नई दिल्ली: बिहार में मुसलमान कुल आबादी के करीब 18 फ़ीसदी है, लेकिन राजनीति में उनकी हिस्सेदारी बेहद सीमित है. ख़ासकर मुस्लिम महिलाओं की. पूरे चुनाव में सभी प्रमुख पार्टियों ने मिलकर 79 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया है. उनमें से केवल दो महिलाएं हैं.
इन 79 में 23 टिकट असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम और 21 प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज ने दिए हैं- लेकिन दोनों ने ही किसी महिला को उम्मीदवार नहीं बनाया.
यानी दोनों बड़े गठबंधनों ने कुल 486 टिकट दिए हैं, उनमें से सिर्फ़ 35 यानी करीब 7.2 प्रतिशत मुसलमान उम्मीदवार हैं.
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने 18 मुसलमान उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है, जबकि कांग्रेस ने अपने खाते की 61 सीटों में से 10 सीटों पर मुस्लिम प्रत्याशी उतारे हैं. महागठबंधन का हिस्सा वाम दलों ने दो उम्मीदवारों को टिकट दिया है.
उधर, मुसलमानों के हित में काम करने का दावा करने वाली सत्तारूढ़ जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने केवल चार टिकट मुस्लिम उम्मीदवारों को दिए हैं. जदयू के साथ गठबंधन में शामिल लोजपा (राम विलास) ने एक मुस्लिम उम्मीदवार को मौका दिया, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने हिस्से की किसी भी सीट पर इस अल्पसंख्यक समुदाय को टिकट नहीं दिया.
असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने कुल 25 उम्मीदवार खड़े किए हैं, जिनमें से 23 मुसलमान हैं. मगर इनमें भी कोई महिला उम्मीदवार नहीं है.
चुनाव के पहले 40 प्रतिशत महिला प्रत्याशी उतारने का दावा करने वाली जन सुराज ने महज 25 महिलाओं को टिकट दिया, यानी उसके कुल उम्मीदवारों (243) में महिलाओं की हिस्सेदारी मात्र 10 प्रतिशत रही. लेकिन इन 25 में एक भी मुस्लिम महिला नहीं है.
वहीं इन्हीं प्रमुख पार्टियों ने कुल मिला कर 88 महिला प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है. जन सुराज ने 25, राजद ने 23, भाजपा और जदयू ने 13-13, लोजपा (राम विलास) ने 6, कांग्रेस ने 5, जीतन राम मांझी की पार्टी हिंदुस्तान आवाम मोर्चा ने 2, मुकेश सहनी की वीआईपी ने 1 महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया.
इनमें निर्दलीय प्रत्याशी शामिल नहीं हैं.
कौन हैं 2 मुस्लिम महिला प्रत्याशी
सीमांचल क्षेत्र की अररिया विधानसभा सीट से जदयू ने शगुफ्ता अज़ीम को उम्मीदवार बनाया है. उन्होंने 2020 के चुनाव में भी इसी सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन कांग्रेस उम्मीदवार अवीदुर रहमान से हार गई थीं. उस चुनाव में अज़ीम को 55,118 वोट (29.33%) मिले थे, जबकि रहमान को 1.03 लाख वोट (54.84%) हासिल हुए थे.
अररिया में मतदान दूसरे चरण में यानी 11 नवंबर को होना है. वह एनडीए की ओर से एकमात्र मुस्लिम महिला प्रत्याशी हैं.
43 वर्षीय शगुफ्ता ने पटना यूनिवर्सिटी से एमए तक पढ़ाई की है. अपने चुनाव प्रचार में सबसे ज्यादा वे जिस मुद्दे पर बात करती हैं वो महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण है.
मीडिया से बातचीत के दौरान वह कहती हैं, ‘नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार सरकार का मुख्य ध्यान महिला सुरक्षा पर है.. मैं इसी को आगे बढ़ाते हुए यहां की बेटियों का आवाज़ बन कर आगे जाना चाहती हूं. हमारी बेटीयों के साथ कोई अन्याय ना हो, कोई अत्याचार ना हो.. इसके लिए मेरी आवाज़ हमेशा बुलंद रहेगी.’
