नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के अवसर पर 100 रुपये का स्मारक सिक्का और विशेष डाक टिकट जारी किए जाने के विरोध में विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है.
विपक्षी दलों और वरिष्ठ कानूनी विशेषज्ञों ने इसे संविधान की भावना के खिलाफ करार दिया और आरएसएस के इतिहास पर सवाल उठाए है.
वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सिक्के की तस्वीर साझा करते हुए लिखा है, ‘क्या यह धर्मनिरपेक्ष संविधान के तहत वैध मुद्रा है?’
Is this even Legal tender under a Secular Constitution ? pic.twitter.com/if7BMzrIE9
— Indira Jaising (@IJaising) October 2, 2025
सीपीआईएम का आरोप: संविधान का अपमान
संपूर्ण विपक्ष की तरफ से सबसे तेज प्रतिक्रिया मार्क्सवादी पार्टी (सीपीआईएम) की ओर से आई. सीपीआईएम की पोलितब्यूरो ने बुधवार (1 अक्टूबर) को जारी बयान में कहा कि आरएसएस शताब्दी मनाने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा जारी किया गया डाक टिकट और 100 रुपये का सिक्का उस ‘संविधान पर गंभीर चोट और अपमान’ है, जिसे आरएसएस ने कभी स्वीकार नहीं किया.
पार्टी ने कहा कि यह अत्यधिक आपत्तिजनक है कि भारत सरकार द्वारा जारी सिक्का आरएसएस द्वारा प्रचारित ‘भारत माता’ की छवि को दिया गया है. इसके साथ ही 1963 के गणतंत्र दिवस परेड में आरएसएस कार्यकर्ताओं की उपस्थिति को दिखाने वाला डाक टिकट भी इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करता है. सीपीआईएम ने आरोप लगाया कि यह आरएसएस के ‘शर्मनाक इतिहास’ को साफ करने का अभियान है. पार्टी ने कहा कि आरएसएस स्वतंत्रता संग्राम से दूर रहा और ब्रिटिश साम्राज्य की ‘विभाजन की नीति’ को मजबूती प्रदान करने में सक्रिय था.
सीपीआईएम के महासचिव एम.ए. बेबी ने कहा, ‘आरएसएस को महिमामंडित करने के लिए सिक्का और डाक टिकट जारी करना संविधान का अपमान है और इसका उद्देश्य आरएसएस के विभाजनकारी अतीत को मिटा देना है. प्रधानमंत्री अपने पद का दुरुपयोग कर आरएसएस के संप्रदायवादी एजेंडे को वैधता दे रहे हैं और भारत के स्वतंत्रता संघर्ष के इतिहास को विकृत कर रहे हैं.’

केरल सीएम का कड़ा विरोध
केरल के मुख्यमंत्री पिनारई विजयन ने भी इस निर्णय की कड़ी आलोचना की. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘आरएसएस शताब्दी वर्ष मनाने के लिए डाक टिकट और 100 रुपये का सिक्का जारी करना हमारे संविधान का गंभीर अपमान है. यह संगठन स्वतंत्रता संग्राम में भाग नहीं लिया और एक विभाजनकारी विचारधारा का प्रचार करता रहा, जो औपनिवेशिक रणनीति से मेल खाती थी. यह राष्ट्रीय सम्मान हमारे असली स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति और उनके द्वारा कल्पित धर्मनिरपेक्ष, एकीकृत भारत पर प्रत्यक्ष हमला है.’
सिक्के पर आरएसएस का आदर्श वाक्य
पीएम मोदी द्वारा जारी स्मारक सिक्के पर आरएसएस का आदर्श वाक्य लिखा है- राष्ट्राय स्वाहा, इदं राष्ट्राय इदं न मम:, जिसका अर्थ है ‘सब कुछ राष्ट्र के लिए, सब कुछ राष्ट्र का, कुछ भी मेरा नहीं’. डाक टिकट में 1963 की गणतंत्र दिवस परेड में आरएसएस स्वयंसेवकों की भागीदारी दिखाई गई है, जिससे संगठन की ऐतिहासिक भूमिका को उजागर करने की कोशिश की गई है.

बता दें, प्रधानमंत्री द्वारा आरएसएस शताब्दी वर्ष मनाने के लिए जारी यह स्मारक सिक्का और डाक टिकट देश में राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बन गया है. विपक्षी दल इसे संविधान के मूल्यों के खिलाफ और राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम के असली नायकों की स्मृति का अपमान मान रहे हैं.
