आदिवासी समुदायों की आजीविका पर पड़ेगा.
रमेश ने कहा, ‘वन सिर्फ़ आजीविका ही नहीं हैं, बल्कि स्थानीय आदिवासी समूहों के लिए आस्था और संस्कृति का प्रतीक हैं. क्षतिपूरक वनरोपण इसका कोई वास्तविक या पारिस्थितिक विकल्प नहीं हो सकता.’
अडानी पावर की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी महान एनर्जेन लिमिटेड के स्वामित्व वाली धीरौली खदान की अधिकतम निर्धारित क्षमता 6.5 मिलियन टन प्रति वर्ष है – जिसमें 5 मिलियन टन प्रति वर्ष ओपन कॉस्ट खनन से और शेष भूमिगत खनन से प्राप्त होगा.
भूवैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, यहां कुल 620 मिलियन मीट्रिक टन कोयला भंडार होने का अनुमान है. धीरौली ब्लॉक कंपनी की पहली कैप्टिव खदान है जिसे संचालन के लिए सरकारी मंज़ूरी मिली है. अडानी पावर के पास इस ब्लॉक का 30 साल का पट्टा है.
