दलितों पर अत्याचार: मध्य प्रदेश में पेशाब पीने, तो लखनऊ में ‘ज़मीन चाटने’ को मजबूर किया गया

यूपी और मध्य प्रदेश में दलितों के ख़िलाफ़ अत्याचार की दो अलग-अलग घटनाएं सामने आई हैं, जहां लखनऊ में एक दलित वृद्ध के साथ बदसलूकी हुई तो भिंड में एक व्यक्ति के साथ मातपित कर पेशाब पीने को मजबूर किया गया. राजनीतिक दलों ने इसे लेकर दोनों राज्यों की भाजपा सरकारों पर 'हाशिए पर पड़े समुदायों की गरिमा की रक्षा करने में विफल रहने' का आरोप लगाया है.

(इलस्ट्रेशन: परिप्लब चक्रवर्ती/द वायर)

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में दलितों के खिलाफ अत्याचार की दो अलग-अलग घटनाएं सामने आई हैं. इसे लेकर राजनीतिक दलों ने दोनों राज्यों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकारों पर ‘हाशिए पर पड़े समुदायों की गरिमा की रक्षा करने में विफल रहने’ का आरोप लगाया है.

हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक, यूपी के मामले में एक 60 वर्षीय दलित व्यक्ति को दीपावली की शाम (20 अक्टबूर) को लखनऊ के बाहरी इलाके में एक मंदिर के पास पेशाब करने के आरोप में कथित तौर पर ज़मीन चाटने के लिए मजबूर किया गया.

इस संंबंध में पुलिस ने बताया कि स्वामी कांत उर्फ़ ‘पम्मू’ नामक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और उसके खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है.

शिकायत के अनुसार, पीड़ित रामपाल रावत काकोरी स्थित शीतला माता मंदिर में पानी पी रहे थे, तभी आरोपियों ने उन पर परिसर के पास पेशाब करने का आरोप लगाते हुए उनसे बहस की. रामपाल ने सफाई दी कि उन्होंने पेशाब नहीं किया, बल्कि पानी गिर गया था. लेकिन आरोपियों ने कथित तौर पर उन्हें जातिसूचक गालियां दीं और ज़मीन चाटने पर मजबूर किया.

रावत के पोते मुकेश कुमार ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि उनके दादा को सांस लेने में तकलीफ़ है और हो सकता है कि खांसते हुए गलती से पेशाब कर दिया हो. कुमार ने कहा, ‘जब पम्मू ने उन पर दबाव डाला तो वे डर गए और उनकी बात मान ली. बाद में उन्हें उस जगह को धोने के लिए मजबूर किया गया.’

पुलिस सूत्रों ने बताया कि इस बात की जांच चल रही है कि क्या पीड़ित को वाकई ज़मीन चाटने के लिए मजबूर किया गया था या सिर्फ़ छूने के लिए.

एक पुलिस अधिकारी ने पीटीआई को बताया, ‘पीड़ित का कहना है कि उन्हें ज़मीन चाटने के लिए मजबूर किया गया, जबकि आरोपी का दावा है कि उन्होंने उन्हें सिर्फ़ उस जगह को छूने के लिए कहा था.’

इस घटना पर तीखी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं. समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इस कृत्य की निंदा करते हुए इसे ‘अमानवीय और अपमानजनक’ बताया.

उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, ‘किसी की गलती का मतलब यह नहीं कि उसे इतनी अपमानजनक सज़ा दी जाए. परिवर्तन ही परिवर्तन लाएगा!’

वहीं, कांग्रेस ने आरोपी पर आरएसएस कार्यकर्ता होने का आरोप लगाते हुए इस घटना को ‘मानवता पर कलंक’ बताया. पार्टी ने भाजपा और आरएसएस पर ‘दलित विरोधी’ रवैया अपनाने का भी आरोप लगाया.

हालांकि, पुलिस ने इस आरोप का खंडन करते हुए कहा कि आरोपी का ‘किसी भी संगठन से कोई संबंध नहीं है.’

मध्य प्रदेश में भी ऐसी ही भयावह घटना

एक अन्य घटना में मध्य प्रदेश के भिंड जिले में एक 25 वर्षीय दलित युवक का अपहरण कर उनकी पिटाई की गई और फिर कथित रूप से उन्हें पेशाब पीने के लिए मजबूर किया गया.

पुलिस के अनुसार, पीड़ित को ग्वालियर स्थित उनके ससुराल से अगवा कर एक एसयूवी गाड़ी में भिंड ले जाया गया.

अधिकारी ने बताया कि प्रथमदृष्टया मुख्य आरोपी ने दलित युवक को इसलिए प्रताड़ित किया क्योंकि उन्होंने उनके यहां ड्राइवर के रूप में काम करना छोड़ दिया था.

इस संबंध में पीड़ित ने मीडिया को बताया, ‘उन्होंने मुझे प्लास्टिक के पाइप से पीटा और बोतल से पेशाब पीने के लिए मजबूर किया.’ उन्होंने आगे बताया कि बाद में उन्हें लोहे की जंजीर से बांध दिया गया और फिर से अपमानित किया गया. पीड़ित का फिलहाल स्थानीय अस्पताल में इलाज चल रहा है.

पुलिस के अनुसार, इस घटना के संबंध में सोनू बरुआ, आलोक शर्मा और छोटू ओझा नामक आरोपियों को एससी/एसटी अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया है.

मध्य प्रदेश में दलितों पर हिंसा लगातार जारी है

उल्लेखनीय है कि इस साल की शुरुआत में कटनी में अवैध खनन का विरोध करने पर एक दलित युवक की पिटाई की गई थी. वहीं, उज्जैन में एक अन्य को पीटकर पेशाब पीने के लिए मजबूर किया गया था.

इससे पहले 2023 में सीधी जिले का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें एक व्यक्ति एक आदिवासी युवक पर पेशाब करता हुआ दिखाई दे रहा था. इस घटना ने राष्ट्रीय स्तर पर आक्रोश पैदा किया था, जिसके बाद सरकार द्वारा सुधार के वादे किए गए थे.