एसआईआर: काम के ‘अत्यधिक’ दबाव को लेकर बीएलओ का प्रदर्शन, आत्महत्या से इस्तीफ़े तक के मामले

चुनाव आयोग के मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बीच इस प्रक्रिया में लगाए गए बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) बेहद तनाव से जूझ रहे हैं. देशभर में कई बीएलओ की आत्महत्या या अन्य कारणों से मौत की ख़बरें सामने आई हैं. वहीं, कई जगह इसके विरोध को लेकर भी आवाज़ें तेज़ हो गई हैं.

बूथ लेवल ऑफिसर मतदाता को वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) फॉर्म भरने में मदद करते हुए. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: चुनाव आयोग का मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का अभियान इन दिनों ज़ोरों पर है. इस बीच इस प्रक्रिया में लगाए गए बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) बेहद तनाव से जूझ रहे हैं. देशभर में कई बीएलओ की आत्महत्या या अन्य कारणों से मौत की खबरें सामने आई हैं. वहीं कई जगह इसके विरोध को लेकर भी आवाज़ें तेज़ हो गई हैं.

पश्चिम बंगाल में चल रही एसआईआर प्रक्रिया में लगे बीएलओ के एक वर्ग ने एसआईआर के कारण बढ़ते काम के दबाव के विरोध में सोमवार (24 नवंबर) को कोलकाता स्थित मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया.

द हिंदू की खबर के मुताबिक, यह विरोध प्रदर्शन उनके एक सहयोगी द्वारा एसआईआर प्रक्रिया के दबाव का हवाला देते हुए आत्महत्या करने के बाद किया गया. विरोध प्रदर्शन का आयोजन करने वाली बीएलओ अधिकार रक्षा समिति के सदस्यों ने उत्तरी कोलकाता के कॉलेज स्क्वायर से मध्य कोलकाता के डलहौजी स्थित निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय तक जुलूस निकाला.

सीईओ मनोज अग्रवाल से मुलाकात करने के लिए कार्यालय में घुसने की मांग करने पर प्रदर्शनकारियों की पुलिस से झड़प हुई. हालांकि, उन्हें अंदर जाने से रोकने के लिए सीईओ कार्यालय में सुरक्षा बढ़ा दी गई थी.

बीएलओ ताले और बेड़ियां लेकर प्रतीकात्मक रूप से उस भवन के मुख्य द्वार को बंद कर रहे थे, जिसमें सीईओ का कार्यालय स्थित है. उनका दावा था कि यह कार्यालय भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए काम कर रहा है.

सोमवार को सीईओ कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन के दौरान एक बीएलओ मधुमिता मंडल ने मीडिया से कहा, ‘बहुत दबाव है. हम स्कूलों में शिक्षक के तौर पर काम करते हैं, और हम पहले से ही परीक्षाओं के दबाव में दबे हुए हैं, जो सिर पर आ चुकी हैं.’

उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल के नादिया जिले में बीएलओ के रूप में कार्यरत 52 वर्षीय पैरा शिक्षिका रिंकू तरफदार की 22 नवंबर को आत्महत्या की खबर सामने आई थी, जिसके बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एसआईआर प्रक्रिया के दौरान जान की कीमत को लेकर सवाल उठाए थे.

पश्चिम बंगाल में बीएलओ ने ‘असहनीय कार्य दबाव’ के खिलाफ कई विरोध प्रदर्शन किए हैं.

एसआईआर प्रक्रिया के दौरान अब तक पश्चिम बंगाल में तीन बीएलओ की मृत्यु हो चुकी है. बताया गया है कि दो ने आत्महत्या की थी, जबकि एक की अप्राकृतिक परिस्थितियों में मृत्यु हो गई.

गौरतलब है कि गणना प्रपत्र वितरण प्रक्रिया 4 नवंबर से शुरू होने के बाद से पिछले 20 दिनों में बीएलओ ने कई प्रमुख चिंताएं उठाई हैं – चुनाव आयोग का धीमा पोर्टल, एडिट विकल्प का अभाव, अतिरिक्त डेटा प्रविष्टि कार्य, घर-घर जाकर जांच करना और राजनीतिक दबाव.

बीएलओ ने धीमी गति से पोर्टल चलाने का हवाला देते हुए गणना प्रपत्रों के डिजिटलीकरण की समय सीमा बढ़ाने की भी मांग की है, जो 4 दिसंबर तक पूरी होनी है.

‘दूरसंचार अधिकारियों से मुलाकात की’

इस संबंध में सीईओ मनोज कुमार अग्रवाल ने सोमवार को बताया कि उन्होंने डिजिटलीकरण कार्य के लिए निर्बाध इंटरनेट कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने हेतु दूरसंचार अधिकारियों और सभी सेवा प्रदाताओं के प्रतिनिधियों से मुलाकात की है.

