नई दिल्ली: अयोध्या के धन्नीपुर गांव में प्रस्तावित मस्जिद का नक्शा अयोध्या विकास प्राधिकरण (एडीए) ने खारिज कर दिया है. प्राधिकरण ने कहा है कि विभिन्न सरकारी विभागों से आवश्यक अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) न मिलने के कारण यह फैसला लिया गया.
ज्ञात हो कि बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि मामले के निपटारे के बाद यह ज़मीन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को मस्जिद निर्माण के लिए आवंटित की गई थी.
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, 16 सितंबर को एक आरटीआई के जवाब में एडीए ने बताया कि मस्जिद ट्रस्ट ने योजना शुल्क और जांच शुल्क के तौर पर चार लाख रुपये जमा किए थे. लेकिन लोक निर्माण विभाग, प्रदूषण नियंत्रण, नागरिक उड्डयन, सिंचाई, राजस्व, नगर निगम, जिला प्रशासन और अग्निशमन विभाग जैसे संस्थानों से मंज़ूरी न मिलने की वजह से आवेदन खारिज कर दिया गया.
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने राम लला-बाबरी मस्जिद मामले की सुनवाई के दौरान 9 नवंबर 2019 के फैसले में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को अयोध्या में मस्जिद और संबंधित सुविधाओं के लिए पांच एकड़ भूमि दिए जाने का आदेश दिया था. इसके तहत 3 अगस्त 2020 को तत्कालीन जिलाधिकारी अनुज कुमार झा ने धन्नीपुर गांव की ज़मीन वक्फ बोर्ड को सौंपी थी.

इसके बाद मस्जिद ट्रस्ट ने 23 जून 2021 को नक्शे की मंज़ूरी के लिए आवेदन किया था, लेकिन तब से अब तक कोई स्वीकृति नहीं मिली.
स्थानीय पत्रकार ओमप्रकाश सिंह की आरटीआई के जवाब में एडीए ने स्वीकार किया कि मस्जिद ट्रस्ट ने आवेदन और जांच शुल्क के रूप में चार लाख रुपये जमा किए थे. एडीए के अनुसार, मंज़ूरी के लिए विभिन्न विभागों से एनओसी मांगे गए थे.
टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, मस्जिद ट्रस्ट के सचिव अतहर हुसैन ने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद के लिए ज़मीन देने का आदेश दिया और राज्य सरकार ने हमें ज़मीन भी आवंटित कर दी. लेकिन मुझे समझ नहीं आता कि विभाग एनओसी क्यों नहीं दे रहे और एडीए ने नक्शा क्यों खारिज कर दिया.’
हुसैन ने बताया कि अग्निशमन विभाग ने साइट निरीक्षण के दौरान आपत्ति जताई थी कि मस्जिद और अस्पताल भवन की ऊंचाई के हिसाब से वहां जाने वाली सड़क कम से कम 12 मीटर चौड़ी होनी चाहिए. जबकि वहां दोनों पहुंच मार्ग छह मीटर से ज़्यादा चौड़े नहीं थे और मुख्य सड़क की चौड़ाई तो केवल लगभग चार मीटर थी.
उन्होंने कहा, ‘फायर डिपार्टमेंट की आपत्ति के अलावा मुझे किसी अन्य विभाग की आपत्ति की जानकारी नहीं दी गई है. हमें न तो एनओसी की स्थिति बताई गई और न ही नक्शा खारिज होने की कोई सूचना मिली. अब आरटीआई के ज़रिए स्थिति साफ हुई है, तो हम आगे की रणनीति तय करेंगे.’