महिलाओं की सुरक्षा और उनके उत्थान के अलावे वे बेहतर शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य और बाढ़ प्रभावित अररिया में इस समस्या का समाधान पर काम करने की बात करती हैं.

दूसरी महिला उम्मीदवार हैं, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की इशरत परवीन, जो कटिहार ज़िले की प्राणपुर विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में हैं. इस सीट पर दूसरे चरण में, 11 नवंबर को मतदान होगा.
मुस्लिम-यादव समीकरण के बूते चुनाव लड़ने वाली राजद ने इस बार कुल 24 महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया है, हालांकि इशरत परवीन अकेली मुस्लिम महिला प्रत्याशी हैं.
41 वर्षीय इशरत परवीन दसवीं पास है. वे कृषि, सामाजिक कार्य और राजनीति से जुड़ी हुई हैं. उनके खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज है.
इशरत परवीन 2006 में जिला परिषद सदस्य चुनी गईं थीं. इसके बाद साल 2010 में उन्होंने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा, जिसमें उन्हें 49,000 वोट मिले और वे सिर्फ़ 700 वोटों के अंतर से हार गईं.
इसके बाद 2015 और 2020 में उन्होंने बतौर निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरकर मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई. 2020 में वे तीसरे स्थान पर रहीं और उन्हें लगभग 20,000 वोट मिले. इस बार राजद ने उन्हें टिकट दिया है और उनका सीधा मुकाबला भाजपा की निशा सिंह से है.

मुस्लिम महिलाओं का बिहार की राजनीति में प्रतिनिधित्व
मुसलमानों के उत्थान के लिए काम करने का दावा करने वाली जदयू भूले-भटके ही मुस्लिम महिलाओं को टिकट देती है. 2010 में पार्टी ने दो मुस्लिम महिलाओं को टिकट दिया था – रज़िया ख़ातून को पूर्वी चंपारण के कल्याणपुर और परवीन अमानुल्लाह को बेगूसराय के साहेबपुर कमाल से. दोनों प्रत्याशी विधायक चुनी गई थीं. परवीन अमानुल्लाह बाद में बिहार सरकार में मंत्री भी बनीं.
साल 2020 में जदयू ने दो मुसलमान महिलाओं को मैदान में उतारा था. महुआ से आशमा परवीन और अररिया सीट से शगुफ्ता अज़ीम को टिकट मिला था. हालांकि दोनों ही हार गईं थीं.
इससे पहले, नवंबर 2005 के चुनाव में जदयू ने भागलपुर की तत्कालीन मेयर कहकशां परवीन को कहलगांव सीट से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सदानंद सिंह के ख़िलाफ़ मैदान में उतारा था. हालांकि वह यह चुनाव हार गईं थी, लेकिन नीतीश कुमार ने बाद में उन्हें राज्यसभा भेजा था. साल 2014 से 2020 तक वह राज्यसभा सदस्य रहीं.
ब्यूला डोज़ा बिहार की एक अन्य प्रमुख मुस्लिम नेता रही हैं. वे सीमांचल क्षेत्र में कटिहार ज़िले की बरसोई सीट (अब बलरामपुर) से 1972, 1980 और 1985 में कांग्रेस की टिकिट पर विधायक चुनी गईं थी.
दूसरे चरण का मतदान 11 नवंबर को
बिहार में विधानसभा के चुनाव जारी हैं. 6 नवंबर को हुए पहले चरण के मतदान में रिकॉर्ड 64.66% मतदान दर्ज किया गया. दूसरे चरण का मतदान 11 नवंबर को होगा, जबकि मतगणना 14 नवंबर को निर्धारित है.
राज्य में मुख्य मुकाबला जदयू और भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन तथा राजद के नेतृत्व वाले महागठबंधन के बीच है.
(इस ख़बर को प्रकाशन के बाद संशोधित किया गया है.)
