नई दिल्ली: मध्य प्रदेश पुलिस ने धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोपी एक युवा समूह के संस्थापक के खिलाफ अपने आरोपपत्र में जिन सबूतों का हवाला दिया है, उनमें फासीवाद पर 88 पेज की हिंदी किताब और कम्युनिस्ट आंदोलन पर 70 पेज की किताब शामिल हैं.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, हाउ ऑट वी लिव (How Ought We Live) (हाउल) के संस्थापक, कार्यकर्ता सौरव बनर्जी पर जुलाई में धर्म परिवर्तन की अफवाहों के बाद दक्षिणपंथी भीड़ द्वारा कथित तौर पर हमला किया गया था. मई में एक स्थानीय अखबार द्वारा पहले पन्ने पर एक खबर प्रकाशित करने के बाद समूह पर विवाद खड़ा हो गया, जिसमें उन पर ‘हिंदू विरोधी गतिविधियों’ का आरोप लगाया गया था.
24 जुलाई को हाउल ने आरोपों का खंडन करने के लिए इंदौर प्रेस क्लब में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की. स्थानीय दक्षिणपंथी संगठनों द्वारा कथित तौर पर इस कार्यक्रम में बाधा डाली गई और बनर्जी पर कार्यक्रम स्थल के अंदर हमला किया गया, जहां कई अन्य सदस्य वहां से भाग गए. 26 जुलाई को उनके खिलाफ एक एफआईआर दर्ज की गई और उन्हें हिरासत में लिया गया.
इसके बाद जांच अधिकारी मयंक वर्मा द्वारा 23 सितंबर को देवास की एक निचली अदालत में पेश किए गए आरोपपत्र में बनर्जी पर धार्मिक भावनाओं को कथित रूप से आहत करने के लिए भारतीय न्याय संहिता की धारा 299 और 302 के तहत मामला दर्ज किया गया है. पिछले हफ्ते मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी थी.
पुलिस ने सबूत के तौर पर एक ‘फासीवाद से संबंधित हिंदी पुस्तक’ और एक अन्य ‘कम्युनिस्ट आंदोलन और फासीवाद’ पर किताब की जब्ती को सूचीबद्ध किया.
अखबार के अनुसार, हाउल के सदस्य प्रणय त्रिपाठी ने कहा, ‘हमारे पास दर्शन और इतिहास पर पुस्तकों की एक विस्तृत श्रृंखला है, जिसमें कई हिंदी अनुवाद भी शामिल हैं.’
आरोप पत्र में मुख्य शिकायतकर्ता सचिन बामनिया और उनके भाई पंकज का दावा है कि जब बनर्जी ने कथित तौर पर भगवान राम और सीता का अपमान किया तो वे वहां मौजूद थे. अन्य गवाहों ने भी इसी तरह के बयान दिए. हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वे वहां नहीं थे.
प्रत्यक्षदर्शियों ने दावा किया कि बनर्जी पांच साल से गांव में सक्रिय थे, उन्होंने उनके समूह पर ‘मादक द्रव्यों के सेवन’ और रविवार की बैठकों में स्थानीय लोगों को आमंत्रित करने का आरोप लगाया. एक अन्य ग्रामीण देवराज ने बनर्जी पर उनकी कृषि भूमि पर अवैध रूप से निर्माण करने और किराया समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए उन्हें गुमराह करने का आरोप लगाया.
पुलिस ने यह भी आरोप लगाया कि बनर्जी के खातों में ‘अमेरिकी डॉलर में धन प्राप्त हुआ’ और संभावित विदेशी फंडिंग की जांच के लिए और समय मांगा.
बनर्जी के वकील ज्वलंत सिंह चौहान ने सभी आरोपों से इनकार किया.
उन्होंने कहा, ‘मेरे मुवक्किल, जो जन्म से हिंदू हैं, पर झूठा आरोप लगाया गया है. उन्होंने कभी भी किसी देवता के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी नहीं की. विदेशी भुगतान वैध अनुवाद कार्य के लिए था, जिसका टैक्स फाइलिंग में पूरी तरह से खुलासा किया गया है. एफआईआर में धर्मांतरण का कोई उल्लेख नहीं है – दावे दुर्भावनापूर्ण हैं और सत्ता का स्पष्ट दुरुपयोग हैं.’
(नोट: ख़बर को प्रकाशन के बाद हाउल पदाधिकारियों के पद जोड़ने के लिए संपादित किया गया है.)
