दिल्ली के स्मॉग के बीच चीन दूतावास ने बिगड़ती आबोहवा सुधारने के लिए ‘बीजिंग मॉडल’ साझा किया

सिंगापुर, ब्रिटेन और कनाडा ने उत्तर भारत में बिगड़ती वायु गुणवत्ता को लेकर अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की हैं. दिल्ली में वायु गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में बनी हुई है और शहर व आसपास के इलाकों में घना जहरीला स्मॉग छाया हुआ है. इस बीच, चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने वायु प्रदूषण से निपटने के लिए बीजिंग द्वारा अपनाए गए उपायों की जानकारी साझा की है.

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दिल्ली के आसमान पर छाई धुंध. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: सिंगापुर, ब्रिटेन और कनाडा द्वारा उत्तर भारत में बिगड़ती वायु गुणवत्ता को लेकर अपने नागरिकों के लिए परामर्श (एडवाइजरी) जारी किए जाने के बाद अब दिल्ली स्थित चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने वायु प्रदूषण से निपटने के लिए बीजिंग द्वारा अपनाए गए उपायों की जानकारी शेयर की है.

बुधवार (17 दिसंबर) को दिल्ली की वायु गुणवत्ता में हल्का सुधार देखा गया और वायु गुणवत्ता इंडेक्स (एक्यूआई) 328 दर्ज किया गया, जबकि इससे एक दिन पहले यह 377 था. हालांकि, वायु गुणवत्ता अब भी ‘बहुत खराब’ श्रेणी में बनी हुई है और शहर व आसपास के इलाकों में घना, जहरीला स्मॉग छाया हुआ है.

भारत में चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने मंगलवार (16 दिसंबर) को अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि ‘स्वच्छ हवा रातोंरात में नहीं मिलती- लेकिन यह हासिल की जा सकती है.’

उन्होंने लिखा, ‘बीजिंग ने वायु प्रदूषण से कैसे निपटा? चरण 1: वाहन उत्सर्जन नियंत्रण; चीन 6NI (यूरो 6 के बराबर) जैसे बहुत सख्त नियम अपनाना; पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाना; लाइसेंस-प्लेट लॉटरी और ऑड-ईवन/सप्ताह के दिनों में ड्राइविंग जैसे नियमों के जरिए कारों की संख्या पर अंकुश लगाना; दुनिया के सबसे बड़े मेट्रो और बस नेटवर्क में से एक का निर्माण; इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर तेज़ी से बढ़ना; बीजिंग–तियानजिन–हेबेई क्षेत्र के साथ मिलकर प्रदूषण में कमी लाने पर काम करना.’

इससे पहले सिंगापुर ने भारत में रह रहे अपने नागरिकों को उड़ानों के रद्द होने पर नज़र रखने की सलाह दी है, जो कि जहरीले स्मॉग के कारण विजिबिलिटी कम होने से आम हो गई हैं. ब्रिटेन के फॉरेन, कॉमनवेल्थ एंड डेवलपमेंट ऑफिस ने कहा कि गर्भवती महिलाएं और हृदय या सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोग भारत यात्रा से पहले डॉक्टर से परामर्श करें.

डीएनए अख़बार के अनुसार, ब्रिटेन ने सर्दियों के महीनों में प्रदूषण को विशेष रूप से एक ‘स्वास्थ्य खतरा’ बताया है. कनाडा की एडवाइजरी में भी लोगों से कहा गया है कि वे प्रदूषण के स्तर पर नज़र रखें, क्योंकि यह ‘तेज़ी से बदल सकता है.’

डीएनए की रिपोर्ट के अनुसार, कनाडा और ब्रिटेन – दोनों की चेतावनियों में खास तौर पर गर्भवती महिलाओं, पहले से बीमार लोगों, बच्चों, बुजुर्गों और हृदय संबंधी समस्याओं वाले लोगों पर प्रदूषण के प्रभाव पर जोर दिया गया है.

