तालिबान द्वारा महिला पत्रकारों को प्रेस कॉन्फ्रेंस से बाहर रखने पर भारत सरकार का विरोध

भारत तालिबान की दोस्ती का हाथ बढ़ा रहा है, वैश्विक राजनीति में पुराने समीकरण बदल रहे हैं. अफ़ग़ानिस्तान के साथ भारत की नजदीकी महत्वपूर्ण है. लेकिन क्या मजबूरी है कि सरकार तालिबान को अपनी महिला-विरोधी नीतिओं का भारत में भी पालन करने की इजाज़त दे रही है?

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तालिबान के विदेश मंत्री की प्रेस वार्ता में महिला पत्रकारों को प्रवेश नहीं दिया गया. (फोटो: एक्स/@HafizZiaAhmad)

नई दिल्ली: भारत यात्रा पर आए तालिबान शासित अफ़ग़ानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर ख़ान मुत्ताक़ी ने शुक्रवार (10 अक्टूबर) को नई दिल्ली स्थित अफ़ग़ान दूतावास में प्रेस के साथ वार्ता की.

यह प्रेस वार्ता भारतीय समकक्ष एस जयशंकर के साथ उनकी मुलाक़ात के बाद आयोजित की गई. भारत की सरज़मी पर हो रहे उस प्रेस वार्ता में महिला पत्रकारों को प्रवेश नहीं दिया गया. 

इस वार्ता के लिए 15 से अधिक मीडिया संस्थानों को आमंत्रित किया गया था, और सभी संस्थानों का प्रतिनिधित्व पुरुष पत्रकार कर रहे थे. एक भी महिला पत्रकार को वहां रहने की अनुमति तालिबान द्वारा नहीं दी गई. 

कहा जा रहा है कि महिला पत्रकार दूतावास के बाहर खड़ी रहीं, लेकिन उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया. और यह उस देश की राजधानी में घटित हो रहा था जो ख़ुद को महिलाओं के अधिकारों का मुखर समर्थक बताता है. 

बाहर खड़ी महिला संवाददाता ने जब अफ़ग़ान दूतावास के एक अधिकारी से पूछा, तब मिला मिला, ‘सभी सीटें भर चुकी हैं.’ हालांकि, प्रेस वार्ता से आई तस्वीरों में कॉन्फ्रेंस हॉल में कई खाली कुर्सियां दिखाई दे रही थीं.

(फोटो: @HafizZiaAhmad)

प्रेस वार्ता से महिला पत्रकारों को बाहर रखने की इस घटना ने महिला पत्रकारों में नाराज़गी पैदा कर दी है. भारत महिलाओं के लिए ऐसी भेदभावपूर्ण शर्तें कैसे स्वीकार कर सकता है? भारत सरकार ने तालिबान के इस रवैये को कैसे स्वीकार कर लिया?

यह कहा जा रहा है कि भारत में पहली बार किसी विदेशी सरकार के कार्यक्रम से महिला रिपोर्टरों को सक्रिय रूप से बाहर रखा गया है.

हालांकि, विदेश मंत्रालय ने इस प्रकरण में अपनी भूमिका होने से साफ़ इनकार कर दिया है. पीटीआई के अनुसार, पत्रकारों को मीडिया के साथ संवाद में आमंत्रित करने का निर्णय तालिबान के अधिकारियों ने लिया.

विदेश मंत्रालय ने शनिवार को कहा, ‘दिल्ली में कल अफ़ग़ान विदेश मंत्री द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता में विदेश मंत्रालय की कोई भागीदारी नहीं थी.’

अधिकारियों ने दावा किया कि भारतीय पक्ष से इस संबंध में कोई परामर्श नहीं किया गया था और चूंकि प्रेस कॉन्फ्रेंस अफ़ग़ान दूतावास के भीतर हुई थी, इसलिए भारत की इसमें कोई भूमिका नहीं थी.

हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि विदेश मंत्रालय, जो तालिबान की महिलाओं के प्रति भेदभावपूर्ण नीतियों से परिचित है, उसने यह शर्त क्यों नहीं रखी कि वह भारत में आयोजित कोई भी सार्वजनिक कार्यक्रम संवैधानिक मूल्यों का उल्लंघन नहीं करेगा. 

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2021 में सत्ता में आने के बाद से तालिबान ने महिलाओं की शिक्षा, आवाजाही और रोज़गार पर लगातार पाबंदियां लगाई हैं. उसने लड़कियों को स्कूल जाने से और महिलाओं को विश्वविद्यालयों से प्रतिबंधित कर दिया है.

तालिबान के सत्ता में आने के बाद भारत ने अफ़ग़ानिस्तान में महिलाओं और अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर खुलकर आवाज़ उठाई थी.

अक्टूबर 2022 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने कहा था, ‘ जब महिलाओं और अल्पसंख्यकों के अधिकार कुचले जा रहे हैं.. तब दुनिया यह दिखावा नहीं कर सकती कि कुछ नहीं हो रहा. अफ़ग़ानिस्तान में महिलाओं को सार्वजनिक जीवन से हटाने के प्रयास तेज़ी से बढ़ रहे हैं.’ 

