नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक द्वारा स्थापित संगठन स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख (एसईसीएमओएल) का विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) लाइसेंस रद्द कर दिया है.
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस संबंध में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने कहा है कि उसने पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और उनके द्वारा स्थापित एक अन्य संस्थान हिमालयन इंस्टिट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स लद्दाख (एचआईएएल) के खिलाफ लगभग दो महीने पहले कथित एफसीआरए उल्लंघनों की प्रारंभिक जांच शुरू की थी.
मालूम हो कि यह खबर गृह मंत्रालय द्वारा लेह में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शन के लिए वांगचुक को ज़िम्मेदार ठहराए जाने के एक दिन बाद सामने आई है.
MHA cancels the FCRA license of Activist Sonam Wangchuk’s NGO. pic.twitter.com/OKK6NlShlo
— Press Trust of India (@PTI_News) September 25, 2025
लेह हिंसा को लेकर गृह मंत्रालय ने कहा था कि भीड़ उनके ‘भड़काऊ बयानों’ से उकसाई गई थी. ज्ञात हो कि इस हिंसा और पुलिस गोलीबारी में कम से कम चार लोग मारे गए थे. इसके बाद पूरे शहर में कर्फ्यू जैसे प्रतिबंध लगा दिए गए थे.
इस बीच, वांगचुक ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया है कि लगभग 10 दिन पहले सीबीआई की एक टीम उनके पास ‘एक आदेश’ लेकर आई थी, जिसमें कहा गया था कि वे कथित एफसीआरए उल्लंघनों के संबंध में गृह मंत्रालय की शिकायत पर कार्रवाई कर रहे हैं.
उन्होंने बताया कि सीबीआई की एक टीम ने पिछले हफ़्ते एचआईएएल और एसईसीएमओएल का दौरा किया था और 2022 से 2024 के बीच प्राप्त विदेशी धन का ब्योरा मांगा था. सीबीआई की टीमें अभी भी लद्दाख में हैं और संगठनों के खातों और विवरणों की जांच कर रही हैं.
हालांकि, इस मामले में कुछ समय से जांच चल रही है, लेकिन अभी तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है.
सोनम वांगचुक ने खुद को निशाना बनाने का आरोप लगाया
वांगचुक ने कहा कि शिकायत में जिन कथित उल्लंघनों का ज़िक्र है, वे सेवा समझौते हैं, जिन पर सरकार को विधिवत कर चुकाया गया था, और ये भारत द्वारा संयुक्त राष्ट्र, स्विस विश्वविद्यालय और एक इतालवी संगठन को ज्ञान निर्यात करने से संबंधित हैं.
उन्होंने कहा, ‘आदेश में कहा गया है कि हमने विदेशी धन प्राप्त करने के लिए एफसीआरए के तहत मंज़ूरी नहीं ली है. हम विदेशी धन पर निर्भर नहीं रहना चाहते, लेकिन हम अपना ज्ञान निर्यात करते हैं और राजस्व जुटाते हैं. ऐसे तीन मामलों में, उन्हें लगा कि यह विदेशी योगदान है.’
उन्होंने आगे कहा, ‘सब जानते हैं कि हमारे पास दिखाने के लिए दस्तावेज़ हैं.’
उन्होंने सरकार द्वारा निशाना बनाने का आरोप लगाते हुए कहा, ‘दिलचस्प बात यह है कि लद्दाख एक ऐसी जगह है जहां कोई टैक्स नहीं लगता. फिर भी मैं स्वेच्छा से टैक्स भरता हूं और मुझे समन मिलते हैं.’
वांगचुक ने आगे बताया कि एक पुरानी चार साल पहले की शिकायत भी दोबारा खोली गई है, जिसमें मजदूरों को वेतन न देने का आरोप था. उन्होंने कहा, ‘हमें चारों ओर से निशाना बनाया जा रहा है.’
ज्ञात हो कि सोनम वांगचुक पेशे से एक इंजीनियर हैं, जो पर्यावरण बचाने के लिए भी काम करते हैं. उनका इनोवेशन के क्षेत्र में भी नाम है. वे लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची के विस्तार की मांग को लेकर 15 दिनों से भूख हड़ताल पर थे, जिसे हिंसा के बाद उन्होंने समाप्त करने की घोषणा की.
इस दौरान उन्होंने लद्दाख के युवाओं से शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने और छठी अनुसूची के विस्तार तथा लद्दाख को राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर पिछले पांच वर्षों से चल रहे आंदोलन को पटरी से न उतारने की अपील भी की.
गौरतलब है कि बुधवार देर रात जारी एक बयान में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस हिंसा के लिए सोनम वांगचुक को ज़िम्मेदार ठहराया था.
केंद्र सरकार ने बयान में कहा गया था कि कुछ लोग पूर्ण राज्य और छठी अनुसूची के विस्तार पर लद्दाख के लोगों से हो रही बातचीत में प्रगति से खुश नहीं हैं और इसमें बाधा डाल रहे हैं.
मंत्रालय ने आगे यह भी कहा कि ‘कुछ लोगों की स्वार्थ की राजनीति और सोनम वांगचुक की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं की वजह से लद्दाख और उसके युवा भारी कीमत चुका रहे हैं.’
