दिल्ली: प्रबंधन संस्थान की छात्राओं से यौन उत्पीड़न के आरोप में स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती आगरा से गिरफ़्तार

दिल्ली पुलिस ने स्वयंभू धर्मगुरु स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती उर्फ ​​पार्थसारथी को दक्षिणी दिल्ली के वसंत कुंज स्थित एक प्रबंधन संस्थान की कई छात्राओं से यौन उत्पीड़न के आरोप में रविवार (28 सितंबर) तड़के आगरा से गिरफ्तार कर लिया है. छात्राओं की उत्पीड़न संबंधी शिकायत 4 अगस्त को दिल्ली के वसंत कुंज उत्तर थाने में दर्ज की गई थी. तब से आरोपी स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती फरार थे, पुलिस उनकी तलाश कर रही थी.

यौन उत्पीड़न के आरोपी स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती को पुलिस ने आगरा से गिरफ़्तार कर लिया है. (फोटो साभार: सोशल मीडिया)

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने स्वयंभू धर्मगुरु स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती उर्फ ​​पार्थसारथी को दक्षिणी दिल्ली के वसंत कुंज स्थित एक प्रबंधन संस्थान की कई छात्राओं से यौन उत्पीड़न के आरोप में रविवार (28 सितंबर) तड़के आगरा से गिरफ्तार कर लिया है.

द हिंदू की खबर के मुताबिक, इस संबंध में अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली पुलिस की एक टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर 62 वर्षीय सरस्वती को आगरा से गिरफ्तार किया है

इससे पहले पुलिस ने सरस्वती से जुड़े 8 करोड़ रुपये जब्त कर लिए थे, जो कई बैंक खातों और एफडी में जमा थे.

इस मामले में लिखी गई एफआईआर के अनुसार, प्रबंधन संस्थान के पूर्व अध्यक्ष सरस्वती कथित तौर पर छात्राओं को देर रात अपने आवास पर आने के लिए मजबूर करते थे और उन्हें अश्लील मैसेज भेजते थे.

कथित तौर पर वह अपने फोन के ज़रिए छात्राओं की गतिविधियों पर नज़र भी रखते थे.

मालूम हो कि छात्राओं के उत्पीड़न संबंधी शिकायत 4 अगस्त को दिल्ली के वसंत कुंज उत्तर थाने में दर्ज की गई थी. तब से आरोपी स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती फरार थे, पुलिस उनकी तलाश कर रही थी.

उल्लेखनीय है कि यौन शोषण के आरोपी बाबा चैतन्यानंद सरस्वती देश छोड़कर न भाग जाए, इसके लिए पुलिस ने लुकआउट सर्कुलर भी जारी किया गया था. चैतन्यानंद की तलाश में दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड और बिहार में छापेमारी भी की थी.

गौरतलब है कि इससे पहले जांचकर्ताओं को प्रबंधन संस्थान के बेसमेंट में जाली राजनयिक नंबर प्लेट – 39 यूएन 1 वाली एक वोल्वो कार भी मिली थी, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर सरस्वती करते थे.

इसके बाद 25 अगस्त को एक अलग एफआईआर दर्ज की गई और वाहन को जब्त कर लिया गया. अधिकारियों ने पुष्टि की थी कि मामला सामने आने के बाद से आरोपी गिरफ्तारी से सक्रिय रूप से बच रहा है.

वहीं, संस्थान की ओर से जारी बयान में कहा गया कि स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती, जिन्हें पहले स्वामी पार्थसारथी के नाम से जाना जाता था, अवैध और अनुचित गतिविधियों में लिप्त रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप पीठ ने उनके साथ सभी संबंध समाप्त कर लिए हैं.

शृंगेरी पीठ ने स्पष्ट किया है कि श्री शारदा इंस्टिट्यूट ऑफ इंडियन मैनेजमेंट-रिसर्च (वसंत कुंज, नई दिल्ली) एआईसीटीई से मान्यता प्राप्त है और यह संस्था पीठ के अधीन चल रही है.

संस्थान का संचालन पीठ द्वारा गठित गवर्निंग काउंसिल करती है, जिसकी अध्यक्षता प्रख्यात शिक्षाविद् डॉ. कृष्णा वेंकटेश कर रहे हैं. गवर्निंग काउंसिल ने आश्वासन दिया था कि छात्राओं के हितों की पूरी सुरक्षा की जाएगी और उनकी पढ़ाई तथा कार्यक्रमों में किसी तरह की रुकावट नहीं आने दी जाएगी.

मामले का खुलासा होने के बाद आरोपी को पद से हटा दिया गया था.