कांग्रेस सांसद ने संसद में कहा- मणिपुर पर चर्चा के लिए कम से कम 3-5 घंटे का समय दें

इनर मणिपुर से कांग्रेस सांसद बिमोल अकोईजाम ने लोकसभा में वंदे मातरम पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि देश के सामने कई असली मुद्दे हैं, लेकिन संसद में उन पर चर्चा नहीं होती. हम मणिपुर पर कम से कम तीन से पांच घंटे की चर्चा की मांग कर रहे हैं, लेकिन किसी को परवाह नहीं है.

कांग्रेस सासंद अंगोमचा बिमोल अकोईजाम (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: इनर मणिपुर के कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोईजाम ने सोमवार (8 दिसंबर) को लोकसभा में कहा कि देश के सामने कई ‘असली मुद्दे’ हैं, लेकिन संसद में उन पर चर्चा नहीं होती.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, लोकसभा में वंदे मातरम पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए उन्होंने कहा, ‘हम मणिपुर पर कम से कम तीन से पांच घंटे की चर्चा की मांग कर रहे हैं, लेकिन किसी को परवाह नहीं है.’

ज्ञात हो कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (8 दिसंबर) को लोकसभा में वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर बहस की शुरुआत की है. इस पर राजनीतिक दलों के बीच तीखी बहस हो रही है.

कांग्रेस सांसद अकोईजाम ने कहा कि इस बहस का राष्ट्रीय गीत से कोई लेना-देना नहीं है बल्कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं से है.

उन्होंने कहा, ‘बेरोज़गारी, प्रदूषण, मणिपुर संकट – यह सच है कि मणिपुर में अभी भी 65,000 लोग बेघर हैं, इस संकट की वजह से जो उस राज्य में सरकार के संवैधानिक व्यवस्था लागू करने में नाकाम रहने की वजह से हुआ है… हम इस पर चर्चा नहीं करते.’

गौरतलब है कि मई 2023 से अब तक राज्य में चल रही जातीय हिंसा में 260 से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं और हज़ारों लोग बेघर हो गए हैं. मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद फरवरी से मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू है.

उन्होंने कहा कि वंदे मातरम मनाने का असली मतलब ‘अपने संविधान में जो वादा हमने खुद से किया है, उसे निभाना’ है.

उन्होंने एक फेसबुक पोस्ट में सवाल किया कि ऐसा क्यों है कि देश का संसद मणिपुर संकट समेत असली और ज़रूरी मुद्दों पर समय नहीं दे पा रही है, जबकि वह ‘वंदे मातरम’ पर यादगार चर्चा के लिए 10 घंटे लगा सकती है?

मालूम हो कि इससे पहले पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने 8 दिसंबर को कहा था कि केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा उभरते मुद्दों, जिनमें इंडिगो एयरलाइंस में मचे उथल-पुथल से पैदा हुआ संकट भी शामिल है, को सुलझाने के बजाय ‘खोखले प्रतीकवाद’ में व्यस्त है.

उन्होंने सवाल किया था, ‘यह राजनीतिक ड्रामा नौकरियां कैसे पैदा करेगा, बढ़ती महंगाई को कैसे नियंत्रित करेगा या करोड़ों भारतीयों पर बोझ डाल रही वास्तविक और तात्कालिक समस्याओं से कैसे निपटेगा?’