यूपी: एएनआई की संपादक स्मिता प्रकाश के ख़िलाफ़ ‘फेक न्यूज़’ मामले में शिकायत दर्ज

लखनऊ की एक अदालत ने समाचार एजेंसी एएनआई की संपादक स्मिता प्रकाश के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज की है. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि एजेंसी ने बार-बार चुनाव आयोग के हवाले से फ़र्ज़ी ख़बरें प्रकाशित की हैं; ऐसे बयान जो न आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर थे, न ही सोशल मीडिया हैंडल पर साझा किए गए.

आरोप है कि एएनआई ने निर्वाचन आयोग के नाम से झूठी खबरें प्रकाशित की हैं. (स्क्रीनग्रैब साभार: एएनआई यूट्यूब)

नई दिल्ली: लखनऊ की एक अदालत ने समाचार एजेंसी एएनआई की संपादक स्मिता प्रकाश के खिलाफ एक शिकायत दर्ज की है. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि एजेंसी ने भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के नाम से झूठी खबरें प्रकाशित की हैं.

बार एंड बेंच की खबर के मुताबिक, यह शिकायत पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर द्वारा दाखिल की गई है, जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि शिकायत प्रक्रियात्मक रूप से उचित है और इसलिए इस मामले को शिकायत के रूप में दर्ज किया जाए.

इस संबंध में अदालत ने कहा, ‘शिकायत और लिखित प्रस्तुतियों को सुना और पढ़ा गया. इस स्तर पर क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र या आधारों के गुण-दोष में जाए बिना शिकायत प्रक्रियात्मक रूप से सही पाई गई. अध्याय XV बीएनएसएस के प्रावधानों के मद्देनजर, शिकायत को शिकायत मामले के रूप में पंजीकृत किया जाना चाहिए…’

इसके बाद अदालत ने कहा कि इस मामले को शिकायत मामले के रूप में पंजीकृत किया जाए. साथ ही शिकायतकर्ता को शपथ के तहत अपना बयान दर्ज करने के लिए 26.09.2025 को उपस्थित होने का निर्देश जारी किया गया.

उल्लेखनीय है कि अमिताभ ठाकुर ने आरोप लगाया है कि एएनआई ने बार-बार चुनाव आयोग के हवाले से ऐसे बयान दिए, जो न तो उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किए गए थे और न ही उसके सत्यापित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किए गए थे.

उन्होंने तर्क दिया कि यह एजेंसी द्वारा बिना किसी आधिकारिक समर्थन के आयोग के नाम पर झूठी खबरें प्रसारित करने के समान है.

शिकायत में अगस्त 2025 के कई उदाहरणों का हवाला दिया गया है, जिनमें सोशल मीडिया मंच एक्स पर एएनआई के पोस्ट और चुनाव आयोग से पहले या बिना किसी आधिकारिक पुष्टि के प्रकाशित समाचार रिपोर्ट शामिल हैं.

अपनी याचिका में ठाकुर ने 1 अगस्त, 2025 को दोपहर 3:08 बजे एएनआई के एक पोस्ट का हवाला दिया, जिसमें कथित तौर पर चुनाव आयोग का एक बयान था, जिसमें राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर आपत्ति जताई गई थी.

शिकायतकर्ता ने आगे कहा कि आयोग ने अपना आधिकारिक स्पष्टीकरण बाद में शाम 5:59 बजे हिंदी में और शाम 6:55 बजे अंग्रेजी में अपने एक्स हैंडल से जारी किया, जिसमें आयोग द्वारा गांधी के बयान को ‘भ्रामक, निराधार और धमकी भरा’ बताया.

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि एएनआई ने बिना किसी आधिकारिक तथ्य या सबूत के पूरी तरह से अपनी मर्ज़ी से, कई खबरों को चुनाव आयोग का बताकर प्रसारित किया.

शिकायत याचिका में आगे कहा गया कि ऐसी कई खबरें न तो आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर हैं, न ही उनके सोशल साइट्स पर न ही किसी आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस या प्रेस वार्ता आदि के माध्यम से प्रस्तुत की गई और इन खबरों के समर्थन में केवल एएनआई के शब्द ही हैं.

बिना किसी आधिकारिक समर्थन के आयोग के नाम पर झूठी खबरें प्रसारित की गईं

लाइव लॉ के अनुसार, याचिका में कहा गया है, ‘इस प्रकार एएनआई को बिना किसी आधिकारिक समर्थन के आयोग के नाम पर झूठी खबरें प्रसारित/जारी करते देखा गया… इसी तरह एएनआई से खबरों के लीक होने का मुद्दा एएनआई की कार्यप्रणाली से जुड़ा एक और पहलू प्रस्तुत करता है. इससे चुनाव आयोग के सिस्टम में एएनआई की अवैध घुसपैठ की संभावना बढ़ जाती है, जिसमें अवैध रूप से अंदरूनी जानकारी हासिल करना और फिर उसे लीक करना शामिल है.’

इन तथ्यों के आधार पर शिकायतकर्ता ने दावा किया कि ये कथित कृत्य प्रथमदृष्टया अवैध और आपराधिक कृत्य हैं, विशेष रूप से बीएनएस की धारा 318(2) (जो कोई भी धोखाधड़ी करेगा उसे तीन वर्ष तक के कारावास या जुर्माने या दोनों से दंडित किया जाएगा) और 318(3) (जो कोई भी यह जानते हुए धोखाधड़ी करेगा कि इससे किसी ऐसे व्यक्ति को गलत तरीके से नुकसान पहुंचने की संभावना है, जिसके हित को उस लेन-देन में, जिससे धोखाधड़ी संबंधित है, संरक्षित करने के लिए वह कानून द्वारा या कानूनी अनुबंध द्वारा बाध्य था, उसे पांच वर्ष तक के कारावास या जुर्माने या दोनों से दंडित किया जाएगा) और कानून के अन्य प्रावधानों शामिल हैं.

ठाकुर ने आगे दलील दी कि हालांकि, वह एफआईआर दर्ज करने के लिए पुलिस से संपर्क कर सकते थे, लेकिन इस बात की प्रबल संभावना थी कि पुलिस विभिन्न कारकों से प्रभावित हो सकती थी. इसलिए, उन्होंने अदालत में सीधे शिकायत दर्ज कराना ज़्यादा उचित समझा.

उन्होंने अदालत से उनकी शिकायत का संज्ञान लेने और कथित आपराधिक कदाचार के लिए प्रकाश के खिलाफ आवश्यक कार्यवाही शुरू करने का आग्रह किया.