उन्होंने कहा, ‘कुछ जगहों पर कुछ घंटों या कुछ दिनों के लिए कनेक्टिविटी की समस्या हो सकती है, लेकिन यह समस्या पूरे समय तक नहीं रहेगी. ब्लैक ज़ोन की संख्या बहुत कम है. हमने खंड विकास अधिकारियों और जिला चुनाव अधिकारियों से कहा है कि वाई-फाई कनेक्टिविटी वाले केंद्रीकृत स्थान बनाए जा सकते हैं. कई लोग एक साथ बैठकर वहाँ डिजिटलीकरण का काम कर सकते हैं.’

गोंडा में बीएलओ ने ज़हर खाया

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, गोंडा के एक प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक के पद पर तैनात विपिन यादव ने मंगलवार की सुबह संदिग्ध परिस्थितियों मे जहरीला पदार्थ खा लिया, जिसके बाद उन्हें गंभीर हालत में लखनऊ रेफर किया गया लेकिन यहां पहुंचने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

इस संबंध में साथी शिक्षकों ने बताया कि एसआईआर ड्यूटी में दबाव और अधिकारियों द्वारा फटकार लगाने के कारण वह तनाव में थे.

इस घटना के बाद शिक्षकों में आक्रोश है और प्राथमिक शिक्षक संघ ने मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया है. फिलहाल प्रशासनिक अधिकारी इस मामले पर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं.

वहीं, एक अलग मामले में नोएडा में निर्वाचन कार्य के दबाव और स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहीं गेझा के उच्च प्राथमिक विद्यालय की शिक्षिका पिंकी सिंह ने बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) ड्यूटी से परेशान होकर इस्तीफा दे दिया है.

उन्होंने निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिखकर पूछा है कि वह अपनी निर्वाचन सामग्री किस अधिकारी को सौंपें. पत्र में उन्होंने साफ कहा है अब न तो शिक्षण कार्य हो पाएगा और न ही बीएलओ का कार्य. निर्वाचन सामग्री किसे हैंडओवर करनी है, इस पर उन्होंने स्पष्ट दिशा-निर्देश देने का अनुरोध किया है.

केरल बीएलओ का ऑडियो क्लिप वायरल

इसके अलावा हाल ही में केरल से एक बीएलओ का ऑडियो क्लिप सामने आया है, जिसमें वह कथित तौर पर एसआईआर के काम के चलते होने वाले मानसिक दबाव की बात कर रहे हैं.

इस ऑडियो में बीएलओ का कहना है कि कई लोग फॉर्म ठीक से भरे बिना लौटा देते हैं, फिर उन्हें उन लोगों का बेसिक डेटा खुद भरना पड़ता है. उनके पास इंटरनेट की सुविधा तक नहीं है. चुनाव आयोग और उसके अधिकारी एसआईआर के नाम पर शारीरिक व मानसिक दोनों तरह से शोषण कर रहे हैं. यह बंधुआ मजदूरी से कम नहीं है.

बताया जा रहा है कि इसके बाद चुनाव आयोग ने संज्ञान लेते हुए बीएलओ को विकल्प दिया कि वे चाहें तो एसआईआर की जिम्मेदारी से मुक्त हो सकते हैं.

उल्लेखनीय है कि इस बीच उत्तर प्रदेश के कई ज़िलों में बीएलओ और अन्य कर्मचारियों के ख़िलाफ़ काम में लापरवाही और आधिकारिक आदेशों की अवहेलना के आरोप में मुक़दमे भी दर्ज करने की खबर सामने आई है. उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) बहराइच और बरेली में काम में लापरवाही का हवाला देते हुए बीएलओ और एसआईआर के काम में लगे अन्य कर्मियों पर कई मुक़दमे भी दर्ज किए गए हैं.

गौतम बुद्ध नगर में दर्ज की गई अलग-अलग एफआईआर में 60 से अधिक कर्मचारियों को नामजद किया गया है. इनमें बीएलओ, सहायक और सुपरवाइज़र शामिल हैं. इन कर्मचारियों पर बार-बार निर्देश, चेतावनी देने और नोटिस देने के बाद भी अपने क्षेत्र में एसआईआर से जुड़ा काम न करवाने और उच्च अधिकारियों के आदेश ना मानने के आरोप लगाए गए हैं.

गौरतलब है कि देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहे एसआईआर अभियान के बीच बीएलओ की मौतें चिंता का कारण बन गई हैं. खबरों के अनुसार, अभी तक छह राज्यों में लगभग 15 बीएलओ की मौत की खबर सामने आई है.