करूर भगदड़ मामले में रिपोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के रवैये पर कहा- कुछ गड़बड़ है

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के करूर में अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके की एक रैली में हुई भगदड़ मामले को लेकर मद्रास हाईकोर्ट के रवैये पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि हाईकोर्ट में ‘कुछ गड़बड़ है.’ 27 सितंबर को हुए इस भगदड़ में 41 लोगों की मौत हो गई थी.

मद्रास हाईकोर्ट. (फोटो साभार: फेसबुक/@Chennaiungalkaiyil)

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (12 दिसंबर) को तमिलनाडु के करूर में हुए भगदड़ मामले को लेकर मद्रास हाईकोर्ट के रवैये पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि हाईकोर्ट में ‘कुछ गड़बड़ है.’

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी मद्रास हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा भेजी गई रिपोर्ट को देखने के बाद की.

जस्टिस जेके महेश्वरी और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने निर्देश दिया कि यह रिपोर्ट सभी पक्षों के वकीलों को उपलब्ध कराई जाए और उनसे इस पर प्रतिक्रिया मांगी जाए.

ज्ञात हो कि यह भगदड़ 27 सितंबर को तमिलनाडु के करूर ज़िले में अभिनेता विजय की राजनीतिक पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) की रैली के दौरान हुई थी, जिसमें 41 लोगों की मौत हो गई थी.

रिपोर्ट के मुताबिक, भगदड़ की स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिकाओं की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर सवाल उठाए कि मद्रास हाईकोर्ट ने मामले में किस तरह हस्तक्षेप किया.

शीर्ष अदालत ने यह भी सवाल किया था कि चेन्नई स्थित मद्रास हाईकोर्ट की प्रधान पीठ ने केवल राज्य पुलिस अधिकारियों को शामिल करते हुए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का निर्देश कैसे दे दिया, जबकि करूर ज़िला मदुरै पीठ के क्षेत्राधिकार में आता है.

अदालत ने यह सवाल भी उठाया था कि जब याचिका केवल राजनीतिक रैलियों के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) बनाने से संबंधित थी, तो उसी रिट याचिका में एसआईटी गठित करने का आदेश कैसे पारित किया गया.

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने जांच को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया था और मद्रास हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल से यह स्पष्ट करने को कहा था कि चेन्नई पीठ ने इस मामले को किस तरह संभाला.

शुक्रवार को रजिस्ट्रार जनरल की व्याख्या को देखने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की, ‘हाईकोर्ट में कुछ गड़बड़ चल रही है. यह सही तरीका नहीं है, जो हाईकोर्ट में हो रहा है… रजिस्ट्रार जनरल ने एक रिपोर्ट भेजी है.’

तमिलनाडु राज्य की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता पी. विल्सन ने कहा, ‘हमारे हाईकोर्ट में, जो भी मुद्दा अदालत के समक्ष आता है, उससे संबंधित मामलों में अदालत आदेश पारित कर देती है.’

इस पर जस्टिस महेश्वरी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘अगर कोई प्रथा गलत है…’

पीठ ने 13 अक्टूबर के अपने आदेश के एक हिस्से में संशोधन के लिए की गई मौखिक मांग को भी खारिज कर दिया. उस आदेश में कहा गया था कि सीबीआई जांच की निगरानी एक तीन सदस्यीय समिति करेगी, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस अजय रस्तोगी करेंगे. उन्हें तमिलनाडु कैडर से दो वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों का चयन करने को कहा गया था, जो राज्य के ‘स्थानीय निवासी’ न हों.