नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत उनकी गिरफ्तारी के ख़िलाफ़ दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है.
बार एंड बेंच के अनुसार, आंगमो की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा, ‘हम गिरफ्तारी के ख़िलाफ़ हैं.’
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने सरकार से जवाब मांगा. केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वांगचुक की गिरफ्तारी के आधार ‘वांगचुक को बता दिए गए हैं.’
वकील इंदिरा जयसिंह सहित कई लोगों ने इस बात पर आश्चर्य जताया है कि सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर प्रकाशित रोस्टर के विपरीत जाकर, इस बंदी प्रत्यक्षीकरण मामले को भारत के मुख्य न्यायाधीश, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एमएम सुंदरेश को क्यों नहीं सौंपा गया.
ज्ञात हो कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने लद्दाख में हुए विरोध प्रदर्शनों में हुई हिंसा को, जो 24 सितंबर को वांगचुक के नेतृत्व में कई दिनों के शांतिपूर्ण आंदोलन के बाद भड़की थी, इन प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और कार्यकर्ता से जोड़ने की कोशिश की है.
24 सितंबर को लेह में विरोध प्रदर्शन के हिंसक हो जाने के बाद सुरक्षा बलों द्वारा कथित तौर पर की गई गोलीबारी में चार लोगों की मौत हो गई थी.
वांगचुक, जो उस समय दो सप्ताह से आमरण अनशन पर थे, ने तुरंत अपना अनशन समाप्त कर दिया. इसके तुरंत बाद 26 सितंबर को उन्हें कठोर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत गिरफ्तार कर लिया गया. लद्दाख में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों को भड़काने का आरोप लगाया गया है.
आंगमो ने 2 अक्टूबर को वांगचुक की गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, लेकिन न्यायाधीश दशहरा अवकाश पर थे.
आंगमो ने 3 अक्टूबर की सुबह एक्स पर लिखा, ‘आज एक हफ़्ता हो गया है. मुझे अभी भी सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य, उनकी हालत और हिरासत के कारणों के बारे में कोई जानकारी नहीं है.’
बार एंड बेंच के अनुसार, अपनी याचिका में आंगमो ने कहा है कि वांगचुक की हिरासत वास्तव में राष्ट्रीय सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ी नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक और पर्यावरणीय मुद्दों की वकालत करने वाले एक सम्मानित पर्यावरणविद् और समाज सुधारक को चुप कराने के इरादे से की गई है.
वांगचुक के वकील और बड़े भाई जोधपुर सेंट्रल जेल में उनसे मिल चुके हैं, जहां वे बंद हैं. वांगचुक ने चारों हत्याओं की स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग की है और ऐसी जांच होने तक जेल में ही रहने की कसम खाई है.