हालांकि, इस बार तालिबानी विदेश मंत्री के साथ वार्ता में जयशंकर द्वारा या संयुक्त बयान में महिलाओं और अल्पसंख्यकों के अधिकारों का कोई ज़िक्र नहीं किया गया.

तालिबान के विदेश मंत्री आमिर ख़ान मुत्ताक़ी भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ. (फोटो: मीडिया विभाग, अफ़ग़ान विदेश मंत्रालय)

प्रेस वार्ता में अफ़ग़ान महिलाओं की शिक्षा पर लगाए गए प्रतिबंधों पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में मुत्ताक़ी ने कहा कि अब अफ़ग़ानिस्तान में शांति और स्थिरता लौट आई है.

उन्होंने कहा, ‘हर देश की अपनी परंपराएं, क़ानून और सिद्धांत होते हैं और उसी के अनुसार काम किया जाता है. यह सही नहीं है कि लोगों को उनके अधिकार नहीं दिए जा रहे. अगर लोग व्यवस्था से नाख़ुश होते, तो देश में शांति कैसे लौटती?’

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संघ परिवार और भाजपा के नेता मुसलमानों को नीचा दिखाने के लिए उनकी तुलना तालिबान से करते हैं. तालिबान की अफ़ग़ानिस्तान में वापसी के बाद भारत में मुस्लिम राजनेता, लेखक, पत्रकार, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और आम नागरिकों को लगातार निशाना बनाया गया था. 

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विपक्षी पार्टियों को तालिबानी कहकर उन पर कटाक्ष करते रहे हैं, और उन्हें नीचा दिखाने के लिए उन्हें तालिबानी मानसिकता से ग्रस्त कहते आए हैं. 

भारत तालिबान की दोस्ती का हाथ बढ़ा रहा है इसे समझा जा सकता है, पुराने समीकरण बदल रहे हैं. ऐसे में अफ़ग़ानिस्तान के साथ भारत की नजदीकी महत्वपूर्ण है.

लेकिन सरकार की ऐसी क्या मजबूरी है कि वह तालिबान से अफ़ग़ानी औरतों के हक की बात करने से कतरा रहा है? यही नहीं, यहां तक की वह उन्हें अपनी महिला विरोधी नीतिओं का भारत में भी पालन करने की इजाज़त दे रहा है. 

महिला पत्रकारों को बाहर रखने पर पत्रकारों व विपक्ष ने की आलोचना

लोकसभा में नेताप्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक्स पर एक पोस्ट में महिला पत्रकारों को प्रेस वार्ता से बाहर रखने को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार निशाना साधा. वह लिखते हैं, ‘श्रीमान मोदी, जब आप किसी सार्वजनिक मंच से महिला पत्रकारों को बाहर रखने की अनुमति देते हैं, तो आप भारत की हर महिला से कह रहे हैं कि उनके अधिकारों के लिए खड़े होने में आप कमजोर हैं.’

हमारे देश में महिलाओं को हर क्षेत्र में समान भागीदारी का अधिकार है. इस तरह के भेदभाव के सामने आपकी मौनता आपकी नारि शक्ति के नारों की खोखलापन को उजागर करती है.’

वायनाड से कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने एक्स पर लिखा, ‘प्रधानमंत्री जी, तालिबान के प्रतिनिधि की भारत यात्रा के दौरान आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस से महिला पत्रकारों को बाहर रखने पर कृपया आप अपनी राय स्पष्ट करें.

यदि महिलाओं के अधिकारों के प्रति आपकी प्रतिबद्धता सिर्फ़ चुनावी हथकंडा नहीं है, तब भारत के कुछ सबसे सक्षम महिलाओं के साथ यह अपमान हमारे देश में कैसे संभव हुआ जिसकी महिलाएं इसकी रीढ़ और गर्व हैं.

‘द हिंदू’ की वरिष्ठ पत्रकार सुहासिनी हैदर ने लिखा, ‘यह और भी हास्यास्पद है कि तालिबान के विदेश मंत्री को अपनी घृणित और अवैध महिला-विरोधी नीतियों को भारत लाने की अनुमति दी गई, और सरकार तालिबान प्रतिनिधिमंडल का पूर्ण रूप से आधिकारिक स्वागत कर रही है. यह विवेकपूर्ण कूटनीति नहीं, बल्कि विनम्र परास्तता है.’

वरिष्ठ पत्रकार पौलोमी साहा ने कहा, ‘तालिबान सरकार को भारतीय धरती पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की अनुमति क्यों दी जा रही है, जहां वे हमारी महिला पत्रकारों के साथ भेदभाव करते हैं और उन्हें अंदर (प्रेस वार्ता में) नहीं जाने देते?’

(देवीरूपा मित्रा के इनपुट के साथ.)