नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को सोमवार (17 नवंबर) को पालघर में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) के पूर्व पदाधिकारी को पार्टी में शामिल करने के अपने फैसले पर तुरंत पुनर्विचार करना पड़ा, जबकि स्थानीय निकाय चुनावों से ठीक 24 घंटे पहले ही उन्हें पार्टी में शामिल किया गया था.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह फैसला काशीनाथ चौधरी नाम के व्यक्ति से संबंधित है, जिन्हें भाजपा ने पहले कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान पालघर में दो साधुओं और उनके ड्राइवर की लिंचिंग का मुख्य आरोपी बताया था.
गौरतलब है कि पालघर के गढ़चिंचले गांव में 16 अप्रैल, 2020 को घटना घटी थी, जिसमें मुंबई से कार में सवार होकर एक अंतिम संस्कार में शामिल होने सूरत जा रहे दो साधुओं और उनके चालक की भीड़ ने बच्चा चोर होने के शक में पीट-पीटकर हत्या कर दी थी.
तत्कालीन महाविकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार के समय हुई इस लिंचिंग ने राज्य में राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया था. उस समय प्रमुख विपक्षी दल भाजपा ने एमवीए सरकार पर चौधरी को बचाने का आरोप लगाते हुए ‘जन आक्रोश यात्रा’ निकाली थी. उन्होंने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच की भी मांग की थी.
चौधरी उस समय अविभाजित राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के तालुका अध्यक्ष थे.
सोमवार को कांग्रेस ने भाजपा पर उसके ‘दोहरे मापदंड’ का आरोप लगाया. इस घटना का एक वीडियो शेयर करते हुए कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर कहा, ‘भाजपा ने एक बार चौधरी को मॉब लिंचिंग मामले में मुख्य आरोपी बताया था, लेकिन अब उन्हें पार्टी में जगह दे रही है. यह भाजपा का दोहरा मापदंड है.’
एनसीपी (श.पवार) नेता रोहित पवार ने भी सत्तारूढ़ पार्टी पर निशाना साधा.
उन्होंने कहा, ‘भाजपा ने उन्हें पार्टी में शामिल करने से पहले ज़रूर वॉशिंग मशीन में डाला होगा. क्या इसका मतलब यह है कि पालघर हत्याकांड के पीछे भाजपा का हाथ है? भाजपा का हिंदुत्व झूठा है.’
बचाव में आई भाजपा
विपक्ष के हमले के बाद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चह्वाण ने चौधरी के पार्टी में प्रवेश पर रोक लगा दी. हालांकि उन्होंने तर्क दिया कि जांच एजेंसियों द्वारा दर्ज किसी भी एफआईआर में चौधरी का नाम नहीं था.
भाजपा के मीडिया प्रकोष्ठ के प्रमुख नवनाथ बान ने कहा, ‘पालघर साधुओं की हत्या मामले में काशीनाथ चौधरी को गवाह के तौर पर बुलाया गया था, लेकिन जांच एजेंसियों ने उन्हें आरोपी नहीं बनाया. आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, उनका नाम किसी भी एफआईआर या आरोपपत्र में नहीं है. इन सबकी पुष्टि के बाद ही उन्हें पार्टी में शामिल करने का फैसला लिया गया.’
बान ने रोहित पर गंदी राजनीति करने का आरोप लगाया.
उन्होंने कहा, ‘जब चौधरी एनसीपी (श.पवार) में थे, तब उन्हें कुछ नहीं लगा. अब जब वह भाजपा में शामिल हो गए हैं, तो रोहित अचानक उन्हें पालघर हत्याकांड का मुख्य आरोपी बना रहे हैं. चौधरी का नाम सीआईडी, सीबीआई या पुलिस द्वारा दायर किसी भी आरोपपत्र में आरोपी के रूप में नहीं है और इसीलिए वह भाजपा में शामिल हुए.’
बान ने आगे कहा, ‘हालांकि, मामले की संवेदनशीलता और सोशल मीडिया व मीडिया में चौधरी के प्रवेश को लेकर व्यापक चर्चा को देखते हुए, उनकी पार्टी में शामिल होने पर रोक लगाने का फैसला लिया गया.’
उधर, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने चौधरी को पार्टी में शामिल करने के फैसले को सही ठहराते हुए कहा, ‘सबसे पहले यह फैसला स्थानीय स्तर पर लिया गया था. जब तक वह उनके (एमवीए) साथ थे, कोई आरोप नहीं लगा और वह बेदाग़ थे. आज, जब वह हमारे साथ आए, तो वह बुरे निकले.’
फडणवीस ने यह भी कहा कि जांच पूरी हो गई है. उन्होंने आगे कहा, ‘स्थानीय इकाई ने मुझे बताया कि उन्होंने सभी विवरणों की पुष्टि करने के बाद ही यह निर्णय लिया.’
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इस उलटफेर पर प्रतिक्रिया देते हुए रोहित पवार ने कहा कि इस फैसले की ‘हर जगह आलोचना’ होने के बाद ही पार्टी में शामिल होने को निलंबित किया गया है.
एनसीपी (श.पवार) सांसद सुप्रिया सुले ने कहा, ‘मुझे आश्चर्य हुआ कि जब वह व्यक्ति हमारे साथ था, तब एमवीए सरकार के कार्यकाल में भाजपा ने उस पर आरोप लगाए थे. वही भाजपा अब उसे पार्टी में शामिल कर रही है. भाजपा को इसका स्पष्टीकरण देना चाहिए. मैं उनका स्पष्टीकरण सुनने के लिए उत्सुक हूं… क्या काशीनाथ चौधरी पर लगाए गए आरोप झूठे थे? भाजपा को जवाब देना होगा.’