बीबीसी ने पहले रिपोर्ट किया कि सुबह के समय दिल्ली की हवा भारत के पहले से ही ढीले वायु गुणवत्ता मानकों से 30 गुना अधिक प्रदूषित थी. सरकारी सफर ऐप के अनुसार, सोमवार की सुबह दिल्ली का औसत एक्यूआई 471 दर्ज किया गया.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार को बाद में दिल्ली में एक्यूआई 498 दर्ज हुआ, जो ‘गंभीर’ श्रेणी के उच्चतम स्तर में पहुंच गया. शहर के 40 निगरानी केंद्रों में से 38 पर वायु गुणवत्ता ‘गंभीर’ और दो पर ‘बहुत खराब’ दर्ज की गई. जहांगीरपुरी में सबसे खराब स्थिति रही, जहां एक्यूआई 498 दर्ज किया गया – जो 500 की सीमा के बेहद करीब है, यह वह अधिकतम स्तर है जिसे सरकारी मॉनिटर दर्ज कर सकते हैं.

अक्टूबर से ही दिल्ली में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं, जिससे विरोध-प्रदर्शन और सरकार से कार्रवाई की मांगें तेज़ हुई हैं. हालांकि, राहत बहुत सीमित और कभी-कभार ही मिली है, जबकि वायु गुणवत्ता में गिरावट पहले से अधिक तीव्र होती गई है.

सर्वे में सामने आया, वायु संकट और गंभीर

जहरीले स्मॉग और कम विज़िबिलिटी संकट के बीच लोकल सर्कल्स द्वारा किए गए एक नए सर्वे में पाया गया कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के 82% निवासियों के अपने करीबी सामाजिक दायरे में एक या ज्यादा ऐसे लोग हैं, जो प्रदूषित हवा के संपर्क में आने से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित हैं.

दिसंबर में किए गए और ‘दिल्ली एनसीआर की जानलेवा जहरीली हवा’ शीर्षक वाले इस सर्वे में कहा गया कि 28% लोगों ने बताया कि उनके परिवार, दोस्तों, पड़ोसियों या सहकर्मियों में चार या उससे अधिक ऐसे लोग हैं.

इस सर्वे में दिल्ली, गुड़गांव, नोएडा, फरीदाबाद और गाजियाबाद के 34,000 से अधिक लोगों की प्रतिक्रियाएं शामिल हैं. उनसे यह सवाल पूछा गया था: ‘दिल्ली-एनसीआर में आपके सामाजिक नेटवर्क (परिवार, मित्र, पड़ोसी, सहकर्मी) में – स्वयं को मिलाकर – कितने ऐसे लोग हैं जिन्हें फेफड़ों का कैंसर, सीओपीडी, अस्थमा, फेफड़ों को नुकसान, हार्ट फेलियर, हार्ट स्ट्रोक, ब्रेन स्ट्रोक, सोचने-समझने की क्षमता में कमी, प्रजनन या हड्डियों से जुड़ी समस्याएं जैसी गंभीर बीमारियां हुई हैं, और जिनका कारण वे लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क को मानते हैं?.’

सिर्फ 18% लोगों ने कहा कि उनके सामाजिक दायरे में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है. लगभग 73% लोगों ने जहरीले स्मॉग संकट से उत्पन्न किसी स्वास्थ्य आपात स्थिति के इलाज का खर्च वहन कर पाने को लेकर चिंता जताई.

दिल्ली-एनसीआर के केवल 8% निवासियों ने कहीं और जाकर बसने पर विचार किया, जबकि 92% लोगों ने कहा कि उनका यहीं रहना मजबूरी है.

पहले के निष्कर्ष: एक चेतावनी

इससे पहले नवंबर में संकट की शुरुआत के समय लोकल सर्कल्स द्वारा किए गए एक सर्वे में यह भी सामने आया था कि दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुड़गांव और फरीदाबाद के 66% निवासियों को सरकार या प्रशासन की इस क्षमता पर भरोसा नहीं है कि वह जहरीली हवा की समस्या का समाधान कर पाएगा.

