नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (27 अक्टूबर) को मुंबई मेट्रो परियोजनाओं के लिए प्रतिपूरक वनरोपण स्थलों के निराशाजनक क्रियान्वयन और रखरखाव को लेकर महाराष्ट्र सरकार की खिंचाई की.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, हालांकि राज्य सरकार ने पहले अदालत को मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एमएमआरसीएल) की कई परियोजनाओं को अनुमति देने के लिए राजी किया था, लेकिन अदालत ने पाया कि मुंबई मेट्रो परियोजनाओं के लिए प्रतिपूरक वनरोपण योजना के तहत लगाए गए 20,460 पेड़ों में से केवल 50% ही बचे हैं.
इससे पहले अदालत ने पूर्व-पश्चिम कनेक्टिविटी परियोजना के तहत सुरंगनुमा गोरेगांव-मुलुंड सड़क संपर्क को भी सैद्धांतिक मंजूरी दे दी थी.
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) बीआर गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा, ‘अगर वनरोपण योजना के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन की यही स्थिति रही, तो हम मेट्रो परियोजनाओं और स्टेशनों के लिए पेड़ों की कटाई की सभी पिछली अनुमतियों को वापस ले लेंगे.’
संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के उप निदेशक ने अदालत को बताया कि ज़्यादातर पौधे जो बचे हैं, उनकी ऊंचाई एक से बीस फुट के बीच है, जबकि कुछ पौधे नष्ट हो गए हैं. पौधों के नष्ट होने के कारणों में वनीकरण स्थलों की सुरक्षा और रखरखाव का अभाव और यह तथ्य भी शामिल है कि ज़्यादातर पौधों में मिट्टी पथरीली होने के कारण उर्वरता नहीं है.
अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश गवई ने कहा, ‘यह राज्य और उसके अधिकारियों की घोर लापरवाही है. काटे गए पेड़ों की जगह लगाए गए पेड़ इसलिए नहीं बच पाए क्योंकि इस्तेमाल की गई मिट्टी टिकाऊ नहीं थी और लगाए गए पेड़ों की देखभाल नहीं की गई. सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि वनीकरण योजनाओं का क्रियान्वयन ठीक से हो, न कि इस तरह कि अधिकारियों की लापरवाही और देखभाल के अभाव में उनमें से आधे नष्ट हो जाएं. क्या वनीकरण योजनाओं का क्रियान्वयन इसी तरह होता है?’
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सुरंग वाली सड़क के प्रवेश और निकास बिंदुओं पर पेड़ों की कटाई के लिए बीएमसी का आवेदन तब तक लंबित रहेगा जब तक राज्य के मुख्य सचिव 10 नवंबर तक या उससे पहले हलफनामा दाखिल नहीं कर देते.
हलफनामे में प्रतिपूरक वनरोपण योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए उठाए जाने वाले कदमों का विवरण देना होगा.
मुख्य न्यायाधीश गवई ने कहा, ‘जब तक एक प्रभावी कार्यान्वयन योजना लागू नहीं की जाती, हम बीएमसी और एमएमआरसीएल को दी गई सभी अनुमतियां वापस ले लेंगे.’
आरे कॉलोनी में बनने वाले मेट्रो कार शेड बनाने के लिए पेड़ों की कटाई को लेकर हुआ था विवाद
मालूम हो कि मुंबई की आरे कॉलोनी में बनने वाले मेट्रो कार शेड को लेकर मुंबई मेट्रो रेल कॉरपोरेशन द्वारा पेड़ों की कटाई को लेकर काफी विवाद रहा है. कॉलोनी में पेड़ों की कटाई का हरित कार्यकर्ताओं और निवासियों ने विरोध किया था.
अक्टूबर 2019 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने आरे कॉलोनी को जंगल घोषित करने से इनकार कर मुंबई नगर निगम के उस फैसले को रद्द करने से इनकार कर दिया था, जिसमें मेट्रो कार शेड स्थापित करने के लिए ग्रीन जोन में 2,600 से अधिक पेड़ों को काटने की अनुमति दी गई थी.
