जेएनयू छात्र संघ चुनाव में वाम एकता प्रभावी, सेंट्रल पैनल के सभी चार पदों पर जीत

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में केंद्रीय पैनल के सभी चार पदों पर वामपंथी संयुक्त मोर्चा ने जीत हासिल की. इस जीत के साथ ही संस्थान में एक बार फिर छात्र राजनीति में लेफ्ट दल प्रभावी भूमिका में आ गए हैं और चार सदस्यीय पैनल में दक्षिणपंथियों की उपस्थिति ख़त्म हो गई.

इस जीत के साथ ही जेएनयू छात्र राजनीति में एक बार फिर पूरी तरह से वामपंथ का दबदबा कायम हो गया है.

नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) छात्र संघ चुनाव में गुरुवार (6 नवंबर) को केंद्रीय पैनल के सभी चार पदों पर वामपंथी संयुक्त मोर्चा ने जीत हासिल की.

इस जीत से संस्थान में एक बार फिर छात्र राजनीति में लेफ्ट प्रभावी भूमिका में आ चुका है और चार सदस्यीय पैनल में दक्षिणपंथियों की उपस्थिति खत्म हो गई.

छात्र संघ चुनाव के नतीजों में अदिति मिश्रा अध्यक्ष, के. गोपिका बाबू उपाध्यक्ष, सुनील यादव महासचिव और दानिश अली संयुक्त सचिव चुने गए हैं.

डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट के अनुसार, इस चुनाव में वामपंथी संयुक्त मोर्चा की जीत का अंतर काफी महत्वपूर्ण रहा. अध्यक्ष पद के लिए ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की उम्मीदवार अदिति मिश्रा ने 1,861 वोट हासिल किए. उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के विकास पटेल को हराया, जिन्हें 1,447 वोट मिले.

उपाध्यक्ष पद पर स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई ) की के. गोपिका ने 2,966 वोटों से बड़ी जीत दर्ज की. उन्होंने एबीवीपी की तान्या कुमारी को मात दी, जिन्हें 1,730 वोट मिले.

महासचिव पद पर सुनील यादव डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स फेडरेशन (डीएसएफ) ने एबीवीपी के राजेश्वर कांत दुबे को हराया. वहीं, संयुक्त सचिव पद पर ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की दानिश अली को 1,991 वोट मिले. उन्होंने एबीवीपी के अनुज दमारा को हराया, जिन्हें 1,762 वोट मिले.

मालूम हो कि जेएनयू के छात्र संघ के केंद्रीय पैनल और पार्षद पदों के लिए मंगलवार को चुनाव हुए थे. समाचार एजेंसी पीटीआई ने बताया कि कुल 9,043 पात्र छात्रों में से लगभग 67% ने मतदान किया.

संयुक्त वाम मोर्चा एकजुट दिखाई दिया

ज्ञात हो कि इससे पहले अप्रैल में हुए पिछले छात्र संघ चुनावों में वामपंथी समूहों के बीच फूट देखने को मिली थी. हालांकि, इस बार ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (आइसा), स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) और डेमोक्रेटिक स्टूडेंट फेडरेशन एकजुट नज़र आए.

सेंटल पैनल के चार पदों में से दो पदों पर जहां आइसा प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की, तो वहीं एसएफआई और डीएसएफ के प्रत्याशियों को एक-एक पद पर जीत मिली.

मालूम हो कि यह छात्रसंघ चुनाव के परिणाम एवीबीपी के लिए एक झटका माना जा रहा है. अप्रैल में हुए पिछले चुनावों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबद्ध एबीवीपी ने संयुक्त सचिव पद जीता था, लेकिन इस बार दक्षिणपंथी छात्र संगठन की ओर से केंद्रीय पैनल में कोई छात्र नेता नहीं पहुंच सका. हालांकि, इसके कुछ उम्मीदवार मामूली अंतर से हार गए.

इस बीच, कांग्रेस के छात्र संगठन नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) को भी इस चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा है.

जीत हासिल करने के बाद एसएफआई ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि यह चुनाव परिणाम ‘केवल संख्यात्मक जीत नहीं है, बल्कि नफरत, सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और भगवाकरण की राजनीति के खिलाफ एक सख्त जवाब है.’

पीटीआई से बात करते हुए डीएसएफ के सुनील यादव ने कहा कि जेएनयू परिसर में ‘सबसे बड़ा मुद्दा फंड में कटौती’ का रहा है.

उन्होंने कहा, ‘परिसर में सबसे बड़ा मुद्दा फंडिंग में कटौती है. जब से भाजपा राष्ट्रीय शिक्षा नीति लेकर आई है… कई सार्वजनिक विश्वविद्यालयों को निजीकरण की ओर धकेला जा रहा है, यही वजह है कि हर साल फंड कम हो रहा है. इसलिए, हमारी पहली लड़ाई कैंपस के लिए सरकार से फंड लाने की है.’