लोगों का मानना था कि अधिकारी ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (जीआरएपी) के नियमों को प्रभावी ढंग से लागू नहीं कर सकते. सर्वे में 78% लोगों ने यह भी कहा कि उन्हें लगता है कि सरकार को इस बात की चिंता नहीं है कि लोगों को जहरीली हवा में सांस लेनी पड़ रही है.

ये निष्कर्ष एनसीआर के 53,000 से अधिक लोगों के साक्षात्कार पर आधारित थे.

सर्वे में यह भी पाया गया कि एनसीआर के केवल 8% निवासियों ने कहा कि प्रदूषण के अत्यधिक और लंबे समय तक संपर्क में रहने से उनके परिवार का कोई सदस्य बीमार नहीं हुआ. 14% लोगों ने इस सवाल- पिछले 4 हफ्तों में दिल्ली-एनसीआर में आपके परिवार (बच्चों सहित) के कितने सदस्य जहरीली हवा/प्रदूषण से प्रभावित हुए हैं? – के जबाव में कहा कि वे ‘निश्चित नहीं’ हैं.

82% लोगों ने कहा कि उनके परिवार में कम से कम एक सदस्य ऐसा है जो प्रदूषण से प्रभावित हुआ है, और 36% ने बताया कि उनके परिवार में चार या उससे अधिक सदस्य हैं जिन्हें प्रदूषण के संपर्क से परेशानी हुई है. इस प्रश्न के उत्तर 18,000 से अधिक सही जवाबों पर आधारित थे.

इसी तरह, 18,000 से अधिक लोगों में से 78% ने कहा कि उन्हें अपने जिले, शहर या राज्य के प्रशासन पर यह भरोसा नहीं है कि वह इस बात को लेकर चिंतित है कि ‘आप और आपका परिवार इतनी जहरीली हवा में सांस ले रहे हैं.’

लोकल सर्कल्स ने नवंबर की अपनी रिपोर्ट में कहा, ‘अध्ययनों से यह स्पष्ट हुआ है कि वातावरण में मौजूद सूक्ष्म कण (पीएम2.5/पीएम10) और मृत्यु दर में वृद्धि, अस्थमा व क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिज़ीज़ (COPD) के कारण अस्पताल में भर्ती होने, और यहां तक कि हृदय संबंधी घटनाओं के बीच मजबूत संबंध है. फेफड़ों से परे भी, विशेषज्ञ अब लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क से उच्च रक्तचाप, मधुमेह, एनीमिया और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की बढ़ी हुई दरों की ओर इशारा कर रहे हैं.’

मौजूदा स्थिति

अन्य देशों की सरकारों द्वारा जारी एडवाइजरी और उड़ानों के रद्द होने के बीच दिल्ली में जीआरएपी–IV – यानी प्रदूषण रोकने के लिए सबसे सख्त नियम – लागू कर दिया गया है.

यह कदम पिछले कुछ दिनों में एनसीआर में हालात और बिगड़ने के बाद उठाया गया. इससे पहले जीआरएपी –III लागू था, जिसके तहत प्रदूषण फैलाने वाली कुछ गतिविधियों पर रोक और वाहनों के लिए प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसी) अनिवार्य किया गया था.

13 दिसंबर को सरकार ने जीआरएपी –IV लागू किया, जिसमें निजी और व्यावसायिक वाहनों तथा निर्माण गतिविधियों पर सख्त प्रतिबंध शामिल हैं. हालांकि, अब तक दिल्ली-एनसीआर के निवासियों को इससे कोई खास राहत नहीं मिली है.

भारत में आधिकारिक तौर पर एक्यूआई के स्तर इस प्रकार माने जाते हैं: 101–200: मध्यम, 201–300: खराब, 301–400: बहुत खराब, 400 से ऊपर: गंभीर, अधिकतम सीमा 500 है. हालांकि, बीबीसी ने बताया कि निजी मॉनिटरों के अनुसार स्थिति इससे कहीं ज्यादा खराब है. एक्यूआई 0–50 को ‘अच्छा’ और 51–100 को ‘संतोषजनक’ माना जाता है.

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) प्रदूषण के स्तर की निगरानी करता है और जीआरएपी प्रणाली के तहत सुधारात्मक कदम लागू करता है.