नई दिल्ली: भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रायपुर के निदेशक प्रोफ़ेसर राम कुमार काकानी के इस साल जुलाई में इस्तीफ़े ने आईआईएम अधिनियम और संस्थान की मानव संसाधन नीतियों के बीच विसंगतियों को उजागर कर दिया है.
न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में इस्तीफ़ा देने वाले काकानी तीसरे आईआईएम निदेशक हैं. कुछ शिक्षाविदों ने स्वीकार किया है कि ये विसंगतियां वर्षों से बनी हुई हैं और काकानी के पद छोड़ने के फ़ैसले के पीछे एक प्रमुख कारण के रूप में देखी जा रही हैं.
काकानी, जो इस साल 22 जुलाई को सेवानिवृत्त हुए, उनका कार्यकाल मार्च 2027 में समाप्त होने वाला था, ने कहा था कि ‘संस्थान की मानव संसाधन नीतियों और आईआईएम अधिनियम 2017 की भावना के बीच विरोधाभास’ उनके पेशेवर दायरे को सीमित कर रहा है, जिससे उनके काम और निर्णय लेने में बाधा आ रही थी.
इससे पहले आईआईएम कोलकाता के दो पूर्व निदेशकों- अंजू सेठ (2021) और उत्तम कुमार सरकार (2023) – ने अपने बोर्ड के साथ विवादों के चलते इस्तीफा दे दिया था.
काकानी इससे पहले आईआईएम कोझीकोड, एक्सएलआरआई जमशेदपुर और एलएलबीएसएनएए मसूरी में पढ़ा चुके हैं और अब वे आरवी विश्वविद्यालय, बेंगलुरु के कुलपति हैं.
आईआईएम रायपुर के फैकल्टी और वरिष्ठ छात्रों का हवाला देते हुए न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने बताया कि आईआईएम अधिनियम 2017 के लागू होने के बाद से प्रशासनिक अधिकारों को लेकर निदेशकों और बोर्ड अध्यक्षों के बीच विवाद बढ़ गए हैं.
उन्होंने कहा कि परिणामस्वरूप इन मतभेदों ने संस्थान की प्रशासनिक स्वायत्तता और कार्यप्रणाली को प्रभावित किया.
एक सूत्र ने अखबार को बताया, ‘संस्थान के एक फैकल्टी सदस्य, जो कथित तौर पर जालसाजी में शामिल था, से जुड़ा एक गंभीर शैक्षणिक अखंडता का मुद्दा काकानी के अचानक इस्तीफे का मुख्य कारण बना. यह धोखाधड़ी विशेष रूप से एक ए-स्टार जर्नल में स्वीकृत एक शोध लेख के सह-लेखकत्व को पुनः प्राप्त करने के लिए एक डॉक्टरेट छात्र के हस्ताक्षर से संबंधित थी.’