गौरतलब है कि आरे वन क्षेत्र मुंबई के उपनगर गोरेगांव में एक हरित क्षेत्र है. 1,800 एकड़ में फैले इस वन क्षेत्र को शहर का ‘ग्रीन लंग्स’ भी कहा जाता है. आरे वन में तेंदुओं के अलावा जीव-जंतुओं की करीब 300 प्रजातियां पाई जाती हैं. यह संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान से जुड़ा है.
पर्यावरण कार्यकर्ताओं के अनुसार, वन न केवल शहर के लोगों को ताजा हवा देते हैं, बल्कि यह वन्यजीवों के लिए प्रमुख प्राकृतिक वास है और इनमें से कुछ तो स्थानिक प्रजातियां हैं. इस वन में करीब पांच लाख पेड़ हैं और कई नदियां और झीलें यहां से गुजरती हैं.
महाराष्ट्र की एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सरकार ने बीते 21 जुलाई को आरे कॉलोनी में मेट्रो-3 कार शेड के निर्माण पर लगी रोक हटा दी थी. बीते 30 जून को कार्यभार संभालने के तुरंत बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने राज्य प्रशासन को कांजुरमार्ग के बजाय आरे कॉलोनी में मेट्रो-थ्री कार शेड बनाने का निर्देश दिया था.
उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली पिछली महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार ने पर्यावरण संरक्षण के आधार पर प्रस्तावित कार शेड साइट को आरे कॉलोनी से कांजुरमार्ग में स्थानांतरित कर दिया था, लेकिन यह मुद्दा कानूनी विवाद में उलझ गया था.
2019 में तत्कालीन उद्धव ठाकरे सरकार ने पर्यावरण संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए आरे मेट्रो रेल कार शेड पर काम रोक दिया था.
आरे क्षेत्र में कार शेड स्थापित करने के फैसले को पर्यावरणविदों के विरोध का सामना करना पड़ा था, क्योंकि इस परियोजना में सैकड़ों पेड़ों को काटा जाना था. बाद में ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार ने परियोजना को कांजुरमार्ग में स्थानांतरित करने की घोषणा की थी.
तब फडणवीस ने कहा था, ‘अगर कार शेड को कांजुरमार्ग में स्थानांतरित किया जाता है तो इससे और अधिक संख्या में पेड़ कटेंगे, परियोजना में देरी होगी और करोड़ों रुपये बर्बाद होंगे.’ हालांकि, बाद में कांजुरमार्ग में कार शेड निर्माण करने की योजना अटक गई थी.
बॉम्बे हाईकोर्ट ने 14 दिसंबर 2020 को मुंबई उपनगरीय जिला कलेक्टर द्वारा कांजुरमार्ग क्षेत्र में मेट्रो कार शेड के निर्माण के लिए 102 एकड़ जमीन के आवंटन के आदेश पर रोक लगा दी थी. अदालत ने अधिकारियों को उक्त जमीन पर कोई भी निर्माण कार्य करने से भी रोक दिया था.
इससे पहले अक्टूबर 2019 में जब देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री थे, तब मुंबई मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड ने कार शेड के निर्माण के लिए क्षेत्र में 2,000 से अधिक पेड़ों को काट दिया था. क्षेत्र में पेड़ों की कटाई को चुनौती देने संबंधी याचिकाओं को बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा खारिज करने के बाद केवल 24 घंटों के भीतर पेड़ों को काट दिया गया था.
पेड़ों की कटाई के बाद पूरे शहर में स्थानीय आदिवासियों ने विरोध प्रदर्शन किए थे. तब पुलिस ने आरे कॉलोनी में पेड़ों की कटाई का विरोध कर रहे पर्यावरण कार्यकर्ताओं समेत कम से कम 29 लोगों को गिरफ्तार किया था.
बता दें कि मेट्रो-3 कार शेड को 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चह्वाण ने सबसे पहले आरे में बनाने का प्रस्ताव दिया था, जिसे स्थानीय एनजीओ वनशक्ति ने बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. इसके बाद फडणवीस भी इसी प्रस्ताव पर आगे बढ़े, लेकिन पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने कार शेड के लिए आरे में पेड़ काटे जाने का कड़ा विरोध किया था